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ट्रंप की धमकी से नहीं रुकेगा उत्तर कोरिया, अमेरिका के लिए ही ‘रॉकेट मैन’ बना है सुसाइड बॉम्बर

बड़ा सवाल ये है कि आखिर उत्तर कोरिया को यहां तक पहुंचाने का असली मुज़रिम देश कौन है?

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Sep 20, 2017 08:48 PM IST

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ट्रंप की धमकी से नहीं रुकेगा उत्तर कोरिया, अमेरिका के लिए ही ‘रॉकेट मैन’ बना है सुसाइड बॉम्बर

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पहला भाषण था. भाषण से पहले ही लिफाफा देखकर खत का मजमून सब जान चुके थे. बस इंतजार ये था कि ट्रंप कितना ‘खतरनाक’ बोलेंगे.

कोरियाई प्रायद्वीप पर बढ़ते तनाव के बाद ट्रंप को संयुक्त राष्ट्र में पहली बार अपनी भड़ास निकालने का मौका मिला. ऐसे में वो सिर्फ उत्तर कोरिया तक ही सीमित नहीं रहना चाहते थे. उन्होंने अपने भाषण से उत्तर कोरिया पर इतने बम बरसा दिए कि चीन भी ट्रंप के इशारे को समझ गया.

उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग का माखौल उड़ाते हुए कहा कि 'रॉकेट मैन' अपने और शासन दोनों के लिए सुसाइड मिशन पर है. अगर हमें खुद को या अपने साथियों को बचाने की जरूरत पड़ी तो हमारे पास नॉर्थ कोरिया को तबाह करने के अलावा कोई चारा नहीं होगा.

लेकिन जिस तरह से उन्होंने उत्तर कोरिया के लिए ‘अपराधियों के गिरोह’ शब्द का इस्तेमाल किया उसका इशारा चीन की तरफ ही जाता है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बैठे कुछ देश न सिर्फ उत्तर कोरिया के साथ व्यापार करते हैं बल्कि हथियार भी सप्लाई करते हैं.

उत्तर कोरिया की आधुनिक परमाणु और मिसाइल तकनीक और व्यापार के पीछे चीन को ही ट्रंप ने निशाना बनाया. हालांकि चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के खिलाफ एकमत से कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव पास किया था. संयुक्त राष्ट्र के आदेश के बाद ही चीन ने उत्तर कोरिया से आयात होने वाले कोयले, कच्चा लोहा और सी फूड पर पाबंदी लगा दी थी. जबकि उत्तर कोरिया का 90 फीसदी अंतरराष्ट्रीय व्यापार चीन के साथ होता है.

इसके बावजूद ‘ये दिल मांगे मोर’ की तर्ज पर ट्रंप चीन से बड़ी उम्मीदें रखते हैं. वो चाहते हैं कि चीन उत्तर कोरिया को कच्चे तेल की सप्लाई भी बंद कर दे. उनके भाषण से झलकता है कि अगर उत्तर कोरिया को तेल का आयात बंद नहीं होता है तो ‘ग्रेट अमेरिका’ उत्तर कोरिया पर हमला करने से खुद को नहीं रोकेगा.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ट्रंप की महाधमकी का उत्तर कोरिया पर क्या कोई असर होगा? क्या ढाई करोड़ की आबादी वाले देश की जनता पर अमेरिका के लिए बम गिरा पाना आसान होगा?

ट्रंप से संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐसे ही भाषण की उम्मीद थी. उनके सहयोगी देश दक्षिण कोरिया और जापान ऐसे ही तेवरों की तलाश कर रहे थे. उत्तर कोरिया की उड़ती मिसाइलें और परमाणु परीक्षण के धमाके अमेरिका पर लगातार दबाव बढ़ाते जा रहे हैं.

