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P** गो बैक टू इंडिया: ट्रंप की आलोचना की तो ये मिला जवाब

भारतीय मूल के सीईओ रवीन गांधी ने ट्रंप की आलोचन की तो एक ट्रंप सपोर्टर ने उन्हें धमकीभरा वॉयसमेल भेजा था.

FP Staff Updated On: Aug 23, 2017 06:22 PM IST

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P** गो बैक टू इंडिया: ट्रंप की आलोचना की तो ये मिला जवाब

अमेरिका में चल रहे नस्लवाद की बहस पर भड़की हिंसा के बाद एक भारतीय सीईओ पर भद्दी नस्लीय टिप्पणी करने की घटना सामने आई है.

भारतीय मूल के रवीन गांधी पर एक महिला ने नस्लीय टिप्पणी वाला वॉयसमेल भेजा था. उसने इस मेल में गांधी को कहा था, 'You are f****** indian pig. Go back to your country. India is a filthy mess.'

गांधी जीएमएम नॉनस्टिक कोटिंग्स के सीईओ हैं. उन्होंने हाल ही में शार्लोट्सविले में हुई नस्लीय हिंसा पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान का विरोध किया था. ट्रंप ने गोरों को श्रेष्ठ दिखाने वाली रैली के दौरान भड़की हिंसा पर कहा था कि दोनों ही पक्ष दोषी है. ट्रंप के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी.

गांधी ने सीएनबीसी के लिए लिखा था कि शार्लोट्सविले में जो हुआ मैं उसके बाद उनके इकोनॉमिक एजेंडे का समर्थन और बचाव नहीं कर सकता.

गांधी का कहना था कि मैंने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा था कि मैं ट्रंप के इकोनॉमिक एजेंडे के कुछ पहलुओं का पक्षधर हूं लेकिन अब कुछ भी हो जाए, चाहे डाउ 50,000 हजार पर आ जाए, बेरोजगारी का स्तर 1 प्रतिशत हो जाए या जीडीपी 7 प्रतिशत हो जाए, मैं उनके एजेंडे का समर्थन नहीं कर सकता. और एक बेहतर मानसिक हालत में मैं ऐसे राष्ट्रपति का समर्थन नहीं कर सकता, जो ऐसे अमेरिकियों से नफरत करता हो, जो उसके जैसा न दिखता हो.

उनके इस बयान के बाद से ही उनपर नस्लीय आक्रमण हो रहे हैं. उन्होंने ये वॉयसमेल यूट्यूब पर शेयर किया था. इस मेल में एक महिला ने चीख-चीखकर उनपर नस्लीय टिप्पणियां कीं. उसने कहा कि तुम अपनी गंदगी यहां से ले जाओ और इंडिया में बेचो. उस औरत ने यूनाइटेड नेशन्स में अमेरिकी राजदूत भारतीय मूल की निकी हेले को भी बुरा-भला कहा. साथ ही उसने ये भी कहा कि वो लोग जल्द ही बौद्ध मूर्तियों को गिराना शुरू करेंगे.

शिकागो ट्रिब्यून ने जानकारी दी है कि रवीन गांधी शिकागो के इलिनॉय में पैदा हुए और पले-बढ़े हैं. जब ट्रिब्यून ने उनसे पूछा कि उन्होंने ये ऑडियो ऑनलाइन क्यों पोस्ट किया था? तो उनका जवाब था, 'हालांकि, मेरे रेगुलर लाइफ में मुझे कभी नस्लवाद जैसी चीज का सामना नहीं करना पड़ता लेकिन ये दुखद सच्चाई है कि अमेरिका में ऐसा नस्लवादी समूह है, जो मुझे दूसरे दर्जे के नागरिक के तौर पर देखता है.'

उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे वॉयसमेल या धमकियों से कोई फर्क नहीं पड़ता.

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