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कैशलेस सोसायटी बनाना इतना भी मुश्किल नहीं

आपके पास इंटरनेट कनेक्शन वाला स्मार्टफोन है तो ठीक और नहीं है तो भी काम नहीं रुकेगा.

Rehan Hooda | Published On: Dec 05, 2016 07:49 AM IST | Updated On: Dec 05, 2016 08:28 AM IST

कैशलेस सोसायटी बनाना इतना भी मुश्किल नहीं

जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का एलान किया है तब से 'कैशलेस' यानी बिना नगदी वाले समाज की तरफ ले जाने पर बहुत कुछ लिखा गया है. कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार और कालेधन को जड़ से खत्म करना है तो हर किसी के लिए कैशलेस व्यवस्था को अपनाना कितना जरूरी है.

एक तरफ, इसे दूरगामी परिणामों को लेकर बहस छिड़ी है दूसरी ओर यह सवाल भी है कि क्या मौजूदा तकनीकी ढांचे के बुनियाद पर कैशलेस व्यवस्था खड़ी करना सही रहेगा. आम तौर पर माना जाता है कि तेजी से ‘कैश’-लेस हो रही दुनिया में एक महंगे स्मार्टफोन के बिना आपकी गाड़ी नहीं चल सकती.

चलिए हम कैशलेस समाज से जुड़ी आपकी ज्यादातर धारणाओं को छूमंतर कर देते हैं. आपको बताएंगे कि कैसे सिर्फ पेटीएम ही इकलौता विकल्प नहीं है. आरबीआई और बड़े बैंकिंग संस्थानों ने तकनीकी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में जबरदस्त काम किया है ताकि समाज पर नगदी के अभाव से पड़ने वाले असर को कम किया जा सके.

पेटीएम और इस तरह की वॉलेट सर्विस आजकल खूब चर्चा में है. धीरे धीरे लोगों के बटुए हल्के हो रहे हैं. सोच भी बदल रही है. वरना पहले तो ज्यादातर घरों में बैकिंग या पैसे से जुड़ी बात पर ‘ऑनलाइन’ शब्द सुनते ही कान खड़े हो जाते थे. हम समाज के सभी अलग-अलग वर्गों की बात करेंगे कि वे कैसे कैशलेस और डिजिटल अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ सकते हैं, वो भी अपना ज्यादा कैश निवेश किए बिना (जो आजकल मिलना वैसे ही मुश्किल है.)

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस

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Source: Getty Images

सबसे बढ़िया हल हो सकता है यूपीआई, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने लिंक्डइन पोस्ट में किया था. यूपीआई का मतलब है यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस. इसके जरिए लोग एक बैंक के हल्के-फुल्के ऐप से आसानी से पैसा भेज सकते हैं. ऐप से पैसा भेजा भी जा सकता है और प्राप्त भी किया जा सकता है.

एनपीसीआई ने इस सिस्टम की घोषणा अप्रैल में की थी. उसके बाद भी बड़े बैंक आंतरिक तौर पर इस तकनीक को टेस्ट करते रहे हैं. मैंने भी अपना यूपीआई सिस्टम सेट करने की कोशिश की और इसे सेट करना और चलाना आसान है. इसके लिए सबसे पहले आपका मोबाइल नंबर बैंक में रजिस्ट्रर होना चाहिए. अगर आपने अभी तक रजिस्ट्रर नहीं कराया है तो अपना मोबाइल नंबर किसी भी एटीएम या बैंक में जाकर रजिस्टर करा सकते हैं.

अगला कदम है कि अपने बैंक का ऐप इंस्टॉल करना, जो यूपीआई को सपोर्ट करता हो. इसे इंस्टॉल करने के बाद आपको अपना मोबाइन नंबर एंटर करना है जो आपके खाते की पुष्टि करेगा और उसका ब्यौरा हासिल करेगा. इसके बाद आपके फोन की स्क्रीन पर बैंक के एप में एक यूनिक आईडी सेट करने को कहा जाएगा. यह यूनिक आईडी इस फॉर्मेंट में होती है: ‘<username>@<nameofthebank>’.

मान लीजिए मेरा खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में है, तो मेरी आईडी हो सकती है rehan@sbi. फिर इस आईडी का इस्तेमाल पैसे भेजने और प्राप्त करने के लिए हो सकता है.

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इसके बाद स्क्रीन पर लिमिट सेट करने के विकल्प आएंगे. आपसे पूछा जाएगा कि ट्रांजेक्शन की फ्रीक्वेंसी और टोटल लिमिट क्या हो. इसके साथ ही यूपीआई कोड या एमपिन सेट करने का विकल्प भी आएगा. अलग-अलग बैंकों और उनके एप के हिसाब से किसी में इसे यूपीआई कोड कहते हैं और किसी में एमपिन.

