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जब भारत के लिए सोवियत संघ ने चीन को लगाई थी लताड़

सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने भारत के साथ सीमा पर झड़प और दलाई लामा के पलायन करने के लिए माओत्से तुंग को फटकार लगाई थी

FP Staff Updated On: Aug 05, 2017 08:15 PM IST

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जब भारत के लिए सोवियत संघ ने चीन को लगाई थी लताड़

सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने 1959 में भारत के साथ सीमा पर झड़प और इसके बाद तिब्बती आध्यात्मिक गुरू दलाई लामा के पलायन करने के लिए माओत्से तुंग को फटकार लगाई थी जबकि तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर कोई दोष नहीं डाला था.

हांगकांग के अखबार ने ख्रुश्चेव और माओ के बीच हुई एक हंगामेदार बैठक की प्रतिलिपि प्रकाशित की है. इसके अनुसार सोवियत नेता ने चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन प्रमुख और चीन के शासक माओत्से तुंग से साफ तौर पर कहा था कि वो तिब्बत की स्थिति और भारत के साथ तनाव के लिए ज़िम्मेदार हैं.

भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के एक महीने से थोड़े ज्यादा समय बाद उस साल सितंबर के आखिर में हुई कटुतापूर्ण बैठक के कारण सोवियत नेता कथित रूप से बीजिंग की अपनी यात्रा के बीच में ही लौट गए.

अखबार ने 'कोल्ड वॉर इंटरनेशनल हिस्ट्री प्रोजेक्ट ऑफ विल्सन सेंटर' को प्रतिलिपि का स्रोत बताया है.

बैठक की शुरुआत में ख्रुश्चेव ने माओ से कहा, 'आपके भारत के साथ इतने सालों से अच्छे संबंध थे. अचानक यहां एक बुरी घटना हुई जिसके कारण नेहरू ने खुद को एक बेहद मुश्किल स्थिति में पाया.'

उन्होंने माओ से कहा, 'अगर आप मुझे कहने दें, तो मैं आपसे वो कहूंगा जो एक मेहमान को नहीं कहना चाहिए, तिब्बत की घटनाओं के लिए आप दोषी हैं. तिब्बत में आपका शासन है, आपकी खुफिया (एजेंसियां) वहां होनी चाहिए थीं और उन्हें दलाई लामा की योजनाओं एवं इरादों का पता होना चाहिए था.'

इसपर माओ ने कहा, 'नेहरू का भी कहना है कि तिब्बत की घटनाओं के लिए हम दोषी हैं. इसके अलावा सोवियत संघ में भारत के साथ संघर्ष के मुद्दे पर (भारत का समर्थन करते हुए) एक घोषणापत्र प्रकाशित किया गया.'

माओ रूस की सरकारी समाचार एजेंसी में छपी एक खबर की तरफ संकेत कर रह थे जिसमें भारत और चीन से बातचीत के जरिए मुद्दे का हल करने की अपील की गई थी.

ख्रुश्चेव ने माओ से ये भी कहा कि वो चीनियों की ओर से सोवियत संघ को 'अवसर के हिसाब से बदलने वाला' कहने से 'आक्रोशित' हैं.

उन्होंने माओ और बैठक में मौजूद दूसरे चीनी नेताओं से कहा, 'अपने आरोप वापस लें नहीं तो इससे दोनों देशों के बीच संबंध ख़राब होंगे. हम आपके मित्र हैं और सच्चाई बयां करते हैं. हम किसी के भी साथ अवसर के हिसाब से बदलने वालों की तरह पेश नहीं आए. कामरेड चेन यी (चीनी सेना के तत्कालीन कमांडर) अगर आपको लगता है कि हम अवसर के हिसाब से बदलने वाले हैं, तो मेरी तरह हाथ मत बढ़ाएं. मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगा.'

संभवत: इस दौरे के बाद चीन और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच संबंध और बिगड़ गए और चीन अमेरिका के करीब होता चला गया.

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