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फेसबुक ने फेक न्यूज के खिलाफ कमर कसी

फेसबुक जर्नलिज्म प्रोजेक्ट का मकसद फेसबुक और न्यूज इंडस्ट्री के बीच मजबूत रिश्ते कायम करना है.

FP Tech | Published On: Jan 28, 2017 08:59 AM IST | Updated On: Jan 28, 2017 08:59 AM IST

फेसबुक ने फेक न्यूज के खिलाफ कमर कसी

सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता के साथ कुछ नई समस्याएं भी पैदा हुई हैं. फेक न्यूज यानी फर्जी खबरें इन्हीं में से एक है. सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी फर्जी खबरें चलती है जिन्हें लोग असली समझ लेते हैं. दुनिया के कई हिस्सों में फेक न्यूज के कारण हिंसा और नफरत फैलाने के मामले सामने आए हैं.

पिछले साल अमेरिका में एक व्यक्ति ने हिलेरी क्लिंटन के बारे में झूठी खबर पढ़ कर गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया तो इंडोनेशिया में चीनी हमले की तैयारी की खबर उड़ गई जिसके बाद जकार्ता में चीन के दूतावास को सफाई देनी पड़ी. कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि इंटरनेट पर फर्जी खबरों की बाढ़ की वजह से ही ट्रंप को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतने में मदद मिली. लेकिन अब फेसबुक ने फेक न्यूज के खिलाफ कमर कस ली है.

ट्रेनिंग देने और खास टूल

फेसबुक जर्नलिज्म प्रोजेक्ट एक पहल है जिसका मकसद फेसबुक और न्यूज इंडस्ट्री के बीच मजबूत रिश्ते कायम करना है. फेसबुक खबरें प्रकाशित करने वालो के लिए नए कंटेट फॉर्मेट लाने जा रहा है और आजकल इन्हें टेस्ट करने की प्रक्रिया में है. पत्रकारों को ट्रेनिंग देने और उनके लिए खास टूल बनाने की तैयारी हो रही है. फेसबुक ऐसे कदम उठा रहा है जिनसे फेक न्यूज से निपटना जा सके.

इसके तहत स्पैम फैलाने वालों को होने वाले आर्थिक फायदों पर चोट करने की कोशिश हो रही है. फेसबुक ने ऐसा प्रोग्राम लॉन्च किया है जिसमें तथ्यों की जांच करने में थर्ड पार्टी संगठनों की मदद ली जाएगी. इसका मकसद फेसबुक पर फर्जी खबरें फैलाने वालों की पहचान करना है. फेसबुक ऐसे फीचर भी लाने वाला है जिनकी मदद से यूजर के लिए फर्जी खबरों के बारे में रिपोर्ट करना आसान होगा. फेसबुक का मानना है कि फेक न्यूज किसी एक खास प्लेटफॉर्म की समस्या नहीं है.

जागरूकता पर जोर

इस पर लगाम कसने के लिए फेसबुक ने जो अन्य कदम उठाए हैं उनमें सार्वजनिक विज्ञापनों की एक सिरीज निकालना भी शामिल है. इनके जरिए लोगों को बताया गया है कि वे खबरों को किस तरह जांच परख कर इस्तेमाल करें. अपने किसी पूर्वाग्रह की वजह से फेसबुक पर फर्जी खबरों को आगे बढ़ाने वाले यूजर भी उतने ही दोषी हैं जितना इस तरह की खबरों को सोशल मीडिया पर डालने वाले.

आम लोगों को जागरूक करने के लिए विज्ञापन ‘द न्यूज लिटरेसी प्रोजेक्ट’ के साथ मिलकर तैयार किए जाएंगे. द न्यूज लिटरेसी प्रोजेक्ट एक खास परियोजना है जिसके तहत बच्चों को तथ्यों और खबरों के बारे में जागरूक बनाया जाता है. फेसबुक ने कहा है कि उसका दीर्घकालीन लक्ष्य समाचार संस्थाओं के साथ मिलकर खबरों को लेकर जागरूकता बढ़ाना है. फेसबुक ने कहा है कि अगर पाठकों के बीच ऐसी जागरूकता बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता देने की जरूरत भी पड़ी तो वह उससे भी पीछे नहीं हटेगा.

फेसबुक का दायरा

फेसबुक ‘फर्स्ट ड्राफ्ट पार्टनर नेटवर्क’ का हिस्सा है, जो सोशल मीडिया से खबरें लेने से जुड़े नियम कायदे बनाता है. इस नेटवर्क में लगभग 80 पब्लिशर हैं और फेसबुक इस नेटवर्क को एक वर्चुएल वेरिफिकेशन कम्युनिटी बनाने में मदद करेगा. पत्रकारों को कई बार सोशल मीडिया प्लेटॉर्म्स पर यूजर्स से ब्रेकिंग न्यूज मिलती है, खासकर माइक्रो ब्लॉगिग साइट ट्विटर पर. किसी भी खबर को छापने से पहले जरूरी है कि उसकी पुष्टि कर ली जाए ताकि कोई गलत जानकारी न फैले.

वेरिफाइड यूजर छानबीन करेंगे और जिन तस्वीरों, वीडियो, फोटो या दावों पर सवाल उठ रहे हैं उनकी पुष्टि की जाएगी. इस पहल के साथ ट्विटर, एएफपी, द न्यूयॉर्क टाइम्स, सीएनएन, वॉशिंगटन पोस्ट और रॉयटर्स जैसे पार्टनर जुड़े हैं. फेक न्यूज पर नियंत्रण करने से मीडिया संस्थानों का तो फायदा होगा ही, लेकिन फेसबुक का बहुत फायदा है. असल में न्यूज पब्लिशिंग सेक्टर में फेसबुक की धाक जमती जा रही है. फेसबुक का दायरा अब एक सोशल मीडिया वेबसाइट से परे जाकर विस्तार ले रहा है. इसका दखल अब संस्कृति, मीडिया और प्रशासन में भी बढ़ रहा है.

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