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सर्वगुण संपन्न प्लूटो से छिना ग्रह का दर्जा, तर्क से धरती पर भी उठे सवाल

इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन प्लूटो को ग्रह मानने से इनकार कर दिया है

Aditya Madanapalle Updated On: Apr 01, 2017 05:58 PM IST

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सर्वगुण संपन्न प्लूटो से छिना ग्रह का दर्जा, तर्क से धरती पर भी उठे सवाल

इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (आईएयू) ने प्लूटो को एक ग्रह मानने से इनकार कर दिया है. इससे पूरी दुनिया के प्लेनेटरी साइंटिस्ट्स में निराशा फैल गई है.

सुदूर स्थित इस ठंडी दुनिया को बौने-ग्रहों की कैटेगरी में डाल दिया गया है. इसकी मुख्य वजह यह है कि प्लूटो कक्षा के बाकी सभी ऑब्जेक्ट्स को पूरा करने में नाकाम रहा है.

एक्सटर्नल फैक्टर्स के मुताबिक, किसी ऑब्जेक्ट को परिभाषित करना विवेकाधीन होता है. एक एंजेल इनवेस्टर माइकल टेन ने पोस्ट ऑन मीडियम में इस बात का संकेत किया है कि इसी लॉजिक से पृथ्वी भी एक ग्रह के दर्जे के योग्य नहीं है.

आईएयू की परिभाषा

पैन-स्टार्स 1 सर्वे में खोजा गया एस्टेरॉयड 2016 एच03 सूर्य के इर्दगिर्द कक्षा में पृथ्वी का साथी है. पृथ्वी इस एस्टेरॉयड को पकड़ने में नाकाम रही और पृथ्वी ऑर्बिट को क्लीयर भी नहीं कर पाई.

इसका मतलब है कि आईएयू की परिभाषा के मुताबिक, पृथ्वी को तकनीकी तौर पर एक ग्रह नहीं माना जा सकता है और हकीकत में यह एक बौना-ग्रह है.

आईएयू की एक ग्रह की परिभाषा यह है- ‘एक खगोलीय वस्तु जो कि (ए) सूर्य के इर्दगिर्द कक्षा में हो, (बी) इसके पास इतना पर्याप्त भार अपने चुंबकत्व के लिए हो कि यह कठोर वस्तु बलों से पार पा जाए ताकि यह एक हाइड्रोस्टेटिक इक्विलिब्रियम (तकरीबन गोलाकार) आकार हासिल कर सके, और (सी) अपनी कक्षा का पड़ोस क्लीयर कर चुकी हो.’

प्लेनेटरी साइंटिस्ट्स के मुताबिक, एक ज्यादा उपयोगी परिभाषा ऑब्जेक्ट के आंतरिक फैक्टर्स पर निर्भर करती है. अगर खगोलीय वस्तु गोल है और जल नहीं रही है, तो यह ग्रह होगी भले ही इसके इर्दगिर्द कुछ भी क्यों न हो रहा हो. नासा के न्यू हॉरिजन मिशन के लीड साइंटिस्ट एलन स्टर्न ने टेक इनसाइडर को बताया कि आईएयू ग्रह की जिस परिभाषा पर फिलहाल चल रहा है वह बकवास है.

पृथ्वी; [तस्वीर रॉयटर्स]

पृथ्वी; [तस्वीर रॉयटर्स]
दूसरे वैज्ञानिक सहमत नहीं

एक्सोप्लेनेट्स के बारे में जानकारी के अभाव के चलते यह परिभाषा काम की नहीं है. दूर मौजूद तारों के इर्दगिर्द कक्षा में ग्रहों को मेजबान तारे की चमक में गिरावट पर निगरानी रखकर खोजना एक चुनौती भरा काम है.

इसी तरीके से 40 प्रकाश वर्ष दूर एक बेहद ठंडे बौने तारे के इर्दगिर्द सात पृथ्वी के आकार के ऑब्जेक्ट्स खोजे गए थे. अब इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन के हिसाब से ट्रैपिस्ट-1 सिस्टम के ऑब्जेक्ट्स को केवल तभी प्लेनेट माना जा सकता है जबकि एक बार यह स्थापित हो जाए कि इन्होंने अपनी कक्षाओं में सभी अन्य ऑब्जेक्ट्स को क्लीयर कर लिया है.

ऐसे में एक ग्रह को ग्रह कहने के लिए इसकी कक्षा में एस्टेरॉयड्स की कमी को भी खोजा जाना भी जरूरी है. यह कितनी बेमतलब की बात है?

एक ग्रह के सभी गुण हैं प्लूटो में

सोलर सिस्टम में प्लूटो और अन्य खगोलीय ऑब्जेक्ट्स का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि प्लूटो एक ग्रह है भले ही आईएयू इसे कैसे भी परिभाषित करे. प्लूटो एक रिमोट, ठंडी दुनिया है और इसमें वे सभी गुण हैं जो कि एक ग्रह में पाए जाते हैं.

जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक किर्बी रूनियन ने एक आसान परिभाषा सुझाई है, ‘एक ऐसी तारकीय वस्तु जिसमें कभी भी न्यूक्लियर फ्यूजन न हुआ हो और इसमें इतना सेल्फ ग्रैविटेशन हो कि यह एक गोलाकार शक्ल अख्तियार कर सके तो इसे पर्याप्त रूप से ग्रह कहा जा सकता है भले ही इसके ऑर्बिटल पैरामीटर कुछ भी हों.’

ग्रहों के अलग-अलग चंद्रमा, और बौने ग्रह सभी ग्रह हैं और सोलर सिस्टम में 100 से ज्यादा ग्रह मौजूद हैं.

नासा भी प्लूटो के ग्रह के दर्जे के हक में

तस्वीर[रायटर्स]

[तस्वीर रॉयटर्स]
नासा समेत अन्य प्लेनेटरी साइंटिस्ट्स प्लूटो को फिर से ग्रह का दर्जा देना चाहते हैं. अगर सैटर्न, यूरेनस और जूपिटर जैसे गैस दिग्गज अपनी खुद की वजह से एक कैटेगरी में नहीं हैं, तो छोटे प्लेनेट्स को अलग तरीके से देखने की क्या जरूरत है?

स्कूल टेक्स्टबुक्स के लिए, वैज्ञानिकों ने ‘आकाश में गोलाकार वस्तुओं जो कि तारों से छोटी हैं’ के लिए परिभाषा प्रस्तावित की है.

ज्यादा अहम चीजों पर फोकस हो

क्या छात्रों को सोलर सिस्टम में मौजूद 110 से ज्यादा प्लेनेट्स के नाम याद करने होंगे? नहीं, इसकी बजाय कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण प्लेनेट्स पर फोकस किया जा सकता है, और सबसे महत्वपूर्ण चीज अलग-अलग जोन में मौजूद अलग प्रकार के ग्रहों के बारे में बताना है.

सूर्य के करीब चट्टानी प्लेनेट्स हैं, इसके बाद गैस जायंट्स आते हैं, फिर सुदूर ठंडे रॉकी बौने-ग्रह भी सोलर सिस्टम में मौजूद हैं.

टेन लिखते हैं, ‘क्या वैज्ञानिक राजनीति छोड़ेंगे, अपनी वैज्ञानिक सोच को फिर से शुरू करेंगे और पूरी दुनिया के बच्चों में साइंटिफिक प्रोसेस को लेकर बने भरोसे को और हम अब तक प्लूटो को एक ग्रह मानते आए हैं उस विश्वास को कायम करेंगे.’

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