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पाक मीडिया: पाकिस्तान को अलग-थलग करने में मोदी सरकार नाकाम

बरसों से भारत का बेहद करीबी दोस्त रहा रूस अब पाकिस्तान की तरफ हाथ बढ़ा रहा है

Seema Tanwar Updated On: Apr 03, 2017 09:07 AM IST

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पाक मीडिया: पाकिस्तान को अलग-थलग करने में मोदी सरकार नाकाम

क्या पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग करने की भारत की कोशिशें नाकाम हो गई हैं? कम से कम पाकिस्तानी उर्दू मीडिया तो यही दावा कर रहा है.

हाल में एक रूसी प्रतिनिधिमंडल ने उत्तरी वजीरिस्तान का दौरा किया जिसे पाकिस्तानी उर्दू मीडिया ने खासी अहमियत दी है. वहीं कबायली इलाके पाराचिनार में हुए धमाके के तार भारत से जोड़ने की कोशिश भी की गई है.

बरसों से भारत का बेहद करीबी दोस्त रहा रूस अब पाकिस्तान की तरफ हाथ बढ़ा रहा है भारत की आपत्तियों के बावजूद. इसलिए ‘रोजनामा एक्सप्रेस’ ने लिखा है कि रूस और पाकिस्तान के रिश्ते नई करवट ले रहे हैं और उनके बीच रणनीतिक सहयोग के दरवाजे खुलने के संकेत मिल रहे हैं.

पाकिस्तान के साथ दुनिया

रूसी प्रतिनिधिमंडल के उत्तरी वजीरिस्तान दौरे पर अखबार कहता है कि इसका मकसद आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन, पाकिस्तान की सैन्य ताकत और रणनीति का जायजा लेना है जो रूस पाकिस्तान रिश्तों में किसी ब्रेक-थ्रू से कम नहीं है.

अखबार की नसीहत है कि पाकिस्तान को बेहद सावधानी से आगे बढ़ना है क्योंकि रूस के साथ उसके रिश्तों में रोड़े अटकाने वालों की कोई कमी नहीं है. लेकिन पाकिस्तान को बिना खौफ आगे बढ़ना होगा और किसी दबाव के आगे नहीं झुकना है.

‘उम्मत’ ने अपने संपादकीय को शीर्षक लगा दिया- पाकिस्तान को अलग थलग करने की भारत की कोशिशें नाकाम.

अखबार ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के इस बयान पर यह संपादकीय लिखा है कि पाकिस्तान को अलग-थलग करने का प्रोपेगेंडा करने वाले देख लें कि अंतरराष्ट्रीय दोस्तों ने किस तरह पाकिस्तान को इज्जत और अहमियत दी है.

pakistan flag

यह बात उन्होंने आर्मी टीम स्प्रिट मुकाबलों में शामिल विदेशी टीमों से मुलाकात के दौरान कही, जिनमें चीन, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मलेशिया, थाईलैंड, मालदीव और ब्रिटेन जैसे देशों की टीमों ने हिस्सा लिया.

अखबार लिखता है कि कुछ समय पहले भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया था कि वह पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग करके छोड़ेंगे. लेकिन, दुनिया देख रही है कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन और अन्य देशों के सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल लगातार पाकिस्तान का दौरा कर रहे हैं.

अखबार ने भारत के राजनेताओं को नकारात्मक सोच वाला बताते हुए कहा कि वे अपना रवैया बदलें क्योंकि तभी दोनों देश तरक्की, खुशहाली और स्थिरता के लिए मिलकर काम कर पाएंगे.

भारत के 'पालतू' दहशतगर्द

'औसाफ' ने पाकिस्तानी कबायली इलाके के पाराचिनार में हुए धमाके पर संपादकीय लिखा और 'भारत के पालतू' दहशतगर्दों को निशाना बनाने की जरूरत पर जोर दिया है.

अखबार लिखता है कि भारत के टुकड़ों पर पलने वाले आतंकवादियों ने पाराचिनार के निर्दोष लोगों को निशाना बनाकर अपने नापाक वजूद का अहसास कराया है.

अखबार लिखता है कि इस साल अब तक पाकिस्तान में 25 हमले हो चुके हैं और तीन महीने की छोटी सी अवधि में 195 से ज्यादा लोग मारे गए हैं जबकि 790 से ज्यादा जख्मी हुए हैं.

pakistani boy

अखबार कहता है कि ये आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि सार्वजनिक जगहों पर आम लोगों के जानमाल की सुरक्षा के लिए जो कदम उठाने चाहिए वे नहीं उठाए जा रहे हैं.

'जंग' ने पाराचिनार हमले की जिम्मेदारी लेने वाले गुट 'जमात-उल-अहरार' को भारत का समर्थन प्राप्त होने का आरोप लगाया है.

अखबार लिखता है कि पिछले सात दशकों से भारत की सरकारें पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए हर हथकंडे का इस्तेमाल करती रही हैं और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो चुनाव ही 'पाकिस्तान दुश्मन' जैसे नारों की बुनियाद पर लड़ा.

अखबार की राय है कि सत्ता संभालने के बाद मोदी पिछले तीन साल से लगातार पाकिस्तान विरोधी रणनीति पर अमल कर रहे हैं.

कोई और चारा नहीं

'जंग' ने भी पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारतीय कोशिशों को नाकाम बताया है और यह भी लिखा है कि उसने चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर में अड़चनें डालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है.

‘रोजनामा पाकिस्तान’ ने भी संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी राजदूत मलीहा लोदी के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की कोशिशें नाकाम हो गई हैं.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि भारत से बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए गए हैं. लेकिन अखबार का कहना है कि अभी जिस तरह के हालात दोनों देशों के बीच हैं उनमें बातचीत शुरू होने के आसार नहीं हैं.

लेकिन बातचीत के अलावा कोई और चारा भी तो नहीं है.

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