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कुलभूषण जाधव मामला: पाकिस्तान में बम की तरह गिरा आईसीजे का फैसला

कुलभूषण जाधव मामले में कोर्ट में हार के बाद तमाम सवाल पाकिस्तानी मीडिया में तैर रहे हैं

Seema Tanwar Updated On: May 19, 2017 07:56 AM IST

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कुलभूषण जाधव मामला: पाकिस्तान में बम की तरह गिरा आईसीजे का फैसला

कुलभूषण जाधव पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) का फैसला मानो पाकिस्तान में एटम बम की तरह गिरा है, जिसकी तपिश हर कहीं महसूस हो रही है.

कोई हेग की अदालत पर बरस रहा है, कोई वहां पाकिस्तान का केस लड़ने वाले वकीलों पर तो कोई नवाज शरीफ की सरकार पर. दरअसल दिक्कत यह है कि पूरी दुनिया की सामने पाकिस्तान को ऐसी शिकस्त मिली है, जिसे झुठलाना भी मुमकिन नहीं.

क्या पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाकर गलती की, या फिर अदालत के अधिकारक्षेत्र पर इतना नहीं अड़ना चाहिए था? क्या जो वकील भेजे गए थे, वे अच्छे नहीं थे जो पैरवी के लिए मिले 90 मिनट का भी पूरा इस्तेमाल न कर सके?

क्या कुलभूषण जाधव तक भारत को कॉउंसलर एक्सेस न देने से पाकिस्तान का केस कमजोर हुआ? क्या कुलभूषण को फांसी की सजा सुनाने के तुरंत बाद लटका देना चाहिए था? ये सारे सवाल पाकिस्तानी अखबारों और टीवी चैनलों पर तैर रहे हैं.

कुछ लोग यह कह कर मामले को ठंडा करने की कोशिश भी कर रहे हैं कि अब भी कुछ नहीं बिगड़ा है. अदालत ने सिर्फ सजा पर अंतरिम रोक गई है और अभी मामले पर अंतिम फैसला नहीं आया है. लेकिन पाकिस्तान पूरी तैयारी के साथ आगे केस लड़ना होगा.

Kulbhushan Jadhav

शर्मिंदगी

कुलभूषण की फांसी पर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट की तरफ से फिलहाल लगाई गई रोक आज पाकिस्तान के सभी बड़े अखबारों की पहली खबर है. आए दिन भारत के ललकारने वाले पाकिस्तानी अखबार ‘औसाफ’ के लिए इस खबर को हजम करना ही मुश्किल हो रहा है. अखबार ने कई कानूनविदों के हवाले से लिखा है कि कुलभूषण के केस में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अपनी हदों को पार कर दिया है.

अखबार के मुताबिक पाकिस्तान के लिए इससे बड़ी शर्मिंदगी की कोई बात हो नहीं सकती और इसका श्रेय सिर्फ पाकिस्तान सरकार की नाकामी को जाता है. अखबार ने पाकिस्तान की जानी मानी वकील आस्मा जहांगीर के हवाले लिखा है कि अगर भारतीय राजनयिकों को कुलभूषण से मिलने दिया जाता तो आज इस केस का फैसला शायद अलग होता.

‘एक्सप्रेस न्यूज’ टीवी चैनल पर जावेद चौधरी ने अपने कार्यक्रम ‘कल तक’ की शुरुआत बहुत आक्रामक अंदाज में की.

उनके शब्दों में, 'हमारी टीम कुलभूषण मुकदमे का पहला दौर हार गई है. ये मुल्क की बड़ी राजनयिक हार है. देश चाहता है कि जो लोग इस हार के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए. लेकिन यह उम्मीद करना ही गलत है. हम न सिर्फ इस हार को भी चुपचाप पी जाएंगे, बल्कि उन वकीलों को लाखों डॉलर की फीस भी अदा करेंगे.'

निशाने पर नवाज

‘दुनिया न्यूज’ पर अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए मशहूर राजनेता शेख रशीद ने एक ही सांस में नवाज शरीफ सरकार को निकम्मी, निखट्टू, नालायक, नाकाबिल और गैर जिम्मेदार जैसे तमगों से नवाजा. उन्होंने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और भारतीय उद्योगपति सज्जन जिंदल की हालिया मुलाकात पर भी ऊंगली उठाई. शेख रशीद ने कहा, 'जब अपने ही घर के लोग चोरों के साथ मिले हों और नेतृत्व बुजदिल हो तो देश को शर्मिंदगी उठाने से नहीं बचाया जा सकता.'

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की नेता शिरीन रहमान के बयान की भी हर तरफ चर्चा हो रही है जिसके मुताबिक सरकार के नकारेपन की वजह से पाकिस्तान एक जीता हुआ केस हार गया. ‘जंग’ की रिपोर्ट के मुताबिक जहां रहमान ने पाकिस्तान में विदेश मंत्री न होने के लिए सरकार को आड़े हाथ लिया, वहीं सरकार की तरफ से भेजे गए वकीलों की काबलियत पर भी सवाल उठाए. शिरीन रहमान ने कहा, 'वहां भारत का एड हॉक जज बैठा था, लेकिन आपका जज नहीं था. आपके पास 90 मिनट थे, लेकिन 50 मिनट ही आप दलीलें दे सके, पूरा टाइम इस्तेमाल करना चाहिए था. पाकिस्तान में कुलभूषण की सरगर्मियां बतानी चाहिए थीं.'

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला अंतिम नहीं है, इसलिए पाकिस्तान को आगे केस डट कर लड़ना चाहिए.

जाने माने पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर के शो ‘कैपिटल टॉक’ में कानूनी मामलों के जानकार और पूर्व कानून मंत्री अहमर बिलाल सूफी का कहना है, 'यह सही है कि मुकदमे के शुरुआती चरण में भारत को कामयाबी मिली है, लेकिन अब इस दूसरा चरण शुरू होगा और भी अहम है. इसके लिए पूरी तैयारी करनी होगी और पूरे सबूत पेश करने होंगे.'

अंतरिम फैसला

कुछ ऐसी ही बात अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के पूर्व जज जस्टिस अली नवाज चौधरी ने जियो टीवी के एक कार्यक्रम में कही.

गुरुवार को आए अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले पर उनका कहना है, 'सिर्फ यह एक अंतरिम फैसला है. अदालत ने कुलभूषण को बरी नहीं किया है. मामला पाकिस्तान के ज्यूरिडिक्शन से बाहर तो नहीं गया है. अब यह पाकिस्तान को तय करना है कि वह कोई नई अदालत बनाए, कोर्ट ट्राइब्यूनल बनाए और जो निश्चित प्रक्रिया है उसके तहत मामला चलाए. सबूतों के आधार पर फैसला पाकिस्तानी जजों को ही करना होगा, कि वह गुनहगार है या नहीं. प्रोसेक्यूशन को अच्छी तैयारी करनी होगी ताकि कोई शक न रहे.'

सरकार की तरफ से जहां वकीलों का बचाव किया जा रहा है, वहीं रोजनामा ‘पाकिस्तान’ के मुताबिक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे अहम है इसलिए कुलभूषण के मामले पर किसी दबाव को नहीं माना जाएगा.

उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला सिर्फ एक अंतरिम फैसला है और इससे किसी की जीत या हार का फैसला नहीं हो जाता.'

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