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गूगल की रिसर्च टीम ने बनाई ऐसी आवाज जो इंसानों ने कभी नहीं सुनी होगी

18वीं और 20वीं सदी के इन दो वाद्ययंत्रों की कुछ जुगलबंदी सी है ये आवाज.

FP Staff | Published On: May 16, 2017 09:16 AM IST | Updated On: May 16, 2017 09:23 AM IST

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गूगल की रिसर्च टीम ने बनाई ऐसी आवाज जो इंसानों ने कभी नहीं सुनी होगी

सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि क्या ऐसी भी कोई आवाज हो सकती है जो जीवन के हजारों सालों के इतिहास में इंसानों ने अब तक सुनी ही न हो, पर ऐसा सच में हुआ है. wired.com की मानें तो, गूगल के रिसर्चरों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए एक ऐसी आवाज तैयार की है जो इंसानों ने कभी नहीं सुनी होगी.

गूगल का नया कमाल!

गूगल की रिसर्च टीम के जेसी एन्गेल और सिन्जोन रेस्निक गूगल के मैजेंटा टीम के सदस्य हैं, यह एक छोटी सी टीम है जो अपना आर्ट तैयार कर सकती है. एन्गेल और रेस्निक ने एक ऐसा इंस्ट्रूमेंट तैयार किया है जिसकी ध्वनि एकदम अलग है. इस इंस्ट्रूमेंट की आवाज 18वीं सदी के क्लाविकोर्ड (पियानो का शुरुआती प्रकार) और 20वीं सदी के हैमंड ऑर्गन के बीच की आवाज की तरह है. हालांकि, यह दोनों इंस्ट्रूमेंट को एक साथ बजाने पर आने वाली आवाज नहीं है, यह काफी अलग है.

यह मशीन और इसका सॉफ्टवेयर दोनों इंस्ट्रूमेंट्स की आवाज को एक-दूसरे के साथ लेयर नहीं करती है. यह आवाज अपने आप में एकदम अलग है. दरअसल, यह आवाज दोनों इंस्ट्रूमेंट्स के नोट्स के मैथेमैटिकल कैरेक्टरिस्टिक (गणितीय विशेषता) का इस्तेमाल कर तैयार की गई है. इतना ही नहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वे वायलिन से लेकर गिटार तक कई अन्य वाद्ययंत्रों के नोट्स से कई तरह की नई आवाजें तैयार कर सकते हैं.

मूगफेस्ट में होगा प्रदर्शन

एन्गेल और रेस्निक ने इस इंस्ट्रूमेंट को एनसिंथ (NSynth) नाम दिया है, वे इस तकनीक को इस सप्ताह के अंत में नॉर्थ कैरोलिना के दुरहम में होने वाले मूगफेस्ट में प्रदर्शित करेंगे. यह एक आर्ट, म्यूजिक और टेक्नोलॉजी फेस्टिवल है जिसका आयोजन हर साल अलग-अलग शहरों में किया जाता है.

एनसिंथ की मदद से संगीतकारों को कई नए टूल्स उपलब्ध होंगे, जिनसे वे संगीत बना सकेंगे. इलेक्ट्रॉनिक संगीत पर लिखने वाले मार्क वेडेंबॉन ने कहा कि दो वाद्ययंत्रों की आवाजों को मिलाना कोई नई चीज नहीं है, ऑर्केस्ट्रा कंडक्टर की मदद से यह सदियों से होता आया है, हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि गूगल की इस तकनीक से इस सदियों पुराने तरीके को नई पहचान मिलेगी. उन्होंने कहा कि इससे बेहतरीन संगीत तैयार होगा और चूंकि यह गूगल का है तो लोग इसे जरूर फॉलो करेंगे.

ऐसे तैयार हुआ यह खास इंस्ट्रूमेंट

मैजेंटा गूगल के सेंट्रल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब का एक हिस्सा है. जहां रिसर्चरों की एक छोटी सी टीम न्यूट्रल नेटवर्क और मशीन की लिमिट्स को एक्सप्लोर करती हैं.

न्यूट्रल नेटवर्क असल में कठिन गणितीय सिस्टम है जो किसी टास्क को परफॉर्म करने के लिए बड़ी मात्रा में डाटा को एनालाइज करता है. पिछले कुछ सालों में न्यूट्रल नेटवर्क ने चीजों को पहचानने, तस्वीरों में चेहरों को पहचानने, स्मार्टफोन के जरिए दिए गए वॉइस कमांड को समझने, एक भाषा को दूसरे में ट्रांसलेट करने जैसी चीजों में अपनी काबिलियत साबित की है. अब टीम मैजेंटा एनसिंथ के साथ इस दिशा में काम कर रही है कि मशीनों को नई तरह का संगीत बनाने के लिए कैसे तैयार किया जा सकता है.

एनसिंथ के लिए एन्गेल और उनकी टीम ने हजारों अलग-अलग वाद्ययंत्रों के नोट्स कलेक्ट किए और उन्हें न्यूट्रल नेटवर्क में फीड किया. न्यूट्रल नेटवर्क में कम्प्यूटर चिप्स के जरिए कई तरह के गुणा-भाग के बाद इन नोट्स को एनालाइज किया गया. इसके बाद न्यूट्रल नेटवर्क ने हर इंस्ट्रूमेंट की ऑडिबल विशेषता को समझा और फिर हर इंस्ट्रूमेंट के लिए एक गणितीय वेक्टर तैयार किया. इन वेक्टरों की मदद से मशीन हर इंस्ट्रूमेंट की आवाज निकाल सकता है.

डिजाइन की एक और तकनीक

एनसिंथ के साथ-साथ एन्गेल ने हाल ही में गूगल हेडक्वार्टर में एक टू-डायमेंशनल इंटरफेस का डेमोंस्ट्रेशन दिया. इस इंटरफेस के जरिए चार अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स के बीच के ऑडिबल स्पेस को एक साथ एक्सप्लोर किया जा सकता है. यह टीम इस आइडिया पर और अधिक काम कर रही है ताकि इसका इस्तेमाल आर्टिस्टिक क्रिएशन में किया जा सके.

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