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शेख हसीना की जितनी जरूरत बांग्लादेश को है, उतनी भारत को भी

हसीना का सत्ता में बने रहना दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है

Shantanu Mukharji Updated On: Apr 06, 2017 09:24 PM IST

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शेख हसीना की जितनी जरूरत बांग्लादेश को है, उतनी भारत को भी

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत की अगली यात्रा को लेकर दोनों देशों के बीच ऐसा उत्साह, उम्मीद और सौहार्द है जो शायद पहले कभी दिखाई नहीं दिया. हालांकि, हसीना पीएम बनने से पहले से लगातार भारत आती रही हैं क्योंकि उनके बच्चे कोडाइकनाल में पढ़ रहे थे.

बांग्लादेश में चल रहे उथल-पुथल के दौर में उनके जीवन को लेकर खतरा पैदा हो गया था ऐसे में उन्होंने अपने बच्चों को भारत पढ़ाई के लिए शिफ्ट कर दिया था.

क्यों अहम है यह दौरा?

ऐसे में सात साल बाद उनकी आधिकारिक यात्रा के क्या मायने हैं और यह दौरा इतना खास क्यों है? दोनों देशों के प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस दौरे को लेकर सरगर्मी है और जमकर टॉक शो और डिबेट्स चल रही हैं. शेख हसीना के इस दौरे में कई सारे मसलों पर चर्चा होनी है और तकरीबन 30 से 35 एग्रीमेंट्स पर दस्तखत इस दौरान होने हैं.

भारत के सैनिकों की शहादत का सम्मान

1971 की बांग्लादेश की आजादी की जंग में शहादत देने वाले 1661 भारतीय सैनिकों को मृत्योपरांत सम्मान देने का हसीना का मास्टरस्ट्रोक भी बेहद अहम माना जा रहा है. यह न केवल बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में भारत के योगदान को मान्यता देना है, बल्कि यह शौर्य का परिचय कराते हुए शहीद हुए भारतीय सैनिकों को एक श्रद्धांजलि भी है. इसे लंबे वक्त तक याद रखा जाएगा.

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भारत का योगदान सकारात्मक रूप से दर्ज हो पाठ्यक्रम में

हालांकि, इसके साथ यह भी कहना होगा कि हसीना को निर्णायक तौर पर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ढाका के शिक्षाविद और अकैडेमिक भारत के इस योगदान को स्कूलों में सकारात्मक तरीके से इतिहास के पाठ्यक्रम में दर्ज करें ताकि बांग्लादेश की वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी को 1971 की आजादी की लड़ाई में भारत की हिस्सेदारी का सही ज्ञान हो. बांग्लादेश में मौजूद भारत विरोधी ताकतों के हाथों इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश किए जाने को रोकना तय करना होगा.

3.5 अरब डॉलर की मदद देगा भारत

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, हसीना की यात्रा के दौरान बांग्लादेश को 3.5 अरब डॉलर की तीसरी क्रेडिट लाइन ऑफर की जाएगी. इस पूरे आवंटन में मोटे तौर पर, 94 करोड़ डॉलर रूपपुर न्यूक्लियर प्लांट के लिए, 35 करोड़ डॉलर पायरा पोर्ट पर मल्टीपरपज टर्मिनल के लिए, 17.7 करोड़ डॉलर बोगरा और झारकंड के बीच पावर ट्रांसमिशन लाइन के लिए दिए जाएंगे.

इसके अलावा, 50 करोड़ डॉलर बोगरा से सिराजगंज के बीच नई रेलवे लाइन के लिए और 17.7 करोड़ डॉलर सोलर प्लांट के लिए दिए जाने हैं. सहमति पत्रों (एमओयू) और अलग-अलग समझौतों के जरिए बांग्लादेश के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की बड़ी मदद की जाएगी.

तीस्ता समझौता रहेगा चर्चा से बाहर

तीस्ता जल समझौते पर चर्चा नहीं की जाएगी क्योंकि यह हसीना सरकार के विरोधियों को आलोचना का मौका देता है. बांग्लादेश के वाटर एक्सपर्ट मानते हैं कि तीस्ता हर साल दिसंबर से मार्च तक अहम बनी रहती है क्योंकि वाटर फ्लो 5,000 क्यूसेक से गिरकर 1,000 क्यूसेक पर आ जाता है.

