विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

गुरु पूर्णिमा का जिक्र कर नासा ने ऐसे बनाया इसे खास

गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के प्रति सिर छुकाकर उनके प्रति आभार व्यक्त करने का दिन

FP Staff Updated On: Jul 09, 2017 01:12 PM IST

0
गुरु पूर्णिमा का जिक्र कर नासा ने ऐसे बनाया इसे खास

सनातनी हिंदू परंपरा में गुरु का विशेष महत्व है. इसी महत्व को दर्शाने के लिए आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि प्राचीन काल में इसी दिन शिष्‍य अपने गुरुओं की पूजा करते थे. गौरतलब है कि परंपरा में गुरु और शिक्षक में भी अंतर बताया गया है. शिक्षक अक्षर ज्ञान दाता है तो गुरु जीवन ज्ञान दाता है. इस बार यह  9 जुलाई यानी रविवार को मनाया जा रहा है.

बच्‍चे को जन्म भले ही माता-पिता देते हो पर जीवन का अर्थ और सार समझाने का कार्य गुरु ही करता है. उसे जीवन की कठिन राह पर मजबूती से खड़े रहने की हिम्‍मत एक गुरु ही देता है. हिंदू परंपरा में गुरु को गोविंद से भी ऊंचा माना गया है, इसलिए यह दिन गुरु की पूजा का विशेष दिन है.

नासा ने गुरु पूर्णिमा का नाम सबसे ऊपर रखा

हिंदू परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के प्रति सिर छुकाकर उनके प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है. ऐसा माना जाता है कि गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा करने से ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है.

इस बार की गुरु पूर्णिमा को अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने बेहद खास बना दिया है. नासा के अधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक पोस्ट किया गया है जिसमें गुरु पूर्णिमा के बारे में जिक्र किया गया है.

 

नासा ने इस ट्वीट में पूर्णिमा के दिन चांद को पूरी दुनिया में किन नामों से जाना जाता है इसका जिक्र किया है. जिसमें गुरु पूर्णिमा का नाम सबसे ऊपर है. इसके अलावा हे मून, राइप कॉर्न मून, थंडर मून नाम भी बताए गए हैं.  नासा ने इस पोस्ट के साथ ही चंद्रमा की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर भी जारी की है.इस ट्वीट को  हजार बार से ज्यादा रिट्वीट किया गया है.

मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा के दिन महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म हुआ था. उन्होंने चारों वेदों को लिपिबद्ध किया था. इस कारण उनका एक नाम वेद व्यास भी है. उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है.उन्हें आदिगुरु भी कहा जाता है

पूर्णिमा को गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा

गुरु पूर्णिमा के त्‍योहार के दिन लाखों श्रद्धालु ब्रज में स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस‍ दिन बंगाली साधु सिर मुंडाकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं, ब्रज में इसे मुड़िया पूनों नाम से जाना जाता है.

सनातनी परंपरा के अनुसार इस दिन से चार माह तक साधु-संत एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं. इसलिए ये चार महीने अध्ययन के लिए उपयुक्त माने जाते हैं.

(साभार- न्यूज18)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi