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दरगाह ब्लास्ट का दोष भी भारत पर मढ़ रहा है पाक मीडिया

अखबार का कहना है कि भारत के खिलाफ सबूत पाकिस्तान ने अमेरिका के विदेश मंत्रालय को सौपें हैं.

Seema Tanwar | Published On: Feb 20, 2017 11:34 AM IST | Updated On: Feb 20, 2017 11:47 AM IST

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दरगाह ब्लास्ट का दोष भी भारत पर मढ़ रहा है पाक मीडिया

जिस तरह भारत में कोई भी धमाका होने पर पहला शक पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई पर जाता है, ठीक यही हाल पाकिस्तान में है.

कहीं कुछ हुआ नहीं कि पहली ऊंगली भारत और रॉ पर उठती है. पाकिस्तान में बीते हफ्ते हुए धमाकों के सिलसिले में वहां का उर्दू मीडिया फिर भारत को ही घेरने में जुटा है और लपेटे में अफगानिस्तान भी है.

धुर दक्षिणपंथी अखबार ‘नवा ए वक्त’ लिखता है कि दहशतगर्दी की हालिया लहर के बाद पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के अंदर कार्रवाई की और देश के कई इलाकों में कॉम्बिंग ऑपरेशन किया और चंद घंटों के भीतर सौ से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया है.

इसके अलावा सैकड़ों लोगों की धरपकड़ के साथ साथ अखबार ने बड़ी मात्रा में गोला बारूद बरामद होने की बात भी लिखी है. लेकिन अखबार अपने संपादकीय लेख में धीरे धीरे पाकिस्तान में होने वाले धमाकों के तार भारत से जोड़ ही देता है और उसके मुताबिक इनका जरिया बनते हैं अफगानिस्तान में स्थापित भारत के कॉन्सुलेट.

भारत के खिलाफ सबूत का दावा

अखबार का कहना है कि भारत के खिलाफ सबूत पाकिस्तान ने अमेरिका के विदेश मंत्रालय को सौपें हैं, लेकिन भारत के साथ दोस्ती निभाते हुए अमेरिका ने इन सबूतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया और इसी के बाद भारत ने ग्वादर पोर्ट और चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर को नाकाम बनाने की साजिश रची है.

अखबार का कहना है कि इसी साजिश के तहत, कराची, बलूचिस्तान, फाटा और देश के अन्य इलाकों में आतंकवादी हमलों का नया सिलसिला शुरू हुआ है.

‘रोजनामा दुनिया’ लिखता है कि पाकिस्तान ने पिछले दिनों ही अफगानिस्तान को 76 आतंकवादियों की सूची सौपी है, लेकिन दूसरी तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि अफगान सरकार इस बारे में संजीदा है.

'पाकिस्तान भोला-भाला देश'

पाकिस्तान को ‘भोला भाला’ देश बताते हुए अखबार लिखता है कि उसकी नीति कभी भारत की तरह आक्रामक नहीं रही है. अखबार के मुताबिक मुश्किल यह है कि अफगानिस्तान जब भी पाकिस्तान के साथ बात करता है तो भारत की ऐनक लगा लेता है और अगर उसका यही रवैया जारी रहा तो आतंकवाद के खिलाफ जंग कभी नहीं जीती जा सकती.

‘जसारत’ ने सवाल उठाया है कि सेना ने विभिन्न शहरों में अपने अभियान में जिन 100 लोगों को मारा है, उनमें कुछ निर्दोष भी हो सकते हैं. इसके अलावा अखबार ने हमलों के बाद पाकिस्तान के सेना मुख्यालय में अफगान राजनयिकों को तबल किए जाने पर भी नाखुशी जताई है.

अखबार की राय में, बेशक दहशतगर्दी अफगानिस्तान के रास्ते ही फैलाई जा रही है और इस बारे में सेना का गुस्सा भी वाजिब है लेकिन राजनयिक तौर तरीकों का ख्याल रखना भी जरूरी है. अखबार के मुताबिक पाकिस्तान की देखा देखी अफगानिस्तान और भारत भी राजनयिकों को सेना मुख्लायल में तबल करने लग जाएंगे.

अफगानिस्तान में कार्रवाई करने पर अखबार की पाकिस्तानी सेना और सरकार को नसीहत है कि जो भी करें, सोच समझ कर ही करें. अखबार की दलील है कि पाकिस्तानी सेना ने यूं तो अपनी सीमा में रहकर ही सरहद पार गोलाबारी की है, लेकिन अफगानिस्तान इस बारे में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का दरवाजा खटखटा सकता है और इस मामले भारत का उसे पूरा साथ मिलेगा.

हिंदू पर्सनल लॉ बिल पर भी बात

उधर ‘जंग’ ने पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए पर्सनल लॉ लागू होने का स्वागत किया है. अखबार लिखता है कि इस पर्सनल लॉ में हिुंदु शादियों के रजिस्ट्रेशन और पति-पत्नि के अलग होने के नियम तय किए गए हैं और इससे हिंदुओं और खास तौर से महिलाओं में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी.

अखबार ने पाकिस्तान में एक जाने माने हिंदू सांसद डॉक्टर रमेश कुमार के हवाले से लिखा है कि अब से पहले शादीशुदा हिंदू औरतों के लिए कई मौकों पर यह साबित मुश्किल होता था कि वे शादीशुदा हैं.

पाकिस्तान में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जब शादीशुदा हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन करा कर उनसे शादी की गई और शादी का रिकॉर्ड न होने की वजह से कानून भी उनकी ज्यादा हिफाजत नहीं कर पाया.

इसरो की सफलता को नया एंगल

उधर ‘एक्सप्रेस’ ने एक साथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के इसरो के कारनामे पर संपादकीय लिखा है- भारत स्टार वॉर के रास्ते पर. अखबार ने इस अभियान में भेजे जाने वाले उपग्रहों का ब्यौरा देते हुए लिखा है कि पाकिस्तान को भी अब भारत का मुकाबला करने के लिए अंतरिक्ष शोध के क्षेत्र में उतरना होगा और अपने रॉकेट प्रोग्राम को विस्तार देना होगा.

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