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राष्ट्रपति चुनाव 2017: कोविंद के दलित बैकग्राउंड पर विदेशी मीडिया की नजर

विदेशी मीडिया में कोविंद के दलित बैकग्राउंड ने ही सुर्खियां बनाई है.

FP Staff Updated On: Jul 21, 2017 04:16 PM IST

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राष्ट्रपति चुनाव 2017: कोविंद के दलित बैकग्राउंड पर विदेशी मीडिया की नजर

भारत के नए राष्ट्रपति की तलाश खत्म हो चुकी है. देश को रामनाथ कोविंद के रूप में नया राष्ट्रपति मिल चुका है. वो देश के 14वें राष्ट्रपति हैं. नॉमिनेशन के दौरान उनका नाम पेश किए जाने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि कोविंद ही राष्ट्रपति बनेंगे.

विदेशी मीडिया में इसकी सुर्खियां बनीं. कुछ प्रमुख न्यूज संस्थानों ने इस खबर को इस तरह कवर किया.

डॉन

पाकिस्तानी दैनिक अखबार डॉन ने कोविंद को बीजेपी समर्थित राष्ट्रपति बताया है. रिपोर्ट को शीर्षक दिया गया है- 'India elects BJP-backed Kovind as 14th president'. रिपोर्ट में कोविंद के आरएसएस बैकग्राउंड का भी उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट में लिखा है, 'कोविंद आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रह चुके हैं, इस हिंदू संगठन पर मुस्लिमों के प्रति धार्मिक नफरत फैलाने के आरोप लग चुके हैं.'

द वॉशिंगटन पोस्ट

'India’s new president rose from poverty to high office' हेडलाइन के साथ द वॉशिंगटन पोस्ट ने इस खबर को जगह दी है. अखबार ने मुख्यत: कोविंद के शुरुआती संघर्षों पर बात की है. कोविंद के एक पिछड़े गांव से सुप्रीम कोर्ट का वकील फिर बीजेपी नेता बनने के सफर पर फोकस किया गया है. साथ ही रिपोर्ट में कोविंद के दलित बैकग्राउंड को बीजेपी के वोटबैंक के दायरे को बढ़ावा देने की बात भी की गई है.

द न्यूयॉर्क टाइम्स

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कोविंद की जाति को प्रमुखता दी है. रिपोर्ट का शीर्षक दिया गया है- 'India picks Ram Nath Kovind, of Caste Once Called ‘Untouchables'. टाइम्स ने कहा है कि एक दलित को राष्ट्रपति पद के लिए चुना जाना भारत के लिए दुर्लभ क्षण है. हालांकि, अखबार ने दलित राजनीति को भी इसकी वजह बताया. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविंद की दावेदारी भविष्य में दलित वोटबैंक को साधने के लिए किया गया है. कोविंद की जीत 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की स्थिति मजबूत करेगी.

रिपोर्ट में पीएम मोदी की जीवनी लिखने वाले पत्रकार निलांजन मुखोपाध्याय के शब्दों को कोट किया गया है कि कोंविंद अपनी जाति की वजह से राष्ट्रपति चुने गए हैं, उपलब्धियों की वजह से नहीं.

बीबीसी

बीबीसी की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट में भी कोविंद की जाति ही मुद्दा बनी हुई है. साथ ही रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि कोविंद आखिर अबतक गुमनाम शख्स क्यों थे. दलित लेखक-एक्टिविस्ट चंद्रभान प्रसाद की ओर से कहा गया है कि मैं दलितों के लिए पिछले 27 साल से लिख रहा हूं लेकिन मैंने रामनाथ कोविंद का नाम उस दिन पहली बार सुना, जब उन्हें राष्ट्रपति के उम्मीदवारी के लिए चुना गया.

द गार्डियन

द गार्डियन ने 'India low-caste leader elected president in boost for Modi coalition' हेडलाइन के सात रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविंद के इस पद पर बैठने पर एनडीए की सरकार की पकड़ सत्ता पर और मजबूत होगी.

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