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साइबर हैकिंग: सरहदों की तरह डिजिटल संपत्ति की हिफाजत भी जरूरी

विदेशी हैकरों से साइबर संपत्तियों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए सरकार

R Swaminathan | Published On: Dec 16, 2016 02:16 PM IST | Updated On: Dec 16, 2016 02:19 PM IST

साइबर हैकिंग: सरहदों की तरह डिजिटल संपत्ति की हिफाजत भी जरूरी

आपको सितंबर का उरी आतंकी हमला याद होगा. उस हमले के बाद तीन सवाल उठे थे.

पहला सवाल ये कि क्या हम सॉफ्ट स्टेट हैं? मतलब हम इतने सीधे हैं कि कोई भी हमें मारकर चला जाएगा और हम बर्दाश्त कर लेंगे.

दूसरा सवाल ये कि जब हमारे देश की संपत्ति और लोगों पर हमला होगा तो हम क्या बैठकर नाखून चबाते रहेंगे?

तीसरा सवाल ये कि क्या हम इतने कमजोर हैं कि हम ऐसा करने वालों को सबक नहीं सिखा सकते?

खुद की रक्षा करने का शानदार रिकॉर्ड

कुछ अपवादों को छोड़ दें तो इन तीनों ही सवालों के जवाब ना में मिलते हैं. हमारा खुद की रक्षा करने का शानदार रिकॉर्ड है.

भारत गणराज्य में बर्दाश्त करने की काफी ताकत है. आखिर हम एक लोकतांत्रिक देश हैं. लेकिन जब हम ठान लेते हैं तो दुश्मन को ऐसा सबक सिखाते हैं जो वो बरसों तक याद रखता है.

सितंबर के आखिरी हफ्ते में नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक इसकी अच्छी मिसाल है. भारत को उरी हमले का बदला लेने में सिर्फ तीन हफ्ते का वक्त लगा था.

लेकिन अगर मैं कहूं कि अक्टूबर में हमारे बैंकों में हुए साइबर हमले को याद रखें, तो आप ये पूछेंगे कि कौन सा हमला? किसी को याद भी नहीं होगा कि अक्टूबर में क्या हुआ था.

अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में, सर्जिकल स्ट्राइक के करीब तीन हफ्ते बाद स्टेट बैंक और एक्सिस बैंक पर साइबर अटैक हुआ था.

Axis-Bank

ये हमला एक वाइरस के जरिए किया गया था. निश्चित रूप से ये हैकरों के संगठित गिरोह ने किया था. इस हमले में दस लाख से ज्यादा खातों की जानकारी लीक हो गई थी.

स्टेट बैंक को अपने ग्राहकों को 6 लाख नए डेबिट कार्ड जारी करने पड़े थे. अगर इसकी किसी आतंकी हमले से तुलना करें तो कुछ ऐसा होगा कि फिदाइन आतंकवादी, मशीनगन और राइफलों के साथ एक के बाद एक स्टेट बैंक और एक्सिस बैंक की शाखाओं पर हमला करके कत्ल-ए-आम मचा दें, उनके खजाने से लूटपाट कर लें.

अब मैं वही तीन सवाल आपसे करना चाहूंगा जो मैंने उरी आतंकी हमले के संदर्भ में किए थे. क्या हम हैकर्स को रोजाना अपने ऊपर साइबर अटैक करने देते हैं और इसे बर्दाश्त करते रहते हैं? क्या हम कमजोर हैं?

हैकर्स ने लगभग 50 हमले किये

कुछ अपवादों को छोड़ दें तो इस बार तीनों ही सवालों के जवाब हां में होंगे. अक्टूबर के साइबर अटैक के बाद भारतीय आईटी कंपनियों पर हैकर्स ने करीब 50 हमले किये थे.

Hacking

ये सारे हमले पाकिस्तान में बैठे हैकर्स ने किए थे. पाकिस्तानी हैकर्स के एक ग्रुप, D4RJ4NG31 ने नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल की वेबसाइट पर हमला किया और चुनौती दी कि हम अपने देश को उसके हमलों से बचा सकें तो बचा लें.

उसने ये भी लिखा कि भारतीय सेना ने सीमा पर युद्ध विराम तोड़ने को सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दे दिया है. हैकर्स ने भारत को साइबर वार में जीतने की चुनौती दी. वो हैकर सही हैं. भारत साइबर जंग झेल रहा है.

