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बिटकॉइन में ली गई फिरौती खर्च नहीं हो सकती तो उसका फायदा क्या है

बिटकॉइन की कीमत काफी तेजी से ऊपर नीचे होती है मगर किसी भी मामले में पैसे कुएं में फेंकने जैसा भी नहीं है

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: May 17, 2017 09:35 AM IST

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बिटकॉइन में ली गई फिरौती खर्च नहीं हो सकती तो उसका फायदा क्या है

दुनिया भर में रैनसमवेयर सायबर हमले 'वॉना क्राई' की खबर इस समय सुर्खियों में है. भारत में भी इसके चलते कुछ समय के लिए बंद किए जा रहे हैं. साथ ही लोगों को सलाह दी जा रही है कि वो फिलहाल ऑनलाइन लेनदेन से बचें.

इस हमले की सबसे खास बात है कि इसकी फिरौती 'बिटकॉइन' में मांगी गई है. बिटकॉइन के साथ कई भ्रम भी जुड़े हुए हैं. आइए इन्हें समझने की कोशिश करते हैं.

गैर कानूनी नहीं है बिटकॉइन

बिटकॉइन ब्लॉक चेन मेथड का इस्तेमाल करता है. ये चेन पूरी तरह से ट्रैक की जा सकती है मगर इस चेन को जिस डार्क वेब पर ब्राउज किया जाता है उसे ट्रैक करना बहुत मुश्किल है. साथ ही साथ बिटकॉइन को करेंसी की मान्यता न देने के चलते इसके रिकॉर्ड्स के लिए कोई साफ नियम हैं ही नहीं.

इस साल 3 मार्च को ऐसोचैम ने दिल्ली में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार करवाया था. इसमें बिटकॉइन और क्रिप्टोग्राफिक करेंसी के कानूनी पहलुओं पर बात की गई थी. बिटकॉइन और सायबर सिक्योरिटी के बारे में हमारे ज्यादातर मीडिया संस्थानों की जानकारी और गंभीरता इस कॉन्फ्रेंस की कवरेज से समझी जा सकती है.

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बिटकॉइन का नाम अक्सर गैर कानूनी कामों से जुड़ता है. मगर बिटकॉइन अपने आप में गैरकानूनी नहीं है. रिजर्व बैंक लेन देन में बिटकॉइन को मान्यता नहीं देता है मगर आपके पास बिटकॉइन होना कोई अपराध नहीं है.

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बिटकॉइन होना कोई अपराधिक गतिविधि नहीं है

पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन इसको स्पष्ट कर चुके हैं. साथ ही इससे जुड़ा एक नोटिस आरबीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

हमारी आपकी सोच से बहुत बड़ा है बिटकॉइन का दायरा

भारत में पिछली बार बिटकॉइन को लेकर चर्चा नोटबंदी के समय हुई थी. जिसमें टेक्नॉलजी और फाइनेंस से जुड़े ज्यादातर पत्रकारों, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना था कि बिटकॉइन कभी पैसे का भरोसे लायक माध्यम नहीं बन पाएगा. क्योंकि इसकी गारंटी लेने के लिए कोई भी सेंट्रल एजेंसी नहीं है.

जैसे हमारे नोटों की गारंटी रिजर्व बैंक लेता है, डॉलर के पीछे अमेरिकी सरकार का भरोसा होता है, बिटकॉइन के पीछे कोई सरकार या एजेंसी नहीं है. सिद्धांत के रूप में ये बात सुनने में बिटकॉइन के खिलाफ जाती है मगर व्यवहारिक रूप में पूरी तरह से ऐसा नहीं है.

बिटकॉइन की कीमत काफी तेजी से ऊपर नीचे होती है मगर किसी भी मामले में पैसे कुएं में फेंकने जैसा भी नहीं है. साथ ही हमें याद रखना चाहिए कि बिटकॉइन आम आदमी के लिए है भी नहीं. इसे सरल तरीके से समझने की कोशिश करते हैं.

बिटकॉइन की कीमत डिमांड और सप्लाई के आधार पर तय होती है. और अगर किसी चीज के लिए डिमांड जरूरत से ज्यादा हो और सप्लाई कम होती जाए तो उसकी कीमत बढ़ेगी.

बिटकॉइन दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग का सबसे सेफ तरीका है. आप हिंदुस्तान में बैठे-बैठे अपने अकाउंट के पैसे बिटकॉइन वॉलेट में डाल सकते हैं. और किसी भी टैक्स हैवेन देश में जाकर उन्हें डॉलर में बदल सकते हैं. अमेरिका के लास वेगास के कसीनो में भी आपको बिटकॉइन एटीएम लगे मिल जाएंगे.

बिटकॉइन को आम लेन देन में मान्यता न मिलना ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. इसे कानूनी मान्यता देने पर इसको लेकर काफी नियम-कायदे बनाने होंगे जो कहीं न कहीं इसके वर्तमान रूप को बदल देंगे. जब तक ऐसा नही होता है बिटकॉइन बड़े निवेशकों और हवाला कारोबारियों की पसंद बना रहेगा.

