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परमाणु बम पर बैठे नॉर्थ कोरिया पर अमेरिका कैसे गिराएगा बम? हमले से पहले दस बार सोचेंगे ट्रंप

अमेरिका को समझना होगा कि नॉर्थ कोरिया पर हमला करने और सीरिया-इराक पर हमला करने में जमीन-आसमान का फर्क है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Sep 04, 2017 08:19 PM IST

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परमाणु बम पर बैठे नॉर्थ कोरिया पर अमेरिका कैसे गिराएगा बम? हमले से पहले दस बार सोचेंगे ट्रंप

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि नॉर्थ कोरिया को मिटा कर रख देंगे. लेकिन नॉर्थ कोरिया को मिटाना ट्रंप के लिए इतना भी आसान नहीं है. अगर कोरियाई प्रायद्वीप पर जंग छिड़ी तो युद्ध का अंजाम किसी को भी मालूम नहीं होगा कि ये कितनी जान लेकर थमेगा. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि नॉर्थ कोरिया खुद में ही ‘महाबम’ बन चुका है. लगातार परमाणु परीक्षण कर नॉर्थ कोरिया ने न सिर्फ अपनी तकनीक को उन्नत किया है बल्कि वो दुनिया के शक्तिशाली देशों में भी शामिल हो गया है. जानकार मानते हैं कि नॉर्थ कोरिया कई परमाणु बम बना चुके हैं. ऐसे में अमेरिका आज के दौर में नॉर्थ कोरिया को इराक-सीरिया समझने की भूल नहीं कर सकता है.

अमेरिका के तीखे बयानों से नाराज नॉर्थ कोरिया ने भी धमकी दी थी कि अगर उसे उकसाया गया तो वह अमेरिका पर परमाणु हमला करने से हिचकेगा नहीं.

दुनिया के किसी भी हिस्से में मिसाइल गिराने की ताकत और तकनीक रखने वाले अमेरिका के लिये नॉर्थ कोरिया अब बड़ा सिरदर्द बन चुका है. उसकी मिसाइलों की रेंज और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता की वजह से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था

इस धमकी के पीछे आधार भी है. नॉर्थ कोरिया के पास इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें होने का दावा किया जाता है. ये मिसाइलें परमाणु हथियार साथ ले जाने में सक्षम हैं. ऐसे में नॉर्थ कोरिया की मिसाइलों की जद में अमेरिका का अलास्का तक आ चुका है. नॉर्थ कोरिया ने इसी साल दो बार ICBM हॉसॉन्ग-14 का कामयाब टेस्ट किया था. इस मिसाइल की रेंज में अमेरिका के कई शहर आ सकते हैं. कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले तीन सालों में नॉर्थ कोरिया की मिसाइलें लॉस एंजिलिस में धमाका करने के लिए तैयार हो जाएंगी.

सियोल पर परमाणु हमले का सबसे बड़ा खतरा

नॉर्थ कोरिया के लिए अमेरिका भले ही दूर मान लिया जाए लेकिन वो देश, शहर और द्वीप जिसमें अमेरिका की जान बसती है उसे कैसे बचाया जा सकेगा?अमेरिकी हमला होने पर नॉर्थ कोरिया जवाबी कार्रवाई करते हुए सबसे पहले दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल को तबाह करेगा. नॉर्थ कोरिया की सीमा से सियोल की दूरी सिर्फ 35 किमी है. नॉर्थ कोरिया की तरफ से पहले ही कुछ घंटों में सैंकड़ों मिसाइलें सियोल पर दागी जा सकती हैं जो इस शहर को पूरी तरह नेस्तनाबूत कर सकती हैं. सियोल में ढाई करोड़ लोग रहते हैं जिन्हें एकदम से बचा पाना मुश्किल होगा. जब तक अमेरिका का एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक्टिव होगा तब तक कई मिसाइलों के धमाके हो चुके होंगे. वहीं अमेरिका के मित्र राष्ट्र होने की वजह से जापान के 13 करोड़ लोगों की जिंदगी पर भी नॉर्थ कोरिया के परमाणु हमले का खतरा बढ़ जाएगा. हमले की शुरुआत में ही सियोल और जापान पर नॉर्थ कोरिया बमों की बरसात कर सकता है.

उत्तर कोरिया से अपनी रक्षा के लिए दक्षिण कोरिया अपने यहां 28,500 अमेरिकी सैनिक रखे हुए हैं. वर्ष 1974 में अमेरिका से हुई संधि के तहत सोल द्वारा अपने स्वयं के परमाणु हथियार बनाने पर प्रतिबंध है. इसके बदले अमेरिका ने उसे संभावित हमलों के खिलाफ ‘परमाणु सुरक्षा कवच’ उपलब्ध कराने की पेशकश कर रखी है.