क्या आपको अब भी इस बात पर शक है? अगर ऐसा है तो आपसे एक सवाल करता हूं? आपको क्या लगता है कि भारत की बेहद गुप्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों से जुड़ी गोपनीय जानकारियां ऑस्ट्रेलिया की मीडिया के पास पहुंच गई?

भारत के खिलाफ छेड़ा जंग 

हाल के दिनों में लीजन नाम के हैकर समूह का कुछ लोगों के खातों की हैकिंग तो एक छोटी सी मिसाल है. बिना खून बहाए, हैकर ये जंग भारत के साथ छेड़े हुए हैं.

आखिर क्या है कि बार-बार के साइबर हमलों के बावजूद हमारा खून नहीं खौलता. इसलिए क्योंकि इन हमलों में किसी की जान नहीं जाती? या फिर हम अपनी डिजिटल संपत्ति को राष्ट्रीय संपत्ति नहीं मानते?

इन संपत्तियों की भी ठीक वैसे ही हिफाजत की जानी चाहिए जैसे हम अपनी सरहद, जमीन और नागरिकों की सुरक्षा करते हैं.

भारत तेजी से डिजिटल राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है. हमारे बैंक, रेलवे, सरकारी कामकाज समेत तमाम सेवाएं आज डिजिटल और ऑनलाइन हो रही हैं. ऐसे में ये भी हमारी राष्ट्रीय संपत्ति बनती जा रही है. इनकी सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है.

Hacker

कोई भी साइबर हमला तमाम तरह से किया जा सकता है. जैसे कि वायरस के जरिए हमारी पावर ग्रिड को ठप कर देना. जैसा कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान के एटमी प्लांट पर वायरस अटैक के जरिए किया था.

बरसों से हम अपनी साइबर संपत्ति और इसकी सुरक्षा की अनदेखी करते रहे हैं. इनकी सुरक्षा को हम कुछ खास कंप्यूटर या सिस्टम की सुरक्षा समझकर इसे जैसे-तैसे निपटाते रहे हैं. लेकिन साइबर हमला इससे आगे बढ़कर है.

कई बार हमें ये भी बताया जाता है कि साइबर सुरक्षा के नाम पर सरकार और बड़ी कंपनियां समाज और राजनीति पर कब्जे की कोशिश में हैं. इसमें कुछ सच्चाई हो सकती है. लेकिन हमें साइबर सुरक्षा को बड़े नजरिए से देखना होगा. यानि हमें अपनी डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा को और गंभीरता से लेना होगा.

साइबर सुरक्षा के लिए बनाई संस्था

भारत ने नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एनटीआरओ) के नाम से साइबर सुरक्षा के लिए एक संस्था बनाई है.

ये संस्था विदेशी खुफिया एजेंसी रॉ के अंदर आती है. मगर सरकार के और संगठन इसके कार्यक्षेत्र में दखल देते रहते हैं. खुद इसके काम को लेकर भी सरकार ने तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं की है.

एनटीआरओ को हमारे रिमोट सेंसिंग समेत दूसरे डिजिटल डेटा जैसे क्रिप्टोलॉजी सिस्टम, रणनीतिक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है. लेकिन इस संस्था की ऑटोनोमी पर ही स्थिति साफ नहीं.

सरकार को पता है कि चीनी और पाकिस्तानी हैकर लगातार हमले कर रहे हैं.

Cyber hacker 2

सुरक्षा के बेहतर इंतजाम करें

एनटीआरओ की जिम्मेदारी सही तरीके से तय नहीं की गई है. एनटीआरओ ने एथिकल हैकर्स की अपनी टीम जरूर बना ली है. लेकिन अब समय आ गया है कि हम अपनी साइबर संपत्तियों की सुरक्षा के बेहतर इंजताम करें.

भारत तेजी से डिजिटल ताकत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. वक्त आ गया है जब हमें साइबर दुनिया को युद्ध का नया मोर्चा समझकर इससे लड़ने की ताकत जुटानी और बढ़ानी चाहिए.

ये सही समय है जब देश की डिजिटल संपदा को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए. और उसकी सुरक्षा के सारे जरूरी उपाय किए जाएं.

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