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कुलभूषण जाधव मामला: पाक मीडिया के पेट में फिर उठा दर्द

अंतरराष्ट्रीय अदालत से कुलभूषण जाधव की फांसी रोक से पाक मीडिया तिलमिला गया है

Seema Tanwar | Published On: May 12, 2017 09:23 AM IST | Updated On: May 12, 2017 09:28 AM IST

कुलभूषण जाधव मामला: पाक मीडिया के पेट में फिर उठा दर्द

कुलभूषण जाधव का मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पहुंचा तो पाकिस्तानी मीडिया एक बार फिर तिलमिला उठा है. इस तिलमिलाहट की वजह भी साफ है. पाकिस्तान जिस भारतीय नागरिक को एक साल से रॉ का जासूस साबित करने पर तुला है, उसका मामला अब दोनों देशों की तनातनी से निकल कर अंतरराष्ट्रीय अदालत में पहुंच गया है.

कुछ पाकिस्तानी अखबारों ने इस सिलसिले में भारत की पीठ पर ताकतवर देशों का हाथ बताया है तो कुछ की राय में भारत दुनिया के सामने बेनकाब हो गया है क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय अदालत में एक कथित आतंकवादी यानी जाधव के हक में खड़ा हो रहा है.

कई पाकिस्तानी उर्दू अखबारों ने कुलभूषण की फांसी पर अंतरराष्ट्ररीय न्यायालय की तरफ से रोक लगाने की खबरों को भारत का कोरा प्रोपेंगेडा करार दिया है. उनके मुताबिक अदालत के प्रवक्ता ने साफ किया है कि सजा पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि इस बारे में अभी भारत की तरफ से सिर्फ दरख्वास्त मिली है जिस पर 15 मई को सुनवाई होनी है.

Passport Kulbhushan Jadhav

ईरान का भी दबाव

'नवा ए वक्त' लिखता है कि कुलभूषण के मामले में भारत अपने नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को गुमराह कर रहा है. अखबार के मुताबिक भारत कुलभूषण को अपना एक रिटायर्ड फौजी करार देता है जो ईरान में अपना कारोबार कर रहा था जबकि कुलभूषण ने खुद के मौजूदा नेवल अफसर होने की बात कबूली है.

यह दक्षिणपंथी अखबार तो यहां तक लिखता है कि जाधव की दी गई सूचना के आधार पर कई एजेंट पक़ड़ गए और इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से भी दर्जन भर ऐसे राजनयिक वापस भेजे गए हैं जो जासूसी में लिप्त थे.

वैसे यह मामला सिर्फ अब भारत और पाकिस्तान का नहीं रह गया है. चूंकि ईरान का नाम भी इसमें बराबर घसीटा जा रहा है, इसीलिए ईरानी अधिकारियों ने कुलभूषण से मिलने और पूछताछ करने की पाकिस्तान से इजाजत मांगी है. रोजनामा ‘पाकिस्तान’ ने यह खबर दी है.

अखबार कहता है कि ईरानी अधिकारियों की इस अर्जी पर अभी कोई प्रगति नहीं हुई है, हालांकि क्वेटा में तैनात ईरानी कॉन्सूलर जनरल मोहम्मद रफी ने भरोसा दिलाया है कि ईरानी सरजमीन को पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा.

भारत ने भी कुलभूषण तक एक्सेस के लिए पाकिस्तान से कई बार गुजारिश की है, जिसे हर बार ठुकरा दिया गया है.

KulbhushanJadhav

बढ़िया मौका

उधर ‘औसाफ’ अपने संपादकीय में लिखता है कि भारत का दावा झूठा निकला, अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कुलभूषण की फांसी को रोकने का कोई आदेश नहीं दिया है. बहरहाल मामले के अंतरराष्ट्रीय अदालत में जाने को अखबार पाकिस्तान के लिए अच्छा मौका मानता है, "जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत को बेनकाब करने के लिए कर सकता है."

उसका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाजा खटखटा कर भारत ने मान लिया है कि वह पाकिस्तान में दखंलदाजी करता है और अपने जासूसों के जरिए आतंकवादी कार्रवाइयों को अंजाम देता है.

अखबार कहता है कि भारत को "बेनकाब करने" के लिए पाकिस्तान की तरफ से जैसे कदम उठाए जाने चाहिए थे, उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और इसी का नतीजा है कि आज ना सिर्फ भारत बल्कि ईरान भी पाकिस्तान को गंभीर नतीजे भुगतने और सर्जिकल स्ट्राइक करने की धमकी दे रहा है. इसी के साथ हमेशा की तरह ‘औसाफ’ ने पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व को कोसा है.

ध्यान हटाने की कोशिश

‘उम्मत’ लिखता है कि कुलभूषण ने अपने जुर्म को खुद कबूल किया है जिसकी उसे मुनासिब सजा सुनाई गई है, इसलिए इस मामले को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाने का भारत का कदम आतंकवाद से ध्यान हटाने की कोशिश के सिवाय कुछ भी नहीं है. अखबार के मुताबिक भारत को दुनिया की कई बड़ी ताकतों का संरक्षण प्राप्त है.

रोजनामा ‘दुनिया’ ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के उस बयान को तवज्जो दी है जिसमें उन्होंने कुलभूषण के मामले के सिलसिले में अंतरराष्ट्रीय अदालत के अधिकारक्षेत्र पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि इस अधिकारक्षेत्र का जायजा लिया जा रहा है.

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