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आतंकी संगठनों को समर्थन देने के लिए भारत को ‘बहाना’ बना रहा पाक: अमेरिका

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता माइकल एंटन ने कहा ‘भारतीय ऐसा कुछ नहीं कर रहे, जिससे घेराबंदी होती हो.’

Bhasha Updated On: Aug 23, 2017 04:17 PM IST

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आतंकी संगठनों को समर्थन देने के लिए भारत को ‘बहाना’ बना रहा पाक: अमेरिका

अफगानिस्तान में भारत की विकास संबंधी गतिविधियों पर इस्लामाबाद की चिंताओं को खारिज करते हुए ट्रंप प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा है कि पाकिस्तान भारत की अफगानिस्तान में की जाने वाली कथित घेराबंदी का इस्तेमाल एक ‘बहाने’ के तौर पर कर रहा है ताकि वो खुद आतंकी संगठनों को समर्थन देना जारी रख सके.

नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता माइकल एंटन ने मंगलवार को को कहा, ‘अफगानिस्तान में जो कुछ भारत कर रहा है, वो पाकिस्तान के लिए खतरा नहीं है. वे सैन्य ठिकाने नहीं बना रहे. वे सैनिकों की तैनाती नहीं कर रहे.’ कॉन्फ्रेंस कॉल की खबर देने वाले पॉलिटिको के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की ओर से बनाया गया एक ‘बहाना’ है.

इस संदर्भ में पाकिस्तान की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए एंटन ने कहा, ‘भारतीय ऐसा कुछ नहीं कर रहे, जिससे घेराबंदी होती हो. पाकिस्तानी इस बारे में शिकायत करते हैं.’

उनकी ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अफगानिस्तान और विस्तृत दक्षिण एशियाई क्षेत्र के लिए नीति पेश किए जाने के बाद आई हैं. ट्रंप ने भारत की भूमिका को बढ़ाने की मांग तो की ही, साथ ही साथ आतंकियों की शरणस्थलियों को बर्दाश्त करने और आतंकियों को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान की आलोचना भी की.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान में शांति के लिए क्षेत्रीय रूख को प्राथमिकता दी है और कहा है कि अमेरिका ‘तालिबान और अन्य समूहों जैसे आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की ओर से मिली पनाह पर अब चुप नहीं रह सकता. ये संगठन क्षेत्र और इससे परे के इलाकों के लिए संकट पैदा करते हैं.’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक दिन पहले की गई अफगान नीति की घोषणा के जवाब में पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने बयान जारी करके कहा था, ‘सुरक्षा और शांति पर मंडराने वाले खतरे को जियोपॉलिटिक्स, लगातार सुलगने वाले विवादों और आधिपत्य संबंधी नीतियों के जटिल मिश्रण से अलग नहीं किया जा सकता. जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान न हो पाना क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अहम बाधा है.’

इसमें कहा गया, ‘शरणस्थलियों की फर्जी बात पर भरोसा करने के बजाय, अमेरिका को आतंकवाद के खात्मे के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है.’

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