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सिर्फ कारोबार पर केंद्रित होगी इस बार पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा!

इस बार भारतीय मूल के लोगों के साथ कोई बड़ा आयोजन नहीं होगा, जो मोदी के पिछले हर दौरे का मुख्य कार्यक्रम होता था

shubha singh Updated On: Jun 24, 2017 10:31 AM IST

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सिर्फ कारोबार पर केंद्रित होगी इस बार पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा पूरी तरह से कारोबारी रहने वाला है. इस बार भारतीय मूल के लोगों के साथ कोई बड़ा आयोजन नहीं होगा, जो मोदी के पिछले हर दौरे का प्रमुख कार्यक्रम हुआ करता था.

पीएम मोदी की विदेश नीति में विदेश में बसे भारतीय मूल के लोगों से जुड़ना एक अहम रणनीति है. प्रधानमंत्री के तौर पर अपने पहले दो साल के कार्यकाल में पीएम मोदी ने कमोबेश हर विदेश दौरे में विदेशों में बसे भारतीयों से जुड़ने के लिए भव्य आयोजन किए- चाहे वो अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया हो या संयुक्त अरब अमीरात.

भारतीयों से मुलाकात विदेश दौरे का अहम हिस्सा रहा 

मोदी जहां भी गए वहां ऐसे शानदार आयोजन भारतीय मूल के लोगों के लिए किए गए. इनमें न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डेन और लंदन के वेंबले स्टेडियम में हुए भव्य कार्यक्रम भी शामिल हैं. और, छोटी-छोटी टाउन हॉल मुलाकातें भी.

जिस देश में जितनी तादाद में भारतीय रहते हैं, उस स्तर के कार्यक्रम मोदी के विदेश दौरे में आयोजित हुए. मोदी ने न्यूयॉर्क में 2014 में दो बड़े कार्यक्रमों को संबोधित किया था. 2015 में सिलिकॉन वैली के अपने दौरे में भी उन्होंने एक बड़ा कार्यक्रम किया.

भारतीय मूल के लोगों को भी मोदी का ये कदम काफी पसंद आया है. उन्होंने कमोबेश हर कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. मोदी के इस महीने के अमेरिका दौरे की प्लानिंग के दौरान शुरुआत में ह्यूस्टन शहर में भारतीय मूल के लोगों के लिए एक कार्यक्रम आयोजित करने प्रस्ताव था.

ह्यूस्टन में रहने वाले कुछ एनआरआई आकर पीएम मोदी से दिल्ली में मिले भी थे. उन्हें ह्यूस्टन में एक कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भी दिया गया.

ह्यूस्टन, अमेरिका के बड़े शहरों में से एक है. वहां पर बड़ी तादाद में भारतीय मूल के लोग रहते हैं. न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया के बाद टेक्सस में सबसे ज्यादा एनआरआई रहते हैं. लेकिन, जैसे-जैसे मोदी के अमेरिका दौरे का प्लान तय हुआ, ह्यूस्टन में भारतीय मूल के लोगों के लिए किसी आयोजन की योजना को रद्द कर दिया गया.

असल में पश्चिमी देशों में अप्रवासियों के खिलाफ एक नया माहौल बना है. अमेरिका और ब्रिटेन में भी अप्रवासियों पर लगाम लगाने की मांग उठ रही है. दोनों ही जगह ये बड़ा चुनावी मुद्दा बना.

अमेरिका में अप्रवासियों पर रोक लगाने और एच1बी वीजा को खत्म करने की मांग ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है. क्योंकि बहुत सी भारतीय आईटी कंपनियां और आईटी प्रोफेशनल इनकी मदद से विदेश जाकर काम करते हैं. उम्मीद है कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में ये मुद्दा जरूर उठेगा.

अमेरिका में भले ही भारतीय मूल के लोगों के साथ कार्यक्रम न हो रहा हो, मगर मोदी के इजरायल दौरे में ऐसे कार्यक्रम की पूरी तैयारी है. प्रधानमंत्री कार्यालय और बीजेपी की ओवरसीज सेल इस दिशा में काम कर रही हैं.

narendra modi

पीएम का इजरायल दौरा

मोदी, जुलाई के पहले हफ्ते में इजरायल जाने वाले हैं. अप्रवासियों को लेकर इजरायल की नीति अलग रही है. इजरायल पूरी दुनिया में रहने वाले यहूदियों को अपने यहां आकर बसने का स्वागत करता है. भारत से इजरायल जाने वाले लोग, बाकी दुनिया में जाने वाले भारतीयों से अलग हैं. इजरायल जाने वाले भारतीय मूल के लोग यहूदी हैं. इजरायल में भारतीय मूल के 80 हजार लोग रहते हैं. ये महाराष्ट्र के बेने इजरायल, कोचीन के यहूदी, कोलकाता के बगदादी यहूदी और मणिपुर के मनाशे कबीले के सदस्य हैं.

