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हल्की-फुल्की बात: बगदादी है कि मरता नहीं...

न्यूज चैनल वालों ने एक ही वीडियो को इतनी बार दिखाया कि जो अपने पड़ोसी तक को नहीं पहचानते वो भी बगदादी को जानने लगे हैं

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Jun 17, 2017 02:01 PM IST

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हल्की-फुल्की बात: बगदादी है कि मरता नहीं...

बगदादी फिर मारा गया है. लेकिन किसी को यकीन नहीं हो रहा है. पता नहीं मुआ मरा है भी या नहीं. जाने क्या खाकर पैदा हुआ है. कमबख्त बार-बार मरकर भी जी उठता है. पहली बार थोड़े ही मरा है. हर थोड़े दिन पर खबर आती है दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी बगदादी मारा गया.

दुनिया में अमन चैन फैलाने वाली सबसे बड़ी कौम, जो टीवी के सामने आंखें गड़ाए इराक-सीरिया के हालात को देखकर फिक्रमंद रहती है, वो बेचारे दो घड़ी सुकून की सांस भी नहीं ले पाते हैं कि बगदादी के फिर कहीं देखे या सुने जाने की खबर आ जाती है.

बताइए भला ये भी कोई बात हुई. अभी-अभी तो वो काले कोट में पीले चेहरे वाला टीवी एंकर आड़ा तिरछा मुंह बनाते हुए, आंखें नचाकर डराते हुए कहकर गया था कि दुनिया का सबसे खूंखार और खतरनाक आतंकवादी बगदादी मारा गया.

चैन से सोने से पहले जागने की धमकी देकर कमबख्त पहले ही कंफ्यूज कर देता है कि आखिर करना क्या है. चैन से सोना है कि उसकी धमकी सुनकर बेचैन होकर जागना. उस पर बीच-बीच में तेज आवाज में ऐसी घुड़की देता है कि तय करना मुश्किल हो जाता है कि बगदादी ज्यादा खतरनाक है या ये टीवी एंकर.

बगदादी का मतलब टीवी के लिए सिर्फ टीआरपी है

भैया बगदादी मरा है ना! तुम क्यों इतने हलकान हुए जा रहे हो. नहीं भी मरा है तो वो शर्म से मर जाएगा, अगर टीवी पर अपने मरने की खबर का नाटकीय रुपांतरण देख ले. बगदादी को लेकर टीवी एंकर एक-एक बात ऐसे तफ्शील से बताता है कि उतनी बातें तो खुद बगदादी को अपने बारे में नहीं पता होंगी. बगदादी देख ले तो गश खाकर गिर जाए. ‘अच्छा मैंने ये भी किया है, ओह! मैंने ऐसा कर दिया और मुझे ही पता नहीं’.

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एक बार मैंने बगदादी मामलों के जानकार एक टीवी प्रोड्यूसर से पूछ ही लिया. उन जनाब का उस टीवी चैनल में सिक्का चलता था क्योंकि बगदादी को लेकर उन्होंने ऐसे-ऐसे शो बनाए थे जिसकी टीआरपी छप्पड़फाड़ आई थी. उनको देखकर टीवी संपादक ऐसे खिल उठते मानों किसी प्यासे को सहरा में पानी मिल गया हो. ‘आ गया हमारा टीआरपी मास्टर. जब तक बगदादी है और जब तक हमारे पास बगदादी मामलों का ऐसा जानकार, तब तक तो अपनी कुर्सी को कोई हिला भी नहीं सकता. क्या टीआरपी आई है बगदादी के शो की. उसी की बदौलत पांचवें नंबर का न्यूज चैनल होकर अपनी इज्जत बचाए हैं. नहीं तो खबरों ने तो हमारे न्यूज चैनल की वाट लगा ही दी थी.’

बहरहाल, मैंने पूछा, ‘भैया, ऐसा शो बनाते कैसे हो यार, जिसकी इतनी धांसू रेटिंग आती है. उस बड़े वाले न्यूज चैनल संपादक, जो बगदादी को टेलीविजन के पर्दे पर उतारकर न्यूज चैनल्स के इतिहास में आमूल चूल परिवर्तन लेकर आए, उनसे ऐसा क्या सीख लिया कि शो के साथ चैनल दर चैनल तुम्हारी भी टीआरपी हिट है.’

बगदादी मामलों के मंझे हुए जानकार ने सबसे बड़ा खुफिया राज मेरे हाथों में थमा दिया. बोला, ‘देखो पब्लिक जो है... वो ‘वो’ है... उसे गोलियां बरसाते हुए बड़ी-बड़ी मशीनगनें रोमांचित करती है, वो आसमान से फाइटर प्लेन को बम गिराते हुए देखकर सिहरते हैं, सबकुछ धुआं-धुआं करने वाले बम ब्लास्ट देखकर उनके गुर्दों में गुदगुदी होती है. पब्लिक विजुअल्स देखती है. यूट्यूब से उठाओ, चिपका डालो और लिखने को कुछ भी लिख दो. कौन बगदादी आ रहा है पूछने.’

तो भइया ये है राज. इसी चक्कर में टीवी के लिए बगदादी का मरना भी अच्छा है और फिर मरकर जिंदा हो उठना भी. वो एक शेर है ना,

यूं तो घबराकर कहते हैं कि मर जाएंगे गर मरकर भी चैन न पाया तो कहां जाएंगे

तो चैन ही नहीं है. न बगदादी को और न इन टीवी वालों को. इस बार बेचैन होकर कह रहे हैं कि बगदादी को आखिरकार रूस की सेना ने मार गिराया है. जो अमेरिकन फौजों से न मरा, जिसे नाटों के सैनिक नहीं मार पाए उसे आखिर में रूस ने ढेर कर दिया. दुनियाभर में बगदादी के मरने की रिपोर्ट आ रही है. लेकिन यकीन नहीं होता. क्यों नहीं होता? तो अब जरा काम की बात सुनिए कि यकीन क्यों नहीं हो रहा.

A fighter of the Islamic State of Iraq and the Levant (ISIL) holds an ISIL flag and a weapon on a street in the city of Mosul, June 23, 2014. U.S. Secretary of State John Kerry held crisis talks with leaders of Iraq's autonomous Kurdish region on Tuesday urging them to stand with Baghdad in the face of a Sunni insurgent onslaught that threatens to dismember the country. Picture taken June 23, 2014. REUTERS/Stringer (IRAQ - Tags: CIVIL UNREST POLITICS TPX IMAGES OF THE DAY) - RTR3VIB1

तस्वीर: प्रतीकात्मक

2010 में आईएसआईएस में बगदादी के ठसक की पहली बार खबर आई. जून 2014 में बगदादी इराक का स्वंयभू खलीफा घोषित हो गया. उसका खलीफा बनने का मूड हुआ तो कौन मुखालफत कर सकता था. नवंबर 2014 में खबर आई कि बगदादी अमेरिका के हवाई हमले में मारा गया. लेकिन एक हफ्ते बाद ही बगदादी का एक नया ऑडियो क्लिप सामने आ गया. कमबख्त फिर जेहाद का नाम ले लेकर मरने मारने की बातें कर रहा था.

बगदादी है कौन जो मर नहीं रहा.. बार-बार मरकर जिंदा हो जाता है

इसके बाद तो वो मरता रहा और फिर मरकर जिंदा होता रहा. मार्च 2015 में उसके गंभीर तौर पर जख्मी होने की बात फैली थी. कहा गया कि यूएस के एयरस्ट्राइक में बगदादी की हड्डी पसली एक हो गई. खबर यहां तक आई कि आईएस के लड़ाके अपने खलीफा को अंतिम सांसें भरता देख कर नए खलीफा को चुनने की तैयारी कर रहे हैं. फिर पता चला कि मोसुल के दो डॉक्टर चोरी छिपे उसकी तिमारदारी में लगे हैं. उसके बाद ढाक के वही तीन पात. बगदादी का कुछ नहीं बिगड़ा.

अक्टूबर 2015 में इराकी फौजों के हवाले से बताया गया कि जनाब बगदादी अपने आईएस के काफिले के साथ कर्बला की ओर कूच कर रहे थे. इराकी फौजों ने दनादन गोले दागने शुरु कर दिए. इराकी आर्मी ने कहा कि हो न हो इस बार बगदादी को मार गिराया है. बाद में इत्तेला मिली कि आईएस के कुछ लड़ाके तो जन्नत की हूरों से मिलने चल दिए जनाब बगदादी को ये नसीब न मिल सका.

जून 2016 में तुर्की के एक अखबार और इराक के एक टीवी चैनल के हवाले से दुनियाभर में समाचार प्रसारित हुआ. बताया गया कि रक्का में बगदादी के काफिले पर हवाई हमला हुआ है. बगदादी तो गए. बाद में पता चला कि बगदादी के मरने की अफवाह आईएस के लड़ाकों ने खुद फैलाई थी. अपने ‘अमीर’ को बचाने की ये उनकी चाल थी.

अक्टूबर 2016 में फिर खबर आई कि बगदादी मारा गया. इराकी न्यूज एजेंसी ने खबर दी कि जनाब बगदादी साहब आईएसआईएस के अपने तीन मातहतों के साथ लंच फरमा रहे थे. किसी ने साजिशन उनके खाने में जहर मिला दिया था. जनाब बगदादी अपने तीनों चेलों के साथ उल्टियां करते-करते किसी अस्पताल में दाखिल हुए. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था. जनाब बगदादी का इंतकाल हो गया. पूरी दुनिया में ये खबर जंगल की आग की तरह फैली. लेकिन थोड़े ही दिनों में बुझ भी गई. क्योंकि बगदादी के फिर देखे सुने जाने की खबर मिली थी. शायद जहर मिलावटी रहा होगा या फिर बगदादी में ही उससे ज्यादा जहर भरा हो.

तो ये है बगदादी के मरने और फिर से जिंदा होने की कहानी. आपको पता है बगदादी का ढंग का फोटो तक नहीं है दुनिया के बड़ी-बड़ी खुफिया एजेंसियों के पास. एक वीडियो है जिसमें वो किसी मस्जिद में तकरीर देता हुआ दिख रहा है. उसे भी न्यूज चैनल वालों ने घिस-घिस कर इतना दिखाया है कि जो अपने पड़ोसी तक को नहीं पहचानते वो भी बगदादी को जानने लगे हैं. लेकिन फिर भी...बगदादी है कि मरता नहीं...

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