सबसे अहम हैं सुरक्षा मसले

हालांकि, उनके दौरे के मुख्य मसलों में दोनों देशों के बीच एक डिफेंस और सिक्यॉरिटी कोऑपरेशन समझौते पर दस्तखत शामिल है. पिछले साल 1 जुलाई से बांग्लादेश लगातार आतंकी हमलों से जूझ रहा है.

आईएस की मौजूदगी इन हमलों में दिखाई दी है, हालांकि सरकार इससे इनकार करती रही है. आतंकी हमलों को घरेलू टेरर ग्रुप जेएमबी (जमातउल मुजाहिदीन बांग्लादेश) और इससे जुड़े हुए ग्रुप्स की करतूत बताया जाता है. ये ग्रुप्स अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं. इनके पास आधुनिक हथियार हैं. पाकिस्तान से इन्हें फंडिंग मिल रही है.

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आईएसआई का नेटवर्क इन्हें हथियार और अन्य मदद मुहैया करा रहा है. इनका मकसद बांग्लादेश की मौजूदा सरकार को अस्थिर करना और भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत होते संबंधों को खराब करने की कोशिशें करना है.

खुफिया सूचनाओं के लिए तालमेल पर चर्चा

खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान का एक मैकेनिज्म तैयार करने के लिए भी दोनों देशों को साथ आना होगा ताकि ठोस खुफिया सूचनाओं के आधार पर त्वरित कदम उठाए जा सकें और आतंकी नेटवर्क को कमजोर किया जा सके. ऐसा लग भी रहा है कि इंटेलिजेंस प्राथमिकता में है.

बांग्लादेश का काउंटर टेरर तंत्र आर्मी की मदद से संचालित होता है और यह प्रोफेशनल तौर पर काफी मजबूत है. आतंकी घटनाओं से जुड़े बंधक संकट से हालांकि हर बार सफलतापूर्वक निपटा गया है, इसके बावजूद बांग्लादेश का इंटेलिजेंस हर बार आतंकी घटनाओं के पहले इनपुट हासिल करने में सफल नहीं रहा है. ऐसे में इस दिशा में भारत तकनीकी चीजों और अपनी इस बारे में विशेषज्ञता को बांग्लादेश को ऑफर कर सकता है ताकि खुफिया सूचनाएं जुटाने में बांग्लादेश और समर्थ हो सके.

हसीना की सुरक्षा प्राथमिकता में

सिक्योरिटी के मसले पर दोनों देशों के पास बड़े मौके हैं. प्रधानमंत्री शेख हसीना की पर्सनल सिक्योरिटी पर चर्चा करना काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें इस्लामिक चरमपंथियों से बड़ा खतरा है. वह इस वक्त एकमात्र ऐसी लीडर हैं जो भारत की दोस्त हैं और जिन्होंने चरमपंथ को खत्म करने में पूरी ताकत लगा रखी है. ऐसे में उनकी पुख्ता सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है. दोनों देशों के प्रोफेशनल्स को इसे ठोस बनाने की दिशा में बातचीत करनी चाहिए.

बांग्लादेश आर्म्ड फोर्सेस पर नजर रहे

इसी तर्ज पर, बांग्लादेश को भारत की मदद मांगनी चाहिए कि बांग्लादेश आर्म्ड फोर्सेस में ऐसे तत्व न दाखिल हो जाएं जो कि हसीना के खिलाफ काम करें. बांग्लादेशी आर्म्ड फोर्सेज एक बेहद राजनीतिक रूप से प्रभावित और इस्लामिक कट्टरता की ओर झुकाव वाला रहा है. इसमें कई विद्रोह और तख्तापलट की घटनाएं देखी गई हैं. ऐसे में इस मोर्चे पर भी काफी सतर्क रहने की जरूरत है.

हसीना का सत्ता में रहना दोनों देशों के लिए जरूरी

जितनी बांग्लादेश को हसीना की जरूरत है उतनी ही इंडिया को भी उनकी जरूरत है. उनका सत्ता में बने रहना दोनों देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

(लेखक रिटायर्ड आईपीएस अफसर हैं. वह एक सिक्योरिटी अनालिस्ट हैं और ढाका और नई दिल्ली से बांग्लादेश के साथ जुड़े रहे हैं. उनकी राय व्यक्तिगत है.)

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