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पाकिस्तान: नोबेल पुरस्कार विजेता के भाई की गोली मारकर हत्या

सलीम पाकिस्तानी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक अब्दुस सलाम के चचेरे भाई थे

FP Staff | Published On: Mar 30, 2017 11:08 PM IST | Updated On: Mar 30, 2017 11:08 PM IST

पाकिस्तान: नोबेल पुरस्कार विजेता के भाई की गोली मारकर हत्या

पाकिस्तान के लाहौर शहर के पास ननकाना साहिब में एक हमले में जमात-ए-अहमदिया के नेता एडवोकेट मलिक सलीम लतीफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस हमले में उनका बेटा भी गंभीर रूप से घायल हो गया.

सलीम पाकिस्तानी नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक अब्दुस सलाम के चचेरे भाई थे.

पुलिस के अनुसार एडवोकेट मलिक सलीम लतीफ और उनका बेटे एडवोकेट फरहान पर उस समय गोलीबारी गई जब वो कोर्ट जा रहे थे. इस हमले में लतीफ की मौके पर ही मौत हो गई.

लश्कर-ए-झांगवी ने ली जिम्मेदारी 

इस्लामी कट्टरपंथी संगठन 'लश्कर-ए-झांगवी' ने सोशल मीडिया पर हत्या की जिम्मेदारी ली. आतंकी संगठन के प्रवक्ता अली बिन सूफियां ने लिखा, 'लश्कर-ए-झांगवी बसरा ब्रिगेड की विशेष टुकड़ी ने एक नास्तिक को जहन्नुम भेजने का महान काम किया. सलीम अपने आसपास अपने पंथ के संदेश फैलाता था और लश्कर-ए-झांगवी के मुजाहिदीनों को उसकी तलाश थी.'

अहमदियां समाज के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने कहा कि मलिक सलीम लतीफ की हत्या उनके धार्मिक विश्ववास के चलते की गई है.

उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तानी सेना जिस तरह से 'जर्ब-ए-अजब' और 'रद्दुल फसाद' अभियान चला रही है, वह सही तरीके से काम नहीं कर रही है.

सलीमुद्दीन ने कहा कि अहमदिया समुदाय के खिलाफ साल 2016 में स्थानीय और राष्ट्रीय अखबारों में करीब 1700 विज्ञापन प्रकाशित किए गए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार नफरत फैलाने वालों का समर्थन कर रही है.

अहमदिया समुदाय को मिला हुआ है अल्पसंख्यक का दर्जा 

इससे पहले बुधवार को पाकिस्तान के अहमदिया संगठन ने एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि 2016 से अभी तक छह अहमदियों को उनके धार्मिक विश्वास के चलते मारा जा चुका है.

वहीं पुलिस इस हमले के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि एडवोकेट को बेरी वाला चौक के करीब मारा गया. अब तक इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. डॉक्टर अब्दुस सलाम ने साल 1979 में विज्ञान के क्षेत्र में नोबल पुरुस्कार जीता था इसके बाद उन्हें पाकिस्तान का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भी दिया गया.

साल 1974 में पाकिस्तान अहमदिया संप्रदाय को गैर मुस्लिम मानते हुए अल्पसंख्यक का दर्जा दे चुका है. जिसके बाद बड़ी संख्या में अहमदियां समाज के लोगों ने विदेश में शरण लेनी शुरु कर दी थी. अब्दुस सलाम भी पाकिस्तान छोड़कर लंदन चले गए थे.

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