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आज भी रूसियों के दिलों पर राज कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के शोमैन

रूस में युवाओं से लेकर कई पीढ़ियां राज कपूर और उनके सिनेमा को भली भांति जानती हैं और उन्हें बॉलीवुड का नंबर एक हीरो मानती है

Bhasha Updated On: Aug 13, 2017 04:00 PM IST

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आज भी रूसियों के दिलों पर राज कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के शोमैन

भले ही रणबीर कपूर भारत में अपने जलवे बिखेर रहे हों लेकिन रूस में अब भी सिर्फ एक ही कपूर रॉकस्टार है और वह हैं रणबीर के दादा राज कपूर.

शोमैन राज कपूर के निधन को 29 साल से ज्यादा हो गए लेकिन वह अब भी रूस में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बादशाह हैं.

रूस में युवाओं से लेकर कई पीढ़ियां राज कपूर और उनके सिनेमा को भली भांति जानती हैं और उन्हें बॉलीवुड का नंबर एक हीरो मानती है. जबकि भारतीय कलाकारों की नई पीढ़ी ने वैश्विक तौर पर अपनी पहचान बनाई है और दुनियाभर में उनकी फिल्में रिलीज हो रही है.

25 वर्षीय एनी वो ने कहा, ‘निश्चित तौर पर अब भी रूस में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सिरमौर का खिताब राज कपूर के पास है. जब हम भारतीय सिनेमा की बात करते हैं तो सबसे पहले उनका नाम आता है.’ वियतनाम मूल की मॉस्को में जन्मी वो ने कहा कि अभिनेता ने जीवन की सच्चाई से जुड़े जो किरदार निभाए उसके कारण वह उनके ‘पसंदीदा’ हैं.

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘उनके किरदार जमीन से जुड़े और सच्चे हैं. कोई भी उम्र, नस्ल, शिक्षा और सामाजिक स्थिति को परे रखकर उनकी फिल्मों से जुड़ सकता है.’

भारतीय व्यंजन परोसने वाले बारडेल्ही रेस्त्रां की क्रिएटिव डायरेक्टर और प्राय: हिन्दी फिल्मों की स्क्रीनिंग करने वाली वो ने कहा कि उन्होंने रणबीर के बारे में सुना है और ‘बर्फी’ देखी है लेकिन राज कपूर की विरासत टिकी हुई है.

राज कपूर से ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं रूसी

उन्होंने कहा, ‘आप मुझे दकियानूसी बुला सकते हैं लेकिन मैं राज कपूर के युग के अभिनेताओं से ज्यादा जुड़ाव महसूस करती हूं.’ राज कपूर का जून 1988 में 63 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. उन्होंने श्री 420 और आवारा जैसी कई क्लासिक फिल्मों में अभिनय किया और उन्हें ‘भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा शोमैन’ माना जाता है.

मॉस्को में कई लोगों का मानना है कि उनके सिनेमा ने रूस की भारतीय फिल्मों से पहचान कराई और यही वजह है कि उनका जादू अब भी सिर चढ़कर बोल रहा है.

वो का कहना है कि कपूर के अलावा लोग मिथुन चक्रवर्ती, शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और प्रियंका चोपड़ा को भी पसंद करते हैं.

एक पीआर कपंनी में काम करने वाली नोजिमा करिमोवा ने उन यादों को ताजा किया जब ताशकंद फिल्म महोत्सव में अभिनेता का भव्य स्वागत किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘लोग उनकी यात्रा के बारे में ऐसे बात करते हैं जैसे वह किसी देश के प्रमुख या दुनिया में किसी सेलिब्रिटी से बड़ी शख्सियत हों.’

एक टीवी और किताब श्रृंखला के क्रिएटर लियोनिद पार्फीनोव ने रूस में भारतीय फिल्मों के लोकप्रिय होने की वजह के बारे में कहा, ‘मैंने फिल्मों में महिलाओं को अक्सर रोते और हंसते देखा और ये चीजें बताती हैं कि यह फिल्म जिंदगी के बारे में है.’

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