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अमेरिका में बोले राहुल: असहिष्णुता, बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी चुनौती

राहुल ने बैठकों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के दौरान देश में रोजगार सृजन का न हो पाना और बढ़ती हुई असहिष्णुता को लेकर चिंता जाहिर की

Bhasha Updated On: Sep 19, 2017 04:15 PM IST

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अमेरिका में बोले राहुल: असहिष्णुता, बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी चुनौती

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने असहिष्णुता और बेरोजगारी को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर चुनौती पैदा करने वाला करार दिया है.

राहुल ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति झुकाव रखने वाले थिंक टैंक सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस (सीएपी) की ओर से वॉशिंगटन में आयोजित भारतीय/दक्षिण एशियाई विशेषज्ञों के गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने के दौरान यह बातें कहीं.

राहुल ने इस दौरान कई बैठकें भी कीं. इस बैठक में हिस्सा लेने वाले प्रमुख लोगों में सीएपी प्रमुख नीरा टंडन, भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा और हिलेरी क्लिंटन के शीर्ष कैंपेन सलाहकार जॉन पोडेस्टा भी शामिल थे.

बैठक में शामिल लोगों के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की दक्षिण एशिया संभाग की प्रमुख लीजा कुर्टिस ने सुबह के नाश्ते के दौरान राहुल के साथ चर्चा की. ट्रंप प्रशासन के अधिकारी ने इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हाल ही में घोषित अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया नीति को लेकर राहुल से उनके विचार पूछे.

अमेरिका-भारत व्यापार परिषद की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यूएस चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष और सीईओ थॉमस जे. डोनोह्यू ने राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की.

रोजगार सृजन में नाकामी और बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता जताई

इस बैठक के दौरान राहुल ने भारत में रोजगार सृजन में सरकार की असमर्थता पर चिंता जताई. उनका मानना यह स्थिति देश को खतरे की ओर लेकर जा रही है.

राहुल ने वाशिंगटन पोस्ट की संपादकीय टीम के साथ ऑफ-द-रिकार्ड बातचीत में दुनिया भर, खास तौर से भारत में बढ़ रही असहिष्णुता पर चिंता जताई.

सोमवार शाम को राहुल ने बंद कमरे में हुई एक बैठक में हिस्सा लिया, जिसका आयोजन रिपब्लिकन रणनीतिकार पुनीत अहलूवालिया और अमेरिकन फॉरेन पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने संयुक्त रूप से किया था.

अहलूवालिया ने कहा, ‘मैं कहूंगा कि, वह ऐसे व्यक्ति नहीं दिखे जिन्हें मुद्दों की जानकारी ना हो. वह मुद्दों को समझते हैं. राहुल जमीनी स्तर की हकीकत समझने वाले नेता के तौर पर दिखे. सभी लोग जब बाहर निकले तो उनके मन में चर्चा को लेकर बहुत सकारात्मक भाव था.’

माना जा रहा है कि राहुल ने वर्जीनिया के गवर्नर टेरी मैकएलिफ से भी भेंट की है. इन सभी बैठकों में हिस्सा लेने वालों का भी मानना है कि भारत के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती रोजगार और असहिष्णुता है.

इन बैठकों में राहुल के साथ मौजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने कहा, ‘लोगों ने कहा कि हमें जैसा बताया गया था, वह बिलकुल उसके विपरीत हैं. उन्होंने कहा कि वह तर्कपूर्ण हैं, वह गंभीरता से विचार करते हैं, वह मुद्दों को समझते हैं.’ उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के विरोधियों द्वारा नियुक्त लोग उनकी नकारात्मक छवि बना रहे हैं. पित्रोदा ने कहा कि राहुल गांधी विकेंद्रीकरण में विश्वास रखते हैं.

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