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ट्रंप और मोदी एक जैसा होकर भी हैं कितने अलग!

दोनों नेता हर मुद्दे पर ट्वीट करते रहते हैं मगर मोदी ट्रंप की तुलना में ट्विटर का अलग तरह से इस्तेमाल करते हैं

Aakar Patel Updated On: May 22, 2017 11:02 PM IST

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ट्रंप और मोदी एक जैसा होकर भी हैं कितने अलग!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल चुनाव प्रचार के दौरान ढेर सारे वादे किए थे. इनमें सबसे दिलचस्प वादा था, 'दलदल को साफ कर डालूंगा'. दलदल यानी अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी.

कहा जाता है कि वॉशिंगटन डीसी शहर की नींव एक दलदल के ऊपर रखी गई थी. आज की तारीख में ट्रंप और उनके तमाम वादे मजाक बनकर रह गए हैं. ट्रंप, जिन्होंने अमेरिका के करोड़ों लोगों में उम्मीद जगाई थी, वो पूरी तरह नाकाबिल नेता और प्रशासक साबित हुए हैं.

चुनाव के दौरान ट्रंप को बेहद अक्लमंद बताकर प्रचारित किया गया. मगर शुरुआत के चार महीनों में वो एक मसखरे साबित हुए हैं. ऐसा मसखरा, जो नाकारा है. जिसे बहुत गुस्सा आता है. आज की तारीख में ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप का अपनी सरकार पर ही कोई नियंत्रण नहीं.

ट्विटर की वजह से ट्रंप की बिगड़ी छवि

ट्रंप की छवि इतनी खराब नहीं होती, अगर वो ट्विटर से थोड़ी दूरी बना लेते. मगर ट्रंप को तो ट्वीट करने की लत है. इसकी वजह से उनका सनकी बर्ताव दुनिया के सामने आ गया है. वो बात-बेबात पर अपनी राय ट्विटर पर जाहिर करते हैं. वो अक्सर विस्मयबोधक चिह्न (!) के साथ ट्वीट करते हैं. हर मसले पर उन्हें कुछ न कुछ बोलना होता है. ऐसे में उनके मीडिया मैनेजरों के लिए भी उनकी अच्छी छवि बनाए रखना मुश्किल होता है.

Donald Trump

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मीडिया से छत्तीस का आंकड़ा रहा है

ट्रंप जिस रफ्तार से ट्वीट करते हैं, वो हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी मिलता-जुलता है. मोदी भी ट्रंप की तरह तमाम मुद्दों पर ट्वीट करते रहते हैं. मगर मोदी, ट्विटर का अलग तरह से इस्तेमाल करते हैं.

दोनों राष्ट्राध्यक्षों के ट्विटर पर लगभग तीन करोड़ फॉलोवर हैं. दोनों ने मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया के जरिए ट्रंप और मोदी ने वोटर से सीधा संवाद किया. दोनों नेता पत्रकारों पर भरोसा नहीं करते. ट्रंप को लगता है कि पत्रकार उनके साथ भेदभाव करते हैं. ट्रंप का कहना है कि उनकी काबिलियत और अक्लमंदी को न विरोधी समझते हैं और न ही मीडिया इसे मानता है.

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि गुजरात में सांप्रदायिक दंगों का उनके खिलाफ लगातार इस्तेमाल किया जाता है. जबकि मोदी के मुताबिक उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया. जब से मोदी ने गुजरात की गद्दी संभाली थी, कमोबेश उसी वक्त से सोशल मीडिया का सितारा उदय हुआ था. उसकी दिनों-दिन बढ़ती लोकप्रियता का मोदी ने बखूबी इस्तेमाल किया.

मीडिया की जरूरत और परत को खत्म किया

सोशल मीडिया के जरिए मोदी लोगों से सीधे जुड़े. उन्होंने संवाद के लिए मुख्यधारा के मीडिया की जरूरत और परत को खत्म कर दिया. ट्विटर के अवतरण से पहले मोदी अक्सर पत्रकारों से भिड़ जाते थे. एक बार तो वो करण थापर के साथ इंटरव्यू के बीच से उठकर चले गए थे.

इससे जाहिर है कि मोदी भी मीडिया से उसी तरह नाखुश और नाराज हैं, जैसे कि ट्रंप. उन्हें भी मीडिया के सवालों से खीझ होती है. मगर मोदी मीडिया से ट्रंप के मुकाबले बिल्कुल अलग तरह से निपटते हैं.

Narendra Modi

पीएम मोदी ट्विटर का इस्तेमाल ट्रंप की तुलना में सोच-समझकर करते हैं (फोटो: पीटीआई)

दोनों नेता जिस तरह ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं, उससे दोनों के बीच फर्क एकदम से समझ में आ जाता है. ट्रंप तमाम मुद्दों पर ट्विटर के जरिए फौरन अपनी राय जाहिर करते हैं. वो अपना गुस्सा और खीझ भी ट्विटर पर जताने से नहीं हिचकते.