Washington: President Donald Trump speaks at Fort Myer in Arlington Va., Monday, Aug. 21, 2017, during a Presidential Address to the Nation about a strategy he believes will best position the U.S. to eventually declare victory in Afghanistan. AP/PTI(AP8_22_2017_000003B)

लेकिन ट्रंप की इस धमकी से तनावपूर्ण कोरियाई प्रायद्वीप के हालात अब बद से बदतर हो सकते हैं. तबाह किए जाने की चेतावनी के बाद अब नॉर्थ कोरिया परमाणु हथियार और मिसाइल बनाने पर ज्यादा जोर देगा क्योंकि अब उसके सामने आत्मरक्षा का सवाल है. वैसे भी नॉर्थ कोरिया ने क्षेत्रीय वर्चस्व के लिए परमाणु शस्त्रीकरण पर जोर नहीं दिया था. उसने अमेरिका की वजह से ही खुद को परमाणु संपन्न बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

नॉर्थ कोरिया को परमाणु हथियार बनाने का बहाना मिला

सच तो ये है कि नॉर्थ कोरिया पर अमेरिकी धमकियों का असर कभी नहीं पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र के हर प्रतिबंध के बाद वो और ज्यादा शक्तिशाली हो कर सामने आया है. संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने ही बताया था कि पिछले दो साल में उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल परीक्षण पहले के मुकाबले ज्यादा आधुनिक और खतरनाक हैं.

संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद नॉर्थ कोरिया अब तक 6 न्यूक्लियर टेस्ट कर चुका है. 3 सितंबर को उसने अब तक के सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया. यहां तक कि वो दो बार जापान के ऊपर से अपनी मिसाइलें उड़ा चुका है जो अमेरिका को उकसाने वाली बड़ी कार्रवाई थी.

उत्तर कोरिया ने दावा किया है कि उसने ऐसे हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण किया है जिसे लंबी दूरी की मिसाइल पर लगाया जा सकता है. विश्लेषकों का कहना है कि यह उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम में एक बड़ा कदम है.

जबकि नॉर्थ कोरिया बार-बार दोहराता है कि अगर उसे उकसाया गया तो वो बिना बताए पहले ही परमाणु हमला कर सकता है. ऐसे में ट्रंप की खुली धमकी एक तरह से नॉर्थ कोरिया को अपनी रक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने का अंतरराष्ट्रीय बहाना दे गई है. किम जोंग अब अपनी ढाई करोड़ की आबादी वाले देश के लिए ‘रॉकेट मैन’ बन कर ‘सुपर हीरो’ बन चुका है. उसके पास अब दुनिया को बताने के लिए आधार है कि नॉर्थ कोरिया ने सिर्फ अमेरिका की नीतियों की वजह से ही परमाणु हथियारों का कवच तैयार किया है.

विशेषज्ञ भी ये मानते हैं कि किम जोंग युद्ध में उलझने की बजाय परमाणु हमले से बचने की कोशिश में जुटा हुआ है लेकिन अमेरिका की वजह से दुनिया उसे ‘धरती पर मुसीबत’ की तरह देख रही है क्योंकि अमेरिका उसे दुनिया से अलग थलग करने में कामयाब हो गया है.

अमेरिका और उत्तर कोरिया में रंजिश की वजह

अमेरिका और उत्तर कोरिया की अदावत की कहानी साठ साल पुरानी है. उत्तर कोरिया ने साल 1950 से 1953 तक अमेरिका का ‘ऑपरेशन स्ट्रेंगल’ देखा था जिसमें लाखों लोगों की मौत हुई थी. अमेरिकी विमानों की बमबारी ने उत्तर कोरिया के गांवों और शहरों को तबाह कर दिया था.

उत्तर कोरिया के घाव अब तक भरे नहीं हैं और अमेरिका ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है. साल 1950 में किम उल सुंग सत्ता में थे तो अब उनका पोता किम जोंग उन अमेरिका को ललकार रहा है.

अमेरिका में राष्ट्राध्यक्ष बदलते चले गए लेकिन उत्तर कोरिया को लेकर नीति में कोई बदलाव नहीं आया तो उत्तर कोरिया में एक ही परिवार सत्ता पर काबिज़ है और उसकी भी अमेरिका विरोध की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.

युद्ध के छह दशक बाद अमेरिका के जागने की असली वजह ये भी मानी जा सकती है कि उसे अब अहसास होने लगा है कि नॉर्थ कोरिया की मिसाइलें उसके शहर को निशाना बनाने के करीब हैं. ऐसे में अब डोनाल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया को जड़ से मिटाने की धमकी दे रहे हैं जिस पर उत्तर कोरिया ने जवाब दिया है कि वो अमेरिका को नेस्तोनाबूत कर देगा. बड़ा सवाल ये है कि आखिर उत्तर कोरिया को यहां तक पहुंचाने का असली मुजरिम देश कौन है?

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