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भारत-अफगानिस्तान के बीच सीधे एयर कॉरिडोर पर भड़का चीन

भारत और अफगानिस्तान के बीच शुरू हुए इस प्रॉजेक्ट को चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का जवाब मान रहा है

Bhasha Updated On: Jun 26, 2017 04:05 PM IST

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भारत-अफगानिस्तान के बीच सीधे एयर कॉरिडोर पर भड़का चीन

भारत और अफगानिस्तान के बीच 19 जून को शुरू हुए सीधे ‘डेडिकेटेड एयर कॉरिडोर’ को लेकर चीनी मीडिया भड़का हुआ है. चीन सरकार का मुखपत्र माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने इस कॉरिडोर को भारत के 'भू राजनीतिक चिंतन का अक्खड़पन' कहा है. भारत और अफगानिस्तान के बीच शुरू हुए इस प्रॉजेक्ट को चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का जवाब मान रहा है.

पिछले हफ्ते ही इस कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ था. यह एयर कॉरिडोर पाकिस्तान से होकर नहीं गुजरता है. इसे शुरू करने का मकसद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ावा देना और मध्य एशियाई देशों की भारतीय बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाना है.

अभी तक भारत से अफगानिस्तान के बीच व्यापार के लिए जो भी हवाई मार्ग था वो पाकिस्तान से होकर गुजरता था. तनाव के वक्त पाकिस्तान इस हवाई मार्ग को प्रतिबंधित कर देता था. इस वजह से भारत काफी वक्त से अफगानिस्तान के साथ मिलकर ज्यादा भरोसेमंद वैकल्पिक रास्तों को शुरू करने पर काम कर रहा है जो पाकिस्तान से होकर नहीं गुजरता है.

भारत इसके अलावा अफगानिस्तान और ईरान के साथ चाबहार पोर्ट विकसित कर रहा है. समुद्री रास्ते से व्यापार को बढ़ाने और सुदूर देशों तक पहुंच बनाने के लिए इस बंदरगाह को विकसित किया जा रहा है.

चीनी अखबार ने भारत को कहा अक्खड़  

ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख के मुताबिक, 'भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच पहले से प्रस्तावित रूट्स बड़ा सवाल खड़ा करते हैं. क्या भारत पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और दूसरे मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंध विकसित करेगा?'

लेख में कहा गया है कि कनेक्टिविटी बढ़ाने की इन सभी कोशिशों से भारत ने इच्छा जताई है कि वह क्षेत्रीय आर्थिक विकास में साझेदारी बढ़ाना चाहता है. हालांकि, इससे उसकी अक्खड़ क्षेत्रीय और राजनीतिक समझ जाहिर होती है.

लेख में चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर को लेकर भारत के विरोध का भी जिक्र है. भारत इस कॉरिडोर का पुरजोर विरोध कर रहा है. पाक अधिकृत कश्मीर से गुजरने वाले इस इकनॉमिक रूट को लेकर भारत ने अपनी चिंताएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रखी हैं.

लेख में कहा गया है कि भारत हमेशा बेल्ट ऐंड रोड प्रॉजेक्ट का विरोध करता रहा है. अपना कनेक्टिविटी नेटवर्क विकसित करना भारत की सीपीईसी को लेकर जवाबी रणनीति नजर आती है.

लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि तनाव के बावजूद भारत को पाकिस्तान के साथ आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बेहतर करना चाहिए. इसमें लिखा है, 'कोई मायने नहीं रखता कि भारत क्या सोच रहा है? अगर इस देश को वाकई में क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भागीदार बनना है तो उसे उस पाकिस्तान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जो सबसे प्रभावी और सस्ता जमीनी रूट मुहैया करा रहा है.'

लेख में कहा गया है कि चीन का बेल्ट ऐंड रोड प्रॉजेक्ट भारत और पाकिस्तान के बीच सहयोग बढ़ाने का एक मौका है.

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