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नर्म पड़े चीन के तेवर, बोला- भारत हमारे ज्यादा करीब

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, चीन का साथ भारत के लिए अमेरिका से कहीं ज्यादा फायदेमंद है.

FP Staff Updated On: Jul 07, 2017 09:37 AM IST

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नर्म पड़े चीन के तेवर, बोला- भारत हमारे ज्यादा करीब

भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद के बाद अब दुनिया भर की निगाहें हैमबर्ग में होने जा रही जी-20 समिट पर हैं, जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दुनियाभर के कई नेता भाग ले रहे हैं. इस बीच चीन ने युद्ध की धमकी के बाद अपने सरकारी मीडिया के जरिए भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों की दुहाई दी है. चीन ने कहा है कि भारत उसके ज्यादा करीब है.

एक्सपर्ट के हवाले से ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है, 'कुछ दिन पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति को अमेरिका में गले लगा रहे थे उसी समय भारतीय सेना सीमा पार कर सिक्किम में घुस आई. इससे ये साबित होता है कि भारत अमेरिका को गले लगाकर चीन से समर्थन वापस चाह रहा है. लेकिन किसी भी स्थिती में भारत किसी भी तरह से चीन से अपने आर्थिक संबंधों को खराब करना नहीं चाहेगा.'

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, चीन का साथ भारत के लिए अमेरिका से कहीं ज्यादा फायदेमंद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए मेक इन इंडिया कैंपेन के कारण भारत उत्पादों के निर्माण पर काफी ज्यादा जोर दे रहा है. ऐसे में जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका में ही उत्पाद निर्माण को वापस ले जाना चाहते हैं तो भारत के लिए निवेश हेतु एकमात्र विकल्प चीन ही रह जाता है.

अखबार ने यह भी लिखा, भारत के लिए अमेरिका के साथ आर्थिक संबंध बनाना चीन के मुकाबले कहीं ज़्यादा कठिन है. भारत में कहीं न कहीं अमेरिका के लिए कठोर भावनाएं हैं, जो कहीं न कहीं उसे भारत का करीबी बनने से रोकता है. वाशिंगटन में अपने शिखर सम्मेलन के दौरान, ट्रंप ने भारत में व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए पीएम मोदी से आग्रह किया था. जिसका साफ मतलब है कि शिखर सम्मेलन खाली न जाए इसके लिए भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने काफी होमवर्क किया है.

यह है मुख्य विवाद ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि भारत ने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सिक्किम को इस छोटे देश (भूटान) से अलग कर अपना हिस्सा बना लिया. अखबार ने लिखा, '60 और 70 के दशक में भूटान ने सिक्किम के लिए विरोध किया तो भारत ने अपनी सेना की मदद से उसे दबा दिया. भारत ने 1975 में सिक्किम के राजा को अपदस्थ कर दिया और यहां की संसद को मैनिपुलेट करके एक रेफरेंडम लेकर आया जिससे सिक्किम भारत का अंग बन गया. सिक्किम को इस तरह छीने जाने से भूटान डर गया और भारत की हर बात मानने को मजबूर हो गया.'

अखबार ने लिखा, चीन का निर्माण स्थल भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास है. यह भारत के उत्तर पूर्व क्षेत्र की तरफ जाने का महत्वपूर्ण रास्ता है. सड़क बन जाने के बाद संभावित हमले के डर से भारतीय सेना ने चीन की सीमा में घुसपैठ की और हमारा सड़क निर्माण रोक दिया. 'नई दिल्ली का क्षेत्रीय वर्चस्व बढ़ता ही जा रहा है और उसे (चीन को) उकसाने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. दुनिया को यह देखना चाहिए कि हिमालयी देशों में भारत कैसे दादागिरी कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भूटान की दुविधा पर ध्यान देना चाहिए और भारत को इस छोटे देश पर दबाव बनाने से रोकना चाहिए.'

(साभार न्यूज 18)

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