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नोटबंदी में बाइक वाले पिछड़ गए, कार वाले बढ़ गए

नोटबंदी के दौरान बाइक की बिक्री घटी है जबकि कार की बिक्री में इजाफा हुआ है

FP Staff | Published On: Jan 03, 2017 11:43 PM IST | Updated On: Jan 03, 2017 11:39 PM IST

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नोटबंदी में बाइक वाले पिछड़ गए, कार वाले बढ़ गए

नोटबंदी ने आम लोगों के जीवन पर सीधा असर डाला है. एक जानकारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद दिसंबर में दो पहिया वाहनों की बिक्री एक दम नीचे लुढ़क गई थी. भारत की प्रमुख वाहन कंपनियां हीरो, बजाज और टीवीएस की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर में सबसे कम वाहन बिके हैं. नवंबर में भी बिक्री में गिरावट जारी थी. कंपनियों का कहना है नोटबंदी के बाद वाहनों की बिक्री में आई गिरावट की भरपाई करने में दो से तीन महीने का समय लग जाएगा.

नोटबंदी से दो पहिया वाहनों की बिक्री हुई है प्रभावित.

देश के सबसे बड़ी दो पहिया वाहन बनाने वाली कंपनी हीरो मोटो-कोर्प की रिपोर्ट के मुताबिक

दिसंबर 2016 में यूनिट्स की बिक्री में 33.91 फीसदी की गिरावट आई है. दिसंबर 2015 में कंपनी ने 4,99,665 यूनिट्स बेची थीं. जो कि दिसंबर 2016 में औंधे मुंह गिरी है, नोटबंदी के बाद कंपनी ने दिसंबर में सिर्फ 3,30,202 यूनिट्स ही बेची हैं.

बजाज ऑटो की माने तो मोटसाइकिल की बिक्री में 11 फीसदी की कमी आई है. कंपनी ने दिसंबर 2016 में 1,06,665 मोटरसाइकिल बेची हैं, जबकि इसी महीने एक साल पहले कंपनी की 1,20,322 मोटरसाइकिल की बिक्री हुई थी.

मोटरसाइकिल की बिक्री में आई है गिरावट

मोटरसाइकिल की बिक्री में आई है गिरावट

इसी तरह चेन्नई बेस्ड कंपनी टीवीएस मोटर्स ने भी नोटबंदी से वाहनों की बिक्री के प्रभावित होने का दावा किया है. कंपनी के वाहनों की बिक्री 8.76 फीसदी गिरी और कंपनी ने एक महीने में 1,53,413 यूनिट्स बेची जबकि एक साल पहले उसी टाइम पीरियड में 1,68,160 यूनिट्स की बिक्री हुई.

वहीं अगर टीवीएस की बाइक्स की बिक्री पर नजर दौड़ाएं तो दिखाई पड़ता है कि कंपनी ने दिसंबर 2015 में 71,435 बाइक्स बेची, जबकि दिसंबर 2016 में बाइक्स की सेल में 18.54 फीसदी गिरावट के साथ सिर्फ 58,189 यूनिट्स ही बिकीं.

नोटबंदी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्र में देखने को मिल रहा है. ग्रामीण आबादी कैश पर आधारित होती है. सरकार के लिए सुविधाएं या कैशलेस शायद एक क्रांति का नाम हो सकता है, लेकिन एक तरफ सच्चाई ये भी है कि आज भी भारत की ग्रामीण आबादी कैशलेस का मतलब भी नहीं जानती.

वहीं नोटबंदी के बाद कारों की बिक्री में इजाफा हुआ है. पीटीआई के मुताबिक

दिसंबर 2015 में 1,73,111 कारें बिकीं थी. जबकि नोटबंदी के बाद दिसंबर 2016 में सेल में 0.29 फीसदी की बढ़त के साथ 1,73,606 कारें बिकीं.
दो पहिया वाहनों की बिक्री में कमी और कारों की बिक्री में बढ़त से भी नोटबंदी का वर्गीय प्रभाव साफ नजर आता है. कारों की बिक्री में आई बढ़त साफ दर्शाती है कि कारों के उपभोक्ताओं को नोटबंदी से कोई खास फर्क नहीं पड़ा.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

भारत के लिए नया है कैशलेस लेन-देन

फोर्ब्स में छपी खबर के मुताबिक भारत एक कैश पर आधारित अर्थव्यवस्था है. भारत में लगभग 95 फीसदी लेन-देन कैश पर आधारित होता है. आपको जानकर आश्चर्य होगा भारत में 90 फीसदी विक्रेताओं के पास कार्ड रीडर या डिजिटल पेमेंट का कोई साधन ही नहीं है.

भारत में ज्यादातर दो पहिया वाहन खरीदार मिडिल क्लास वर्ग से तालुक रखते हैं. ऐसे में दो पहिया वाहनों में आई गिरावट साफ दर्शाती है कि नोटबंदी ने मिडिल क्लास वर्ग की जेब पर सीधा असर डाला है.

फोर्ब्स के अनुसार भारत में 85 फीसदी मजदूरों को भुगतान नकद में किया जाता है और लगभग कुल जनसंख्या के आधे के पास बैंकों में खाता ही नहीं है. आपको जानकर आश्चर्य होगा केवल भारत में ही ‘कैश ऑन डिलीवरी’ का ऑप्शन उपलब्ध है.

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