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इजरायल में मोदी : 70 साल की देरी की कसक मोदी को भी है

दोनों देशों की संस्कृति और परंपरा की दुहाई देकर मोदी ने इजरायल के साथ दोस्ती को और मजबूत बनाने की कोशिश की

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 06, 2017 09:51 AM IST

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इजरायल में मोदी : 70 साल की देरी की कसक मोदी को भी है

अपने इजरायल दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भारतीय समुदाय के लोगों से मुखातिब हुए तो उनके भीतर की कसक जुबां पर आ गई. तेल अबीब में मोदी ने इस बात को माना कि इजरायल आने में काफी देर हो गई है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते वक्त मोदी-नेतन्याहू की दोस्ती की झलक बार-बार दिख रही थी. दोनों के बीच की केमिस्ट्री लाजबाव दिखी.

प्रोटोकॉल तोड़कर मोदी के दौरे के हर वक्त उनके साथ रहने वाले इजरायल के प्रधानमंत्री भी मोदी के संबोधन को बहुत गौर से सुन रहे थे. मोदी भी उसी अंदाज में इजरायल के साथ अपनी दोस्ती का बखान कर रहे थे.

देरी से मिलन की कसक नेतन्याहू को भी थी और मोदी को भी. लेकिन, इस कसक में अपनों से मिलने की खुशी छिपी थी. जो बार-बार दोनों के चेहरे पर दिख रही थी.

भारत-इजरायल के बीच 800 साल पुराने संबंधों की याद

मोदी ने यहां हिब्रू में अपना भाषण शुरू किया. भारत और इजरायल के बीच आठ सौ साल पुराने संबंधों की याद दिलाई. दोनों देशों की संस्कृति और परंपरा की दुहाई देकर मोदी ने इजरायल के साथ दोस्ती को और मजबूत बनाने की कोशिश की.

भारत के साथ यहूदी समुदाय के लगाव का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'अस्सी साल पहले 1936 में मुंबई के मेयर यहूदी बने थे. 1935 में ऑल इंडिया रेडियो के सिग्नेचर ट्यून को एक यहूदी वाल्टर कैपमैन ने कंपोज किया था.'

उन्होंने इजरायल में प्रकाशित होने वाली मराठी भाषा की पत्रिका ‘माई बोली’ को दोनों देशों के संबंधों की एकरूपता से जोड़ा तो फिर, कोच्चि से आए लोगों के ‘ओणम’ मनाने की परंपरा का जिक्र कर दोनों देशों के रिश्तों की बुनियाद को संस्कृति के स्तर पर भी जोड़ने की पहल की.

PM Modi in Israel Museum

नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के एक म्यूजियम में (फोटो: पीटीआई से साभार)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगभग एक घंटे के भाषण के दौरान इजरायल और उसकी उपलब्धियों का जमकर बखान किया. मोदी ने कहा कि ‘इजरायल आज पूरी दुनिया में अपनी धाक जमा चुका है. चाहे वो कृषि का क्षेत्र हो या फिर तकनीक का, या हो सुरक्षा का मामला, इजरायल ने कई मामलों में बड़े देशों को भी पीछे छोड़ा है.’

FDI की सीमा 26 से बढ़कर 49 फीसदी होगी

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने तीन साल के शासन की भी तारीफ की. मोदी ने अपने संबोधन के जरिए इजरायल और वहां रह रहे लोगों को संदेश देने की साफ कोशिश की. संदेश था भारत बदल रहा है और वहां अब निवेश करना भी सरल हो गया है. जीएसटी को 'गुड एंड सिंपल' टैक्स बताते हुए मोदी ने एफडीआई की सीमा 26 से बढ़ाकर 49 फीसदी तक करने का जिक्र किया.

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स्पेक्ट्रम से लेकर कोयले की नीलामी के मामले में पारदर्शिता की बात कर मोदी ने इसके जरिए इजरायल समेत दुनिया के बाकी मुल्कों को भी संदेश दिया कि अब भ्रष्टाचार पर वार है और भारत में कारोबार ज्यादा आसान है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म हमारी सरकार का मूल मंत्र है. इसी मूल मंत्र को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं. मोदी ने बताया कि कैसे उनकी सरकार के आने के बाद कृषि से लेकर हर क्षेत्र में प्रगति हुई है. देश में किसानों की आमदनी साल 2022 तक दोगुनी करने की बात हो रही है.

इस मौके पर मोदी ने कहा कि इजरायल भारत की दूसरी हरित क्रांति में बड़ा मददगार साबित हो सकता है. इजरायल के साथ भारत कृषि के साथ-साथ, उर्जा और तकनीक के क्षेत्र में करार कर रहा है. रक्षा क्षेत्र में भी इजरायल के साथ दोस्ती दोनों देशों के रिश्तों को एक नई दिशा की ओर लेकर जा रही है.

प्रधानमंत्री मोदी ने साइंस, इनोवेशन और रिसर्च को दोनों देशों के संबंधों का आधार बताया. मोदी ने कहा कि दोनों ही देश इस बात पर सहमत भी हैं. उन्होंने इजरायल में पढ़ रहे लगभग 600 भारतीय छात्रों को भी इसके लिए काम करने की अपील की.

PM Modi book presented

(फोटो: पीटीआई से साभार)

OCI कार्ड के नियम और सरल बनाने की घोषणा

मोदी ने इजरायल में बसे भारतीय समुदाय के लोगों के लिए ओसीआई कार्ड के नियम को और सरल करने की घोषणा कर दी. उन्होंने कहा कि अब उन्हें भी ओसीआई कार्ड मिलेगा जिन्होंने इजरायल में कंपलसरी आर्मी सर्विस की है. इसके लिए नियम सरल किए जाने का वादा मोदी ने किया.

दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री के दौरे के बाद दिल्ली-मुंबई-तेल अबीब विमान सेवा भी बहाल होगी. इसके अलावा इजरायल में भारत की तरफ से इंडियन कल्चर सेंटर भी खोला जाएगा.

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मोदी के घंटे भर चले भाषण के दौरान 'मोदी-मोदी' के नारे लगते रहे. जगह नई थी लेकिन माहौल पुराना लग रहा था. लोगों में जोश था, जो इस बात का प्रतीक था कि लंबी बेकरारी के बाद दोनों देशों के इस मिलन के बाद एक नए अध्याय की शुरुआत होगी.

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