बैंक के ऐप के लिए किसी भारी भरकम महंगे फोन की जरूरत नहीं है. उन्हें किसी बुनियादी और सस्ते स्मार्टफोन पर भी आराम से चलाया जा सकता है. इस पूरे ट्रांसफर के लिए बुनियादी इंटरनेट कनेक्शन और रीयर (फोन के पीछे वाले) कैमरे की जरूरत है ताकि ऐप से जेनेरेट होने वाले क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सके. इस सिस्टम से आप अपना बैलेंस चेक सकते हैं, उसी बैंक के अपने दूसरे खातों का लेन देन कर सकते हैं और यहां तक कि टैक्स ब्यौरे के स्टेटस भी देख सकते हैं.

ई-वॉलेट यानी ई-बटुआ

दूसरा समाधान है ई-वॉलेट जो आजकल के नौजवानों और पढ़े लिखे लोगों में बहुत लोकप्रिय है. इन ई-वॉलेट्स में पेटीएम, फ्रीचार्ज, ओला मनी, एयरटेल मनी और जियो मनी से लेकर आईएसआईसीआई का पॉकेट्स और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एसबीआई बडी तक शामिल हैं. ज्यादातर ई-वॉलेट्स उतने हल्के नहीं है जितने बैंकों के यूपीआई ऐप होते हैं.

atm

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लेकिन इनमें सुविधाएं ज्यादा होती है. आपको ऐप डाउनलोड करना है, रजिस्टर करना है और फिर अपने क्रेटिड कार्ड, डेबिट कार्ड या फिर नेट बैंकिंग के जरिए उस ऐप में कुछ पैसे डालने हैं.

एक बार आपने उसमें पैसे डाल दिए, उसके बाद तो इसे कई तरह की सर्विस पाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. आप फूड्स स्टॉल से लेकर किराना स्टोर, मूवी हॉल, रेस्त्रां और टैक्सी तक के बिल का पेमेंट इसके जरिए कर सकते हैं. डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड चलने भी बंद नहीं हुए हैं. जहां कहीं भी कार्ड से पेमेंट स्वीकार किया जाता हो, वहां उन्हें इस्तेमाल करें.

आधार-लिंक्ड पेमेंट

तीसरे समाधान की बहुत ज्यादा बात नहीं होती. यह है आधार कार्ड वाली पेमेंट व्यवस्था जिसमें आप पेमेंट करने के लिए अपना आधार कार्ड इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए पहले आपको अपना आधार कार्ड बैंक खाते से जोड़ना होगा.

Debitcard

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एक बार खाता आधार से लिंक हो जाए तो इसका इस्तेमाल पैसे भेजने, बैलेंस चेक करने, नगदी जमा करने और निकालने के साथ साथ दूसरे बैंकों के साथ लेने देन में हो सकता है. इसके लिए तो आपको स्मार्टफोन या क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड की भी जरूरत नहीं है.

*99# या यूएसएसडी पेमेंट सिस्टम

अंतिम समाधान है यूएसएसडी पेमेंट सिस्टम जिसका मतलब है अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा. यह सिस्टम पूरी तरह मौजूदा एसएमएस सिस्टम पर चलता है. इसके लिए आपको किसी स्मार्टफोन की जरूरत नहीं है. यह सस्ते से सस्ते साधारण फीचर फोन पर भी बढ़िया काम करता है.

बस आपको अपना नंबर बैंक खाते से जोड़ना होगा और फिर सर्विस शुरू करने के लिए *99# डायल करें. यह आपको अपने बैंक के पहले पहले तीन अक्षर या आईएफएस कोड के पहले चार अक्षर एंटर करने का विकल्प देगा. पैसे भेजने या बैलेंस देखने के विकल्पों को चुनिए. यह आपसे उस आदमी का मोबाइल नंबर और एमएमआईडी मांगेगा जिसे पैसे भेजे जा रहे हैं. आप फिर राशि और एमपिन के साथ साथ खाते के अंतिम चार अंक भरते हैं.

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तो ये थे वो सारे समाधान, जिनका फायदा आप उठा सकते हैं. आपके पास इंटरनेट कनेक्शन वाला स्मार्टफोन है तो ठीक है, और नहीं है तो भी आपका काम नहीं रुकेगा. बस कोई भी सस्ता से सस्ता साधारण फोन चलेगा.

हां, उसमें पैसे हों और एसएमएस सर्विस हो. और कोई भी फोन नहीं है, तो आधार कार्ड जिंदाबाद. कुछ लोगों को कैश से कैशलेश व्यवस्था की तरफ बढ़ने में थोड़ा सा डर या जोखिम महसूस होगा, लेकिन यह इतना मुश्किल नहीं है जितना दिखाई देता है.

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