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क्या ओसामा बिन लादेन की मौत का सच सामने आना अभी भी बाकी है

अमेरिकी सेना ने 2 मई को ऐबटाबाद में ओसामा को मार गिराया था

Animesh Mukharjee Updated On: May 02, 2017 08:15 AM IST

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क्या ओसामा बिन लादेन की मौत का सच सामने आना अभी भी बाकी है

आधुनिक दुनिया और खासकर अमेरिका को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है, एक 9/11 के पहले दूसरा इस हमले के बाद. 11 सितंबर 2001 को हुए इस हमले के पीछे अलकायदा को बनाने वाले कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन का हाथ माना जाता है. इसी बिन लादेन को अमेरिका ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले के लगभग 10 साल बाद ऐबटाबाद में मार गिराया.

दुनिया भर के लिए ओसामा जहां दहशत और आतंक का पर्याय है, एक तबके के लिए वो हीरो भी है. पाकिस्तान जैसे मुल्क में ओसामा नाम के साथ जवां होते बच्चों की एक पूरी खेप मिल जाएगी. बड़ी अवधारणा ये भी है कि ओसामा को अमेरिका ने ही खड़ा किया अपने फायदे के लिए. बाद में लादेन अलग-अलग वजहों से अमेरिका की मुखालिफत करने लगा. चलिए आसान तरीके से दोहराते हैं कि ओसामा कौन था और कैसे एक नाम से एक खौफ में बदल गया.

नाम तो सिर्फ ओसामा था और अपनी मां का इकलौता बेटा था

उसका पूरा नाम ओसामा बिन मोहम्मद बिन अवद बिन लादेन. इसका मतलब हुआ मोहम्मद का बेटा, अवद का बेटा, लादेन का बेटा. ओसामा के अब्बा का नाम मोहम्मद, उनके अब्बा का नाम अवद और अवद के दादा (अब्बा नहीं) लादेन था. मोहम्मद बिन लादेन के कुल 50 बच्चे थे. इनमें ओसामा की मां से और कोई पैदा नहीं हुआ था. मतलब ओसामा का कोई सगा भाई-बहन नहीं था. ओसामा की मां आलिया सीरिया में पैदा हुई थी.

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ओसामा के बचपन की तस्वीर

सख्ती से भरा बचपन

ओसामा के पिता शुरुआत में काफी गरीब थे. एक समय पर उनके ताल्लुकात जेद्दा के राज परिवार से हो गए और लादेन खानदान की किस्मत बदल गई. 60 के दशक में जेद्दा में मंदी आई तो मोहम्मद बिन लादेन ने 6 महीने तक वहां के सिविल सर्वेंट्स को अपनी जेब से तनख्वाह दी. वो अपने पूरे कुनबे को एक छत के नीचे रखते और सारे बच्चों को सख्त शरिया जीवनशैली का पालन करना पड़ता. इसी बीच ओसामा की मां का तलाक हो गया और उसे अपनी मां के साथ नए घर जाना पड़ा.

पढ़ने में तेज और कट्टरपंथ के बीज

ओसामा पढ़ने में काफी तेज़ था. 14 साल की उम्र में उसे एक ऐसे ग्रुप का मेंबर बनाया गया जिसमें लड़कों को पूरी कुरान याद करनी पड़ती थी. कुछ ही समय में ग्रुप अपने असली मकसद से भटक गया. यहीं से ओसामा की ज़िंदगी में हिंसा के बीज पड़े. दो साल के अंदर ही ओसामा और उसके दोस्त दुनिया को अरब के इस्लामिक शासन के तले लाने की बात करने लगे. इन सबकी जीवनशैली भी बदल गई.

मौसेरी बहन से शादी और इंजीनियरिंग

ओसामा ने 18 साल की उम्र में अपनी 14 साल की मौसेरी बहन से शादी कर ली. अगले ही साल दोनों के एक लड़का अब्दुल्ला हुआ. इसके बाद ओसामा अब्दुल अज़ीज़ यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई करने लगा. कुछ रिकॉर्ड कहते हैं कि उसने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री ली थी. कुछ जगह मिलता है कि वो सिविल इंजीनियर था. बहरहाल इस डिग्री का एकमात्र उद्देश्य खानदानी बिजनेस में ठीक-ठाक जगह बनाना था.

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70 के दशक में परिवार के साथ ओसामा (सबसे दाएं)

अमेरिका ने दिया फ्रीडम फाइटर का दर्जा

ओसामा की पढ़ाई 1981 में पूरी हुई. उधर दिसंबर 1979 में सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया था. ओसामा को इस समय सोवियत संघ से लड़ना अपना फर्ज लगा और वो पेशावर चला गया. वहां उसे अमेरिका के ऑपरेशन 'सायक्लॉन' के तहत मुजाहिद बनाने के लिए कहा गया. 1989 में जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान से अपना डेरा उठा लिया तो अमेरिका ने ओसामा और उसके साथियों को फ्रीडम फाइटर का दर्जा दिया. ओसामा सऊदी अरब वापस आ गया.

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जूडो की ड्रेस में ओसामा

अरब और अमेरिका से बगावत

ओसामा का मन जल्दी अरब से ऊब गया. खाड़ी यु्द्ध के समय अमेरिका की सऊदी में एंट्री को उसने इस्लाम पर हमला माना. उसने इसके खिलाफ खुलकर बोलना शुरू कर दिया. 1992 में उसे देश निकाला दे दिया गया और वो सूडान में रहने लगा.

अलकायदा की स्थापना

निकाले जाने के एक साल के अंदर ही ओसामा ने अलकायदा बना लिया. अलकायदा में शामिल होने की सबसे बड़ी शर्त रहन-सहन थी. 1994 तक अलकायदा दुनिया भर में आतंक फैलाने के मंसूबे दिखाने लगा. सऊदी सरकार ने उसका पासपोर्ट कैंसल कर दिया और परिवार ने 70 लाख डॉलर सालाना का उसका खर्च देना बंद कर दिया. इस समय पूरी दुनिया ने ओसामा और अलकायदा को समझने में गलती कर दी. उसकी क्षमताओं को कम आंका गया. इसके नतीजे बाद में दिखे.

अमेरिका से जंग और तालिबान में शरण

1996 में ओसामा ने अरब में ट्रक बम के जरिए अमेरिकी सेना पर हमला किया. इसके बाद अगले कुछ सालों तक वो अलग-अलग हमले करता रहा. 96 में ही सूडान ने भी उसे अपने यहां से निकाल दिया. इसके बाद उसने अफगानिस्तान में तालिबान से मदद ली. तालिबान और ओसामा दोनों मिलकर अमेरिका के खिलाफ जंग के फतवे जारी करते रहे.

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला

2000 तक अल कायदा के पास दुनिया के कई देशों से पैसा आ रहा था. 2001 में इसके लड़ाकों ने 4 अमेरिकी हवाई जहाज़ हाईजैक किए. 2 ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के दोनों टॉवर गिरा दिए. तीसरे ने पेंटागन पर हमला किया. माना जाता है कि चौथा वाइट हाउस पर हमला करना चाहता था मगर उसे पेंसिलवेनिया में क्रैश करवा दिया गया. अलकायदा ने इस कांड की जिम्मेदारी 2004 में ली.

ऑपरेशन जेरोनिमो

2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की जानकारी में सीआईए के डायरेक्टर लिओन पनेटा ने ऑपरेशन जेरोनिमो शुरू किया. 8 महीने तक चले इस ऑपरेशन के बाद 2 मई को ओसामा के ऐबटाबाद, पाकिस्तान के ठिकाने पर अमेरिकी मरीन्स ने हमला किया. उसे गोली मार दी. आम धारणा है कि लाश को प्रशांत महासागर में डुबो दिया गया. मगर कहानी ये भी है कि उसके टुकड़े करके हिंदुकुश की पहाड़ियों पर फेंक दिए गए. लाश की कोई आधिकारिक फोटो भी नहीं रिलीज़ की गई.

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ओसामा के खिलाफ कार्रवाई का प्रसारण देखते ओबामा

वो बातें जो आपने शायद न सुनी हों

ओसामा ऐबटाबाद के अपने ठिकाने पर मैरिजुआना की खेती करता था. जिसके इस घर की कुल कीमत 6 करोड़ रुपए के बराबर आंकी गई. आतंक के बीच में साइड इनकम की व्यवस्था बुरी नहीं थी.

6 फीट 4 इंच का ओसामा खुद एक अच्छा वॉलीबॉल खिलाड़ी था. वो इंग्लिश फुटबॉल टीम ‘आर्सेनल’ का जबरा फैन था. आंतक में पड़ने से पहले तक ओसामा अक्सर आर्सेनल के खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने स्टेडियम जाता था. आर्सेनल के प्रवक्ता ने ये बात बाद में आधिकारिक तौर पर मानी थी.

ओसामा का प्रिय मीडिया नेटवर्क बीबीसी था. वो बीबीसी रेडियो नियमित रूप से सुनता था.

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ऐबटाबाद में लादेन का ठिकाना

 

माना जाता है कि लादेन को मारने का मिशन ‘सील टीम सिक्स’ को दिया गया था. सील टीम सिक्स अमेरिका के सिस्टम में ऑन पेपर है ही नहीं. वैसे सील टीम सिक्स का नाम बदल कर देवगुरू (द यूनाइटेड स्टेट्स स्पेशल वॉर फेयर डेवलपमेंट ग्रुप) करा दिया गया था.

ओसामा की हत्या को अंजाम देते वक्त सील टीम का एक हेलीकॉप्टर वहीं क्रैश हो गया. इसमें कोई मरा तो नहीं मगर मिशन में सील टीम के होने की बाद दुनिया के सामने आ गई.

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6 अगस्त 2011 को अफगानिस्तान में सील टीम को ले जा रहा एक चिनूक हैलिकॉप्टर रहस्यमई ढंग से क्रैश हो गया. इसमें 22 सील कमांडो मारे गए. शुरुआत में बताया गया कि इसे तालिबान ने मार गिराया है और इसका ओसामा को मारने वाली सील टीम से कोई संबंध नहीं. बाद में मारे गए लोगों के परिवार वालों ने आरोप लगाया कि सरकार और पेंटागन की लापरवाही से सील टीम की पहचान दुनिया के सामने आ गई थी. इसके चलते इन कमांडोज को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

इसके बाद लंबा केस चला. मिशन में शामिल कुछ कमांडो नाम और पैसा पाने के लिए खुद सामने आए. लालच के लिए इनकी आलोचना भी हुई. ऐसे दावे भी होते रहे कि ओसामा पहले ही मर गया था, अमेरिका ने पब्लिसिटी के लिए ये सब किया. कुल मिलाकर क्या हुआ सही-सही जनता को कभी पता नहीं चलेगा. बस एक बात तय है कि लादेन था और अब नहीं है.

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