अगर किसी ब्यूरोक्रैट को रिश्वत देने के लिए उसको कोई कंपनी बिटकॉइन वॉलेट में पैसा दे तो क्या हमारा सिस्टम इसे पकड़ पाएगा? कुल मिलाकर जब तक बिटकॉइन अवैध कारोबार की मुद्रा बनी रहेगी इसकी कीमत बढ़ती रहेगी.

बिटकॉइन को खर्च कहां करेंगे?

बिटकॉइन को डार्क वेब पर एक अकाउंट से दूसरे में भेजकर या सिल्करोड जैसी किसी .ऑनियन वेबसाइट पर हथियार या ड्रग्स खरीदने में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे डॉलर जैसी करेंसी में बदल कर आम मुद्रा की तरह भी खर्च किया जा सकता है.

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ठीक वैसे ही जैसे स्विस अकाउंट में रखे गैरकानूनी पैसे कानूनी बनाकर खर्च किए जाते हैं. मगर हैकर बिटकॉइन का इसलिए इस्तेमाल नहीं करते है कि इससे सब्जी मंडी जाकर दो किलो आलू खरीदें. (हालांकि कुछ देशों में आप ऐसा कर सकते हैं)

आर्थिक मामलों से जुड़े कुछ लोग बताते हैं कि पिछले 2-3 सालों में शेयर मार्केट में जब भी भारी बिकवाली हुई है. बिटकॉइन की कीमत बढ़ी है. इससे जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि ये महज एक संयोग नहीं हो सकता है.

शेयर मार्केट में किसी भी शेयर के बढ़ने घटने के पीछे कई कारण होते हैं. हो सकता है कि ये भी उनमें से एक हो. वैसे शेयर मार्केट में भी शेयर की कागज पर कीमत और एक्सचेंज में उसकी मांग पर कीमत का सिस्टम भी तो कुछ-कुछ डिमांड और सप्लाई जैसे सिस्टम पर टिका हुआ है.

ताजा हमला और बिटकॉइन में फिरौती का मतलब

अभी ये रैनसमवेयर जिस तरह की फिरौती मांग रहा है वो छोटा अमाउंट (300 $ प्रति व्यक्ति)  है. साथ ही इसको लेने का तरीका भी बचकाना है. फिरौती तभी कारगर होती है जब आप उसको कैश करवा सकें. मतलब आपकी जेब में कितने भी नोट पड़े हों अगर आप इसे खर्च नहीं कर सकते तो ये बेकार हैं.

बिटकॉइन के आम करेंसी में बदलवाने वाले ट्रांजैक्शन पूरी तरह से ट्रेस किए जा सकते हैं. इसका मतलब ये है कि जिन भी हैकर ने ये पैसा बिटकॉइन में लिया है वो फिलहाल इसे सामान्य तरीके से खर्च नहीं कर पाएंगे. अगर करेंगे तो पकड़े जाएंगे. मगर बिटकॉइन के साथ एक ट्विस्ट और भी है.

जिस तेजी से इसकी कीमत बढ़ रही है, इसे अगले कुछ सालों के लिए बचाए रखना किसी को भी बहुत अमीर बना सकता है. 2010 में एक हजार बिटकॉइन के बदले में एक पित्जा खरीदा गया था.

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अभी एक बिटकॉइन की कीमत लगभग एक लाख सात हजार रुपए है और अनुमान है कि 2018 तक ये लगभग 6 लाख रुपए हो जाएगी. इसके साथ ही अगर वो लोग इसे ड्रग्स और हथियार जैसी चीजों में खर्च करते हैं तो उसे पकड़ना काफी मुश्किल होगा.

अगर इस हमले को बड़ी चीजों के लिए किया जाए तो ये किसी मिसाइल हमले से ज्यादा खतरनाक होगा. मिसाल के तौर पर ‘बाहुबली’ जैसी किसी फिल्म के सारे प्रिंट रिलीज से ठीक पहले हैक कर लिए जाएं तो प्रोड्यूसर से करोड़ों रुपए लिए जा सकते हैं.

किसी देश का मिसाइल सिस्टम लीक करने की धमकी देकर सरकार से पैसा मांगा जा सकता है. चरम स्थिति की कल्पना करें तो किसी देश के शेयर मार्केट या बड़े बैंक के सर्वर को हैक करने का मतलब होगा कि वहां की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ले आना.

अंत में एक बार फिर, बिटकॉइन एक डी सेंट्रलाइज क्रिप्टोग्राफिक करेंसी है. इसकी माइनिंग होती है और दुनिया में इसको रिलीज करने की क्षमता निश्चित है. इसका एक नया पैरलल सिस्टम है जो अपनी कुछ खूबियों के कारण काले धंधों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

इसे पूर्वाग्रहों से हटकर समझने और नियमों में बांधने की जरूरत है. यदि हम इसे पहले की तरह हल्के में लेते आए तो आने वाले समय में ये भारी पड़ सकता है.

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