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मोबाइल ऐप ने खोले राज, जानिए कैसे सोती है दुनिया

एक शोध के मुताबिक हमारा समाज हमारी नींद को निर्धारित करता है...

Pawas Kumar Updated On: Oct 24, 2016 01:25 PM IST

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मोबाइल ऐप ने खोले राज, जानिए कैसे सोती है दुनिया

दुनिया भर में 30 से 60 साल उम्र के बीच की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा सोती हैं. इसी उम्र के पुरुष कम सोते हैं. वे जरूरी सात घंटों से भी कम नींद लेते हैं.

एक स्मार्टफोन ऐप के जरिए 100 देशों में की गई स्टडी से यह पता चला है.

मिशिगन यूनिवसिर्टी के रिसर्च के मुताबिक, जो लोग कुछ समय रोजाना सूरज की रोशनी में रहते हैं, वे जल्दी सो जाते हैं. ऐसे लोग सूरज की रोशनी में कम वक्त बिताने वालों से ज्यादा सोते हैं.

मिशिगन यूनिवर्सिटी की टीम ने एक मुफ्त ऐप की मदद से 100 देशों के हजारों लोगों की नींद के पैटर्न को परखा. उन्होंने पाया कि स्थानीय लाइफ स्टाइल और कल्चर शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करता है. इसका असर सबसे ज्यादा बिस्तर पर नजर आता है.

सुबह के काम जैसे कार्यालय, घर, बच्चे, स्कूल आदि लोगों के जगने के समय पर गहरा असर डालते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि नींद पर असर डालने के इनके अलावा कई अन्य कारण भी हैं.

Sleep-Bed

मिशिगन विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ लिटरेचर, साइंस एंड आर्ट्स के डेनियल फोर्जर का कहना है, 'सभी देशों में देखा गया कि समाज हमारी नींद को निर्धारित करता है और देर से सोने का नतीजा नींद में कमी के रूप में सामने आता है.'

गणित विभाग की शोध छात्रा ओलिविया वाल्स कहती हैं, 'जितना लोग समझते हैं, नींद उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है. अगर आप रात में छह घंटे भी नींद लेते हैं तो आप नींद की कमी से जूझ रहे हैं.'

हमारे शरीर के अंदर जैविक घड़ी होती है, जो हमारे सोने और जगने के समय को निर्धारित करती है. यह घड़ी चावल के दाने के आकार की होती है, जो आंखों के पीछे 20,000 न्यूरॉन्स का समूह होता है. यह प्रकाश के प्रति संवेदनशील होता है और खासतौर से यह सूरज की रोशनी के प्रति संवेदनशील होता है.

कुछ साल पहले इन्हीं शोधकर्ताओं ने एक ऐप जारी किया था, जिसका नाम ‘एनट्रेन’ था. यह मुसाफिरों को नए टाइम जोन में जाने पर उन्हें समायोजित करता था.

इस ऐप से मिले आंकड़ों से शोधकर्ताओं ने पाया कि सिंगापुर और जापान के लोगों के सोने का राष्ट्रीय औसतन सात घंटे 24 मिनट के आसपास है, जबकि नीदरलैंड के लोगों की नींद का औसत आठ घंटे 12 मिनट है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि हरेक आधे घंटे की नींद हमारे शरीर की प्रणाली और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है.

वाल्स कहती हैं, 'ज्यादा दिनों तक नींद की कमी आपके शरीर पर गहरा असर डालती है।' वे जोर देकर कहती हैं, 'आपकी कार्यक्षमता कम हो जाती है, लेकिन आपको उसका अहसास नहीं होता।'

(एजेंसी के इनपुट्स के साथ)

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