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एनएसजी की सदस्यता पर भारत को मिल सकता है जर्मनी का साथ

एनएसजी की दावेदारी के लिये भारत को मिला जर्मनी के सहयोग का संकेत

FP Staff Updated On: Apr 05, 2017 05:30 PM IST

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एनएसजी की सदस्यता पर भारत को मिल सकता है जर्मनी का साथ

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की एंट्री इस बार सुनिश्चित हो सकती है. अब तक भारत को कई देशों का विरोध झेलना पड़ रहा था. लेकिन अब कुछ देशों का साथ मिलता दिख रहा है.

जर्मनी ने  इस दिशा में संकेत दे दिया है. खबरों के मुताबिक, जर्मनी के एक वरिष्ठ राजनयिक सूत्र ने बताया कि एनएसजी परामर्श समूह की बैठक चल रही है और इस बैठक में भारत को सदस्य बनाए जाने की चर्चा चल रही है.

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पीएम होंगे जर्मनी की यात्रा पर

जर्मनी के इस दोस्ताना कदम के बाद ये अहम है कि पीएम नरेंद्र मोदी इस साल 2 बार जर्मनी की यात्रा पर जाएंगे. पहले वह मई में और फिर जुलाई में G-20 सम्मेलन में भाग लेने के लिए जर्मनी जाएंगे.

हालांकि भारत की एनएसजी सदस्यता पर चीन और पाक अब भी अपने पुराने रूख पर अड़े हुए हैं. लेकिन साथ ही पिछले सप्ताह अमेरिका ने भारत की सदस्यता का समर्थन दोहराया था.

चीन का कहना है कि जब तक भारत परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करता तब तक एनएसजी में चीन उसका समर्थन नहीं करेगा.

क्यों जरूरी है सदस्यता?

भारत ने अमेरिका और फ्रांस परमाणु करार किया है. ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ परमाणु करार की बातचीत चल रही है. फ्रांसीसी परमाणु कंपनी अरेवा जैतापुर, महाराष्ट्र में परमाणु बिजली संयंत्र लगा रही है. वहीं अमेरिकी कंपनियां गुजरात के मिठी वर्डी और आंध्र प्रदेश के कोवाडा में संयंत्र लगाएंगी.

एनएसजी की सदस्यता हासिल करने से भारत परमाणु तकनीक और यूरेनियम बिना किसी विशेष समझौते के हासिल कर सकेगा. परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण करने में भी सदस्य राष्ट्रों से मदद मिलेगी. देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये यह जरूरी है कि भारत को एनएसजी में प्रवेश मिले.

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