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शून्य की खोज: 5000 साल पहले भारतीयों ने किया था यह कमाल!

अभी तक वैज्ञानिकों का मानना था कि शून्य की खोज 4500 साल पहले हुआ था

Bhasha Updated On: Sep 17, 2017 03:56 PM IST

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शून्य की खोज: 5000 साल पहले भारतीयों ने किया था यह कमाल!

शून्य को हम आम लोग जितने हल्के में लेते रहे हैं, उसके अविष्कार की जानकारी हमेशा उतनी ही चौंकानेवाली रही है. हाल ही में एक और खुलासा ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने किया है. उनका दावा है कि शून्य का आविष्कार जिस समय माना जाता है, उससे करीब 500 साल पहले ही हो गया था. यानी चौथी शताब्दी में ही शून्य का खोज कर लिया गया था.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मार्क्स डू सौतोव ने कार्बन डेटिंग का इस्तेमाल कर शून्य की खोज या उसके मूल का पता लगाया है. उन्होंने इसके लिए प्राचीन भारतीय बख्शाली पांडुलिपि को समझा. यह पांडुलिपि ब्रिटेन के बोडलीयन लाइब्रेरी में 1902 से संभाल कर रखी गई है.

पेशावर के गांव बक्षाली में पाई गई थी बख्शाली पांडुलिपि 

बख्शाली पांडुलिपि 1881 में पेशावर के गांव बक्षाली में पाई गई थी. यह हिस्सा अब पाकिस्तान में आता है. उस समय इसे एक किसान ने ढूंढा था.

मार्क्स डू सौतोव ने बताया कि 'आधुनिक समय में जीरो वाकई एक महत्वपूर्ण संख्या है. इसका अपना इतिहास रहा है. मैं इसकी खोज की जानकारी के बारे में समझने को काफी उत्सुक था.'

उनके मुताबिक 'मैं धन्यवाद देता हूं बोडलीयन लाइब्रेरी को जिसने मुझे इस शोध में मदद की. क्योंकि इसके लिए मुझे इस ऐतिहासिक पांडूलिपि के छोटे से हिस्से को जलाना था. लेकिन उनलोगों ने किसी तरह की नुकसान के बारे में सोचने के बजाए शोध ही महत्ता को समझा और आज दुनिया के सामने यह महत्वपूर्ण जानकारी है.'

लगाई जाएगी 'भारत: विज्ञान और अविष्कार के 5000 साल' प्रदर्शनी 

इससे पहले सभी इसे 8वीं से 12वीं सेंचुरी का समझते थे. लेकिन सभी उस वक्त चौंक गए जब यह पता कि इसकी खोज तो चौथी सदी में ही कर ली गई थी. लोगों के जीवन में गणित उस समय ही आ गया था.

इस पांडुलिपि को बोडलीयन लाइब्रेरी में वापस रखने से पहले प्रदर्शित किया जाएगा. इसे लंदन के साइंस म्यूजियम में चार अक्तूबर को लोगों के सामने प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा. इसके लिए  'भारत: विज्ञान और अविष्कार के 5000 साल' नाम से प्रदर्शनी आयोजित किया जा रहा है.

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