18 मई को उनकी अपनी सरकार के न्याय विभाग ने ट्रंप के प्रचार में रूस के रोल की पड़ताल का आदेश दिया. इससे भड़के ट्रंप ने ट्वीट किया, 'किसी शख्स के खिलाफ बेजा मुहिम चलाने की अमेरिका के इतिहास की ये सबसे बड़ी मिसाल है!'

ट्रंप ने देश के पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों से भी अपनी तुलना की और कहा कि उनके साथ नाइंसाफी हो रही है. ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, 'क्लिंटन के प्रचार अभियान और ओबामा सरकार के दौरान बहुत से गैरकानूनी काम हुए, लेकिन उनकी जांच के लिए कोई विशेष आदमी नियुक्त नहीं किया गया!'

किसी के बारे में कुछ भी कहने में हिचक नहीं

ट्रंप लोगों से बुरा सलूक करने में भी नहीं हिचकते. वो पत्रकारों पर खुला हमला करते हैं. उन्हें किसी के बारे में कुछ भी कहने में कोई हिचक नहीं होती. वो अक्सर ट्विटर से ऐसा करते रहते हैं. 12 मई को ट्रंप ने ट्वीट किया, 'आजकल फर्जी मीडिया ओवरटाइम कर रहा है!'

Indian Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के ट्विटर पर 3 करोड़ से अधिक फॉलोअर हैं

ये कहा जा सकता है कि ट्रंप ईमानदारी से अपनी राय रखते हैं. लेकिन ये समझना मुश्किल है कि ऐसी बचकानी हरकतों से आखिर ट्रंप को क्या फायदा होता है. यहीं पर मोदी, ट्रंप से पूरी तरह अलग हैं. मैंने पहले भी कहा है कि दोनों ही नेताओं की मीडिया के बारे में राय एक जैसी ही है. लेकिन मोदी, सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी बहुत सावधानी से करते हैं. जब वो ट्वीट करते हैं, तो बेहद एहतियात से करते हैं.

आम तौर पर मोदी की ट्विटर टाइमलाइन पर उनके कार्यक्रमों का ब्यौरा रहता है. इस बात की जानकारी होती है कि उन्होंने दिन में क्या-क्या किया. मिसाल के तौर पर 19 मई को मोदी ने ट्वीट किया, 'आज नागालैंड के आदिवासियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मेल-मुलाकात हुई.' या फिर वो लोगों को ट्विटर पर बधाइयां देते हैं. अक्सर वो दूसरे नेताओं को ट्विटर के जरिए जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हैं.

ट्विटर पर बड़े राजनीतिक फैसलों के जानकारी देते हैं

जैसे अभी हाल ही में 17 मई को मोदी ने ट्विटर पर लिखा, 'किसानों के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री श्री एच डी देवेगौड़ा को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं. भगवान आपको अच्छी सेहत और लंबी उम्र दें.' इसी तरह 19 मई को मोदी ने ट्वीट किया, 'प्रिय राष्ट्रपति अशरफ गनी. आपको जन्मदिन की ढेरों बधाइयां. भगवान आपको अच्छी सेहत और लंबी उम्र दे.'

मोदी अक्सर बड़े राजनीतिक फैसलों की जानकारी भी ट्विटर के जरिए देते हैं. अक्सर वो आधिकारिक वेबसाइट पर आई खबर के लिंक अपने ट्विटर पर टैग कर के देते हैं. वो अखबारों की खबरों या कतरनों को बेहद कम टैग करते हैं.

Donald Trump

अपने बयानों और ट्वीट के चलते राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता में कमी आ रही है (फोटो: रॉयटर्स)

प्रधानमंत्री मोदी की ट्विटर टाइमलाइन देखकर ये पता लगाना बेहद मुश्किल है कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के बारे में ये नहीं कहा जा सकता. अब तो पत्रकार ट्रंप का ट्वीट देखकर ये तक अंदाजा लगा लेते हैं कि वो ट्वीट करने से पहले कौन सा चैनल देख रहे होंगे.

मोदी और ट्रंप दोनों ही खुद को बाहरी बताकर, सिस्टम को साफ करने का वादा कर के सत्ता में आए थे. मोदी जहां पिछले तीन साल से सरकार चला रहे हैं. वहीं ट्रंप को अभी सरकार चलाते हुए चार महीने ही हुए हैं. मगर आज ट्रंप को नाकारा और नाकाम घोषित किया जा रहा है. उनके समर्थक तक ये बात कर रहे हैं.

मोदी की ट्रंप जैसी आलोचना नहीं हो रही

मोदी ने भी कई गलतियां की हैं. कई वादे पूरे करने में नाकाम रहे हैं. लेकिन सावधानी बरतने की वजह से उनकी उस तरह से आलोचना नहीं हो रही, जिस तरह ट्रंप की हो रही है.

ट्रंप की रोजाना की बचकाना बातें, और खुद को पीड़ित बताकर छाती पीटने की हरकतें, उनके खिलाफ ही जा रही हैं. दुनिया की सबसे ताकतवर गद्दी पर बैठे, दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स कहे जाने वाले आदमी का ऐसा बर्ताव वाकई बेहद शर्मनाक है.

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