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सऊदी-कुवैत के झगड़े में पाकिस्तान चला चौधरी बनने!

मुस्लिम जगत का अहम देश होने के नाते पाकिस्तान ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है

Seema Tanwar | Published On: Jun 15, 2017 04:07 PM IST | Updated On: Jun 15, 2017 04:07 PM IST

सऊदी-कुवैत के झगड़े में पाकिस्तान चला चौधरी बनने!

पाकिस्तान और कुवैत का झगड़ा सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है और मुस्लिम जगत में नए समीकरण आकार ले रहे हैं. सऊदी अरब और उसके कई साथियों ने कतर का हुक्का-पानी बंद किया तो उसके पाले में अब तुर्की और ईरान जैसे देश मजबूती से खड़े हो गए हैं. हालांकि मुस्लिम दुनिया में बढ़ती खाई को पाटने के लिए भी कुछ कोशिशें हो रही हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने हाल में सऊदी अरब का दौरा किया और जल्द ही उनके कतर जाने की भी उम्मीद है. पाकिस्तान की बात पर अरब देश कितना ध्यान देंगे, यह कह पाना तो मुश्किल है, लेकिन पाकिस्तान का मीडिया इस झगड़े में बीच बचाव की पाकिस्तान की कोशिशों से खासा खुश है.

पाकिस्तानी अखबार इसे अपने देश की बढ़ती अहमियत के तौर पर पेश कर रहे हैं. हालांकि कई अखबारों में नवाज शरीफ के सऊदी दौरे की कुछ और भी वजह बताई गई हैं.

इसलिए जाना पड़ा सऊदी अरब 

जंग’ अखबार लिखता है कि यह झगड़ा अब सऊदी अरब और कतर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अरब और गैर-अरब मुस्लिम दुनिया का विवाद बनता जा रहा है. अखबार लिखता है कि ईरान ने आम जरूरत की चीजों से भरकर पांच विमान कतर भेजे हैं. इस बीच तुर्की की सरकारी मीडिया ने खबर चला दी कि पाकिस्तान अपने कई हजार फौजी कतर भेज रहा है.

अखबार के मुताबिक इस खबर से पाकिस्तान के रुख पर सवाल उठने लगे. अखबार कहता है कि पाकिस्तान ने तुरंत इसका खंडन भी किया लेकिन मामले की नजाकत को देखते हुए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को सऊदी अरब जाना पड़ा.

अखबार की राय में इस्लामी दुनिया दो धड़ों में तब्दील होती दिखाई दे रही है, जिसे रोकने के लिए पाकिस्तान की अहम भूमिका है. लेकिन अखबार इस बात का भी जिक्र करता है कि सऊदी अरब के नेतृत्व में बनने वाले मुस्लिम सैन्य गठबंधन में पाकिस्तान के शामिल होने की वजह से मध्यस्थता की उसकी कोशिशों पर सवालिया निशान लग गया है.

पाकिस्तान की अहमियत

वहीं ‘जसारत’ ने मुस्लिम दुनिया में जारी खींचतान पर लिखा है कि जिस चीज की शिद्दत से जरूरत महसूस की जा रही थी, वह यह कि कोई देश आगे बढ़ कर इस तनाव को कम करने की कोशिश करे. मुस्लिम जगत का अहम देश होने के नाते पाकिस्तान ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है.

अखबार लिखता है कि यह जरूरी तो नहीं कि सऊदी अरब पहले ही चरण में पाकिस्तान की बात मान ले या कतर से रिश्ते तोड़ने के फैसले को वापस लेने पर राजी हो जाए, लेकिन इस राजनयिक कोशिश से दो बातें सामने आई हैं.

अखबार के मुताबिक इन बातों में सबसे पहली यह है कि अरब दुनिया में विवाद खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने अपनी भूमिका अदा की है. दूसरा, नवाज शरीफ के सऊदी अरब दौरे से अरब दुनिया में पाकिस्तान की अहमियत में इजाफा हुआ है. अखबार की राय है कि इस दौरे से पाकिस्तान के उन स्वघोषित विश्लेषकों के मुंह बंद हो गए हैं जो समझते हैं कि पाकिस्तान को अरब दुनिया में कोई अहमियत नहीं दी जाती.

यहां भी भारत का डर

उधर अखबार ‘नवा ए वक्त’ ने खबरदार किया है कि इस विवाद में निष्पक्ष रहना ही सबसे अच्छी रणनीति होगी. पाकिस्तान को मुस्लिम दुनिया के दो कड़े प्रतिद्वंद्वियों सऊदी अरब और ईरान के साथ अपने रिश्तों में संतुलन बना कर रखना होगा.

अखबार लिखता है कि सऊदी अरब ने हर कदम पर पाकिस्तान का साथ दिया है और वह मुसलमानों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों की धरती है, इसलिए उसकी तरफ स्वाभाविक तौर पर पाकिस्तान का झुकाव नजर आता है. लेकिन अखबार मजबूत और संतुलित विदेश नीति की वकालत करते हुए यह भी कहता है कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश ईरान की नाराजगी मोल नहीं ले सकता क्योंकि इससे पाकिस्तान के स्थायी दुश्मन भारत की तरफ उसका झुकाव बढ़ सकता है, जो पहले ही साजिशों के ताने-बाने बुन रहा है.

भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को जासूस बताते हुए अखबार लिखता है कि उसके जरिए भारत पहले ही पाकिस्तान और ईरान के बीच गलतफहमियां पैदा करने की कोशिश कर चुका है.

पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों की सराहना

उधर रोजनामा ‘उम्मत’ ने जहां पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता की कोशिशों को सराहा है, वहीं इस मोर्चे पर हो रही अन्य गतिविधियों का भी जिक्र किया है और विवाद के खत्म होने की उम्मीद जाहिर की है.

अखबार लिखता है कि कुवैत के विदेश मंत्री शेख सबाह खालिद ने कहा है कि कतर विवाद को हल करने के लिए खाड़ी देशों की आपत्तियों को सुनने के लिए उनका देश तैयार है. जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने इस सिलसिले में तुर्की के विदेश मंत्री से मुलाकात कर इस बारे में बात की है.

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