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पाकिस्तानी मीडिया की चिंता: क्या एसीओ में भारत को घेरना आसान होगा?

कुछ पाकिस्तानी अखबारों ने अस्ताना में मोदी के भाषण की तारीफ भी की है

Seema Tanwar | Published On: Jun 12, 2017 08:24 AM IST | Updated On: Jun 12, 2017 08:24 AM IST

पाकिस्तानी मीडिया की चिंता: क्या एसीओ में भारत को घेरना आसान होगा?

शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य भारत भी बना है लेकिन पाकिस्तान इसकी सदस्यता मिलने पर कुछ ज्यादा ही खुश है. पाकिस्तानी मीडिया में इसे ऐतिहासिक पल बताया जा रहा है, जिससे पाकिस्तान के लिए नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं.

लेकिन कुछ अखबार इस बात से फूले नहीं समा रहे हैं कि इस संगठन में चीन और रूस जैसे देश महत्वपूर्ण भूमिका में हैं जिनके साथ पाकिस्तान रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं और ऐसे में, पाकिस्तान कश्मीर के मुद्दे को लेकर भारत पर दबाव डालने में कामयाब हो सकता है.

इसे सार्क ना बनाएं

रोजनामा ‘जंग’ लिखता है कि पाकिस्तान और भारत की सदस्यता के बाद चीन और रूस जैसी विश्व शक्तियों के साथ मध्य और दक्षिण एशिया के आठ अहम देश शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य बन गए हैं जबकि जिन देशों को पर्यवेक्षक का दर्जा हासिल है उनमें अफगानिस्तान, ईरान, बेलारूस और मंगोलिया शामिल हैं.

अखबार के मुताबिक प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल इन देशों की साझा कोशिशें यकीकन दुनिया में बड़ी सकारात्मक और खुशगवार तब्दीलियां ला सकती हैं. अखबार की राय में पाकिस्तान के लिए इस संगठन का सदस्य बनने से न सिर्फ अर्थव्यवस्था बल्कि शिक्षा, साइंस और टेक्नोलजी के लिए क्षेत्र में नई संभावनाओं के अवसर द्वार खुलेंगे.

रोजनामा ‘पाकिस्तान’ ने जहां पाकिस्तान को पर्यवेक्षक से स्थायी सदस्य का दर्जा मिलने को ऐतिहासिक पल बताया है वहीं इस बात का जिक्र भी किया है कि सदस्यता मिलने पर भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों ने एक दूसरे मुबारकबाद भी दी.

अखबार ने कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुए शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण की भी सराहना की है जिसमें उन्होंने सदस्य देशों के बीच अच्छे पड़ोसी की तरह रहने के लिए पांच साल का एक समझौता करने पर जोर दिया.

अखबार के मुताबिक सवाल यह है कि एक ही दिन शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य बनने वाले भारत और पाकिस्तान से किस तरह की भूमिका की उम्मीद की जा रही है, खासकर वह भी तब जब उनके बीच तनाव चरम पर है.

अखबार लिखता है कि उम्मीद है कि भारत वह किरदार अदा नहीं करेगा जो वह सार्क में करता रहा है और सार्क के बाद एक ज्यादा बड़े और अहम संगठन में शामिल होकर दोनों के संबंध बेहतरी की तरफ जाएंगे.

कश्मीर मुद्दा

दक्षिणपंथी अखबार ‘नवा ए वक्त’ इस मौके पर भी भारत पर निशाना साधने से नहीं चूका है.

अखबार लिखता है कि चूंकि भारत को भी पाकिस्तान के साथ शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता मिल गई है, इसलिए पाकिस्तान की मौजूदगी इस संगठन में और भी अहम हो गई है.

अखबार को उम्मीद है कि शंघाई सहयोग संगठन के मंच से भारत की मौजूदगी में जम्मू कश्मीर में उसके कथित जुल्मों को उजागर उस पर कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक हल कराने का दबाव डलवाया जा सकता है. अखबार लिखता है कि शंघाई सहयोग संगठन का एक अहम सदस्य चीन पहले ही कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के रुख का समर्थन करता है.

उम्मत’ लिखता है कि शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने वाले भारत अकेला ऐसा देश है जिसे संगठन के दो अहम देशों चीन और पाकिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते नहीं हैं.

हालांकि अखबार ने यह भी लिखा है कि रक्षा गठबंधन या समझौते इस संगठन का मकसद नहीं है बल्कि ज्यादा जोर राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर दिया जाता है. अखबार के मुताबिक यही वजह है कि हालिया सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सिल्क रूट और आतंकवाद के खात्मे पर ही अपने भाषण में ज्यादा जोर दिया था.

सरपट दौड़ेगा सी-पैक

वक्त’ लिखता है कि पाकिस्तान लंबे इंतजार के बाद शंघाई सहयोग संगठन का सदस्य बन गया है जिससे पाकिस्तान को अहम देशों के साथ संपर्क और नजदीकी सहयोग और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी.

अखबार ने परोक्ष रूप से भारत पर निशाना साधते हुए कहा है कि कुछ देशों की धमकियों के बावजूद चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना (सी-पैक) आगे बढ़ रही है. अखबार की टिप्पणी है कि अब शंघाई सहयोग संगठन में पाकिस्तान को सदस्यता मिलने के बाद कोरिडोर परियोजना मेगा प्रोजेक्ट की हैसियत से आगे बढ़ेगी क्योंकि चीन खास तौर से और रूस आम तौर पर इसके हक में हैं.

आखिर में अखबार लिखता है कि जरूरत इस बात की है कि पाकिस्तान शंघाई सहयोग संगठन के स्थायी सदस्य होने की लाज रखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ताकतवर और अहम देश के तौर पर उभरे.

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