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एच-1 बी वीज़ा के नियम आसान करे अमेरिका- सुरेश प्रभु

प्रभु ने अमेरिका को आम और अनार का आयात आसान करने की भी अपील की

Bhasha Updated On: Oct 28, 2017 06:10 PM IST

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एच-1 बी वीज़ा के नियम आसान करे अमेरिका- सुरेश प्रभु

केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि भारत ने एच-1बी और एल1 वीजा का मुद्दा अमेरिका के सामने "बहुत दृढ़ता से" उठाया है और अमेरिकी को समझाया है कि पाबंदियों से उसकी अर्थव्यवस्था के लिए स्थिति कितनी मुश्किल हो सकती है क्यों कि उसे भारतीय आईटी पेशेवरों से बड़ा फायदा हुआ है.

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी श्रमिकों को रोजगार मुहैया करवाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी एच-1 बी और एल 1 वीजा जारी करने के नियम सख्त कर दिए गए हैं. अमेरिकी कंपनियां विदेशी पेशेवरों को कम अवधि के काम पर बुलाने के लिए इस वीजा का इस्तेमाल करती हैं. यह वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों में बड़ा लोकप्रिय है.

ट्रंप प्रशासन ने इसी हफ्ते एच-1बी और एल1 वीजा का समय बढ़ाने के नियमों को कड़ा कर दिया है और इसको साबित करने की जिम्मेदारी कर्मचारियों पर ही डाल दी गयी है. अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार नीति मंच (टीपीएफ) की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, "हमने अमेरिका के सामने दृढ़ता से भारतीय पेशेवरों के और एच-1बी वीजा और एल 1 वीजा के मुद्दे उठाए हैं." इस बैठक में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर भी शामिल थे.

प्रभु ने कहा, "हमने उनको समझाया कि हम इस मुद्दे को केवल इसलिए नहीं उठा रहे हैं कि इससे भारतीयों को अमेरिका आने में दिक्कत होगी, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी कठिनाई होगी क्योंकि बाहर से आने वाले आईटी पेशेवरों की वजह से अमेरिका को काफी फायदा हुआ है. ये पेशेवर ऐसी सेवाएं देते हैं जिनसे कंपनियों की उत्पादकता में सुधार हुआ है." केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी इस मुद्दे पर गौर करेंगे.

उन्होंने भरतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की ओर से टोटलाइजेशन का मामला भी उठाया. टोटलाइजेशन के तहत भारतीय कंपनियां चाहती है कि अल्पकालिक नौकरी पर अमेरिका आने वाले कर्मचारियों से अमेरिका में पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के लिए कटौती न की जाएं क्योंकि वे अंशदान देने के बावजूद यहां उसका लाभ नहीं उठा पाते हैं.

वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने और बढ़ते हुए व्यापार घाटे पर भी ध्यान देने के लिए सहमत हुए हैं. प्रभु ने अमेरिका से आम और अनार के निर्यात को को भी आसानी बनाने की मांग की है. वाणिज्य मंत्री ने अमेरिकी कंपनियों से भारत में मेक इन इंडिया नीति का लाभ उठाने के लिए भारत में विनिर्माण इकाइयां लगाने की अपील की.

भारत चाहता है कि अमेरिका भारत से आने वाले फलों की खेप साफ-सफाई और गुणवत्ता को स्वीकृति-पूर्व प्रमाण के लिए भारत के राष्ट्रीय पादप संरक्षण संगठन को मान्यता प्रदान करे क्योंकि यह संगठन इसमें पूरी तरह सक्षम है. प्रभु ने कहा कि भारतीय अनार और अंगूर अमेरिका के लोगों को भी मिलना ही चाहिए.

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