नॉर्थ कोरिया के पास दुनिया की चौथी बड़ी सेना

उत्तर कोरिया के पास 60 लाख सैनिकों की सेना है जिसका वो भरपूर इस्तेमाल करेगा. माना जाता है कि नॉर्थ कोरिया के पास दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना है. आधुनिक हथियारों के मामले में भी नॉर्थ कोरिया विश्व के ताकतवर देशों के आसपास ही नजर आता है.

मान लिया जाए कि अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई का ही विकल्प रह जाता है तो ऐसे में नॉर्थ कोरिया पर बम गिराने से हालात पड़ौसी देशों के लिए ही बदतर होंगे. नॉर्थ कोरिया पर अमेरिकी बॉम्बिंग से परमाणु विकिरण का सबसे बड़ा खतरा सामने आएगा. रेडियोएक्टिव पदार्थ लीक होने से दक्षिण कोरिया, चीन और जापान बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं.

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यही एक बड़ी वजह है कि दक्षिण कोरिया और जापान भी भीतर से नॉर्थ कोरिया के साथ जंग नहीं चाहते. वो जानते हैं कि सिर से पानी गुजरने पर अमेरिका हमले से हिचकेगा नहीं और अपनी ताकत दिखाने के लिए नॉर्थ कोरिया पर हमला कर सकता है. लेकिन इसके बाद नॉर्थ कोरिया के महाविनाश के हमले में दक्षिण कोरिया और जापान का बचना मुश्किल होगा. न चाहकर भी जापान को उस जंग में कूदना होगा.

परमाणु हमले से हिचकेगा नहीं तानाशाह किम

नॉर्थ कोरिया ने जिस हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया वो नागासाकी पर गिरे बम से पांच गुना ज्यादा शक्तिशाली था. ये नॉर्थ कोरिया का छठा सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण था. ये महाबम बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है. सैकड़ों किलोटन के इस बम के सभी उपकरण नॉर्थ कोरिया ने देश में ही तैयार किए. नॉर्थ कोरिया जब खुद को बुरी तरह घिरता या हारता देखेगा तब ये सोचना बेमानी होगा कि वो परमाणु हमला नहीं करेगा. तानाशाह किम जोंग जब आज दुनिया की परवाह न करते हुए परमाणु परीक्षण करवा रहा है तो जंग के वक्त परमाणु हमला करने में वो देर भी नहीं लगाएगा.

अमेरिका के लिये नॉर्थ कोरिया पर हमला करना एक दूसरी बड़ी वजह से भी आसान नहीं है. नॉर्थ कोरिया और अमेरिका के बीच चीन की दीवार मौजूद है. नॉर्थ कोरिया के साथ चीन एक संधि में बंधा हुआ है. इस संधि के तहत चीन या नॉर्थ कोरिया पर किसी दूसरे देश के हमला करने पर दोनों को ही एक दूसरे की मदद करना होगा. साल 2021 तक ये संधि जारी रहेगी. आज के जो हालात हैं उन्हें देखते हुए अमेरिका चार साल इंतजार करने की हालत में नहीं है. ऐसे में अमेरिका अगर हमला करता है तो चीन का जंग में कूदना मजबूरी होगा और जंग का विश्वयुद्ध में बदलना नियति.

China Military Parade

(फोटो: एपी)

साल 1950 में जब दोनों कोरियाई देशों के बीच जंग हुई थी तब लाखों लोग मारे गए थे. करोड़ों लोग विस्थापित हुए. लेकिन इस बार अगर दोनों देशों के बीच जंग हुई तो करोड़ों लोग मारे जाएंगे और विस्थापितों की तादाद कम होगी. दक्षिण कोरिया और उत्तरी कोरिया से लोग भाग कर चीन की ही तरफ आएंगे. चीन के लिए उन्हें रोक पाना भी मुश्किल होगा. विस्थापन की त्रासदी की अलग तस्वीरें मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने का काम करेंगी.

बहरहाल कोरियाई प्रायद्वीप में एक ‘अज्ञात भय’ धीरे धीरे महायुद्ध की तरफ बढ़ रहा है. विडंबना ये है कि नॉर्थ कोरिया अमेरिकी हमले के डर से खुद को परमाणु संपन्न बना रहा है तो नॉर्थ कोरिया के परमाणु बमों और मिसाइलों के डर से अमेरिका उस पर हमले का शिकंजा कसता जा रहा है. दोनों का डर एक ही है और यही विश्वयुद्ध की कगार पर दुनिया को धकेलने का काम कर रहा है.

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