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पाकिस्तान का फायदा कुलभूषण की जिंदगी में है या मौत में?

मामला पाकिस्तानी सेना के हाथों में है, नवाज शरीफ सरकार का कोई दखल नहीं रहेगा

Seema Tanwar | Published On: Apr 12, 2017 07:48 AM IST | Updated On: Apr 12, 2017 01:08 PM IST

पाकिस्तान का फायदा कुलभूषण की जिंदगी में है या मौत में?

पाकिस्तान में जिस तरह आजकल भारत विरोधी भावनाएं हिलोरे मार रही हैं, उन्हें देखते हुए कुलभूषण का बचना मुश्किल लगता है. पाकिस्तानी अखबार, टीवी चैनल और सोशल मीडिया, सब जगह माहौल गर्म है. इस मुद्दे को राष्ट्रवाद की चाशनी में लपेट कर खूब चुस्कियां ली जा रही हैं. इसे पाकिस्तान के दुश्मनों को सख्त पैगाम देने का यह एक अच्छा मौका बताया जा रहा है.

तो क्या पाकिस्तान तुरंत कुलभूषण को फांसी पर लटका देगा? कई जानकार इस संभावना से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान की दिलचस्पी फिलहाल कुलभूषण को फांसी देने में कम और इस मुद्दे से फायदा उठाने में ज्यादा होगी.

आज तक किसी जासूस को फांसी पर नहीं लटकाया गया

वैसे भी, पाकिस्तान में आजतक भारत के किसी ‘जासूस’ को फांसी पर नहीं लटकाया गया है. कुलभूषण पहला शख्स नहीं है जिसे पाकिस्तान में भारत के लिए जासूसी करने या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोपों में पकड़ा गया है. पहले भी कई भारतीय पाकिस्तान में गिरफ्तार किए गए हैं. इसमें से कइयों को मौत की सजाएं सुनाई गई लेकिन किसी सजा पर अमल नहीं हुआ. उनकी मौत की सजाएं आम तौर पर उम्रकैद में बदल दी गईं. कई लोग अपनी सजाएं पूरी कर वापस भारत आ गए तो रवींद्र कौशिश और सरबजीत सिंह जैसों ने पाकिस्तान की जेलों में आखिरी सांस ली.

मशहूर पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी ने अपने टीवी कार्यक्रम ‘आपस की बात’ में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कुलभूषण को जल्द फांसी दी जाएगी. वह कहते हैं, 'सरकारें ऐसे लोगों को डिप्लोमेसी का हिस्सा बना लेती हैं, क्योंकि दोनों पक्ष खेल खेल रहे होते हैं. इनके लोग भी पकड़े जाते हैं और उनके लोग भी पकड़े जाते हैं. फिर लेन देन होता है. इसलिए यह कोई नई बात नहीं है.'

नजम सेठी यह सवाल भी उठाते हैं कि जब मिलिट्री कोर्ट में 30 दिन के भीतर फैसला होता है, तो फिर कुलभूषण को सजा सुनाने में एक साल का समय क्यों लिया गया. उनके मुताबिक, 'इसका मतलब है कि सेना और सरकार किसी जल्दबाजी में नहीं हैं. इसलिए उन्हें लगता है कि बेहतर है कि सजा दे दो और फिर उसे लंबा लटका दो. इससे साफ है कि उनके कुछ और भी इरादे होंगे. इसे किसी और भी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है.'

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भारत विरोध पर जिंदा पाकिस्तान

Passport Kulbhushan Jadhav

वैसे भी पेशावर हमले के बाद जिस तरह पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों के मामले में लोगों को धड़ाधड़ फांसियां दी गई हैं, उसे देखते हुए अगर कुलभूषण को फांसी दे जाती है और फिर उसकी खबर आती तो किसी को हैरानी नहीं होती. लेकिन पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग ने कुलभूषण को मौत की सजाए सुनाए जाने की खबर को जोर शोर से जारी किया और लगता है कि इसकी फुल मीडिया कवरेज का भी इंतजाम कराया गया.

पाकिस्तानी पत्रकार शामिल शम्स कहते हैं कि इस खबर के जरिए भारत विरोधी भावनाएं भड़काने की पूरी कोशिश की गई जिसका भरपूर फायदा आखिरकार पाकिस्तानी सेना को मिलता है. शम्स कहते हैं, 'दरअसल पाकिस्तान का अस्तित्व ही भारत विरोध पर टिका हुआ है.'

कुलभूषण के मामले पर यूं तो सेना और नवाज शरीफ की सरकार एक साथ खड़े दिखाई देते हैं, लेकिन शामिल शम्स इसे नवाज शरीफ सरकार पर दबाव बनाने की एक कोशिश के तौर पर देखते हैं.

वह कहते हैं कि कुलभूषण को मौत की सजा किसी ट्रायल कोर्ट ने नहीं, बल्कि सेना ने सुनाई है और इस मामले में जिस तरह गोपनीयता रखी गई है, वह कई सवाल उठाती है. भारत के राजनयिकों ने कई बार कुलभूषण से मिलने की अनुमति मांगी लेकिन उसे बार बार ठुकरा दिया गया. ऐसे में, कुलभूषण के खिलाफ मामले की निष्पक्षता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जितनी भी खरी खोटी बातें होंगी, वे सब नवाज शरीफ सरकार के खाते में आएंगे. इस मुद्दे पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया बताती है कि यह मामला लंबा खिंच सकता है.

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नफा नुकसान

नजम सेठी कुलभूषण के मामले को हाल में लापता हुए एक पूर्व पाकिस्तानी कर्नल के मामले से जोड़ कर देखते हैं. सेठी के मुताबिक, बहुत संभावना है कि नेपाल से लापता हुए कर्नल हबीब भारतीय एजेंसियों के कब्जे में हों, क्योंकि नेपाल में भारत का बहुत असर है. उनके मुताबिक जिस तरह की कहानियां पाकिस्तान में कुलभूषण को लेकर सुनाई जा रही हैं, हो सकता है ठीक वैसी ही बातें कुछ दिनों में कर्नल हबीब के बारे में भारत की तरफ से कही जाएं. इसलिए भी वह कुलभूषण को जल्द फांसी दिए जाने की संभावना नहीं देखते.

कुल मिलाकर, कुलभूषण का क्या होगा, यह आने वाले दिनों की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. पूरा मामला पाकिस्तानी सेना के हाथों में है. नवाज शरीफ सरकार का तो इस मामले में न अब तक कोई दखल था और न आगे रहेगा. सेना की हां में हां मिलाने के अलावा उनके पास कोई और चारा नहीं है. पाकिस्तान सेना को अगर ज्यादा फायदा कुलभूषण को फांसी चढ़ाने में नजर आएगा तो उसे कोई बचा नहीं सकता. और अगर उसे ज्यादा रखना फायदे का सौदा दिखा, तो कुलभूषण की सांसें चलती रहेंगी.

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