इजरायल में कुछ भारतीय आईटी पेशेवर भी काम कर रहे हैं. ये लोग बहुराष्ट्रीय कंपनियों, मेडिकल कंपनियों और हीरे के कारोबारी के तौर पर इजरायल में काम कर रहे हैं. भारत और इजरायल के बीच व्यापार में हीरे के कारोबार की बड़ी हिस्सेदारी है.

इस बार मोदी का अमेरिका दौरा महज औपचारिकता है

ह्यूस्टन का आयोजन इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि इस बार मोदी का अमेरिका दौरा महज औपचारिकता है. इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और मोदी के निजी रिश्ते बेहतर करने पर जोर रहेगा.

मोदी इस बार दुनिया को लेकर ट्रंप की राय समझने की कोशिश करेंगे. पीएम मोदी ने भारत-अमेरिका के बीच रिश्ते में नई ऊर्जा भरी है. वो इसे ऊंची पायदान पर लेकर गए हैं. बराक ओबामा के राष्ट्रपति रहते, दोनों नेताओं में आठ बार मुलाकातें हुईं. ट्रंप से बातचीत के दौरान मोदी की कोशिश होगी कि वो दोनों देशों के रिश्ते में आए अनिश्चितता के माहौल को खत्म करें.

फिलहाल ट्रंप की विदेश नीति ऐसी ही रही है, जिसमें वो तमाम देशों के साथ अमेरिका के संबंधों को नए सिरे से गढ़ रहे हैं.

ट्रंप के बारे में कहा जाता है कि वो पूरी तरह से अधिकारियों और सलाहकारों के कहने पर नहीं चलते. विदेशी नेताओं के साथ मुलाकातों में ट्रंप ने अपने बर्ताव से एक अनिश्चितता का माहौल बनाया है. फिर चाहे वो अमेरिका के पुराने और पक्के दोस्त हों, या दुश्मन.

दो मुद्दों को लेकर भारत, ट्रंप के लिए अहम है. पहला तो एच1बी वीजा और दूसरा पेरिस जलवायु समझौता. ट्रंप ने पहले ही जलवायु समझौते से हटने का एलान कर दिया है. ऐसा करते वक्त उन्होंने भारत पर इस समझौते की आड़ में अरबों डॉलर की विदेशी मदद हथियाने का आरोप भी मढ़ा था. इस पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भारत की तरफ से कड़ा जवाब भी देना पड़ा था. हालांकि आतंकवाद के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन और भारत की राय काफी हद तक मिलती है.

TRUMP N MODI

अमेरिका दौरे में भारतीय मूल के कारोबारियों के साथ मुलाकात

खुशकिस्मती से ट्रंप प्रशासन के लिए भारत बहुत अहम देश नहीं है. हालांकि उन्होंने अपने कारोबार के भारतीय साझीदारों को वाइट हाउस आने का न्यौता दिया था. ट्रंप ने रिपब्लिकन हिंदू गठजोड़ को चुनाव में मदद के लिए शुक्रिया भी कहा था. भारतीय मूल के शलभ कुमार, ट्रंप की चुनावी टीम का अहम हिस्सा थे.

वाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा है कि, 'आतंकवाद से मुकाबला, आर्थिक तरक्की को बढ़ावा देने, आर्थिक सुधार और सुरक्षा के मामले में सहयोग, दोनों देशों के साझा मुद्दे हैं'. भारत को उम्मीद है कि मोदी और ट्रंप की मुलाकात से दोनों देशों के ताल्लुक और मजबूत होंगे.

पीएम मोदी अपने अमेरिका दौरे में भारतीय मूल के अहम कारोबारियों के साथ मुलाकात जरूर करेंगे. इसका आयोजन वॉशिंगटन में भारतीय राजदूत करेंगे.

मौजूदा दौरे में एनआरआई के साथ बड़ा कार्यक्रम, इस दौरे के मूल मकसद से भटकाने वाला होता. फिलहाल जब अमेरिका और भारत के रिश्ते में अनिश्चितता का माहौल है. जब अमेरिका में कई भारतीय नस्लीय हिंसा के शिकार हुए हैं.

जब अमेरिका में अप्रवासियों के खिलाफ माहौल है. तो, ऐसे में भारतीय मूल के लोगों के साथ मोदी का मेगा इवेंट करना ठीक नहीं होता.

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