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आधार पेमेंट ऐप: फर्जी ऐप्स के चक्कर में कहीं फंस न जाना

आधार पेमेंट ऐप शुरू हो गया है, लेकिन ऐसा कोई ऐप प्ले स्टोर पर नहीं है.

FP Tech | Published On: Dec 31, 2016 07:28 AM IST | Updated On: Dec 31, 2016 07:28 AM IST

आधार पेमेंट ऐप: फर्जी ऐप्स के चक्कर में कहीं फंस न जाना

24 दिसंबर को इकोनॉमिक टाइम्स ने घोषणा की कि दुकानदारों के लिए तुरंत आधार पेमेंट ऐप शुरू हो गया है. लेकिन ऐसा कोई ऐप प्ले स्टोर पर नहीं दिखाई दिया और लोग सोचते रहे कि इस तरह का कोई ऐप शुरू भी किया गया है या नहीं. यहां तक कि ऐप के नाम को लेकर भी दुविधा थी. कोई इसका नाम 'आधार पेमेंट ऐप' बता रहा था तो कोई 'आधार कैशलेस मर्चेंट ऐप'.

कुछ दिनों के भीतर ऐसे किसी ऐप को लेकर लोगों में खासी दिलचस्पी दिखाई दी. वे उसे डाउनलोड कर इस्तेमाल करना चाहते थे. लेकिन उनके हाथ सिर्फ मायूसी ही लगी.

चलिए आपको बताते हैं कि क्या हुआ? यह एक बैक-एंड एप्लिकेशन है यानी एक ऐसी सर्विस जिसे कोई बैंक ही लागू कर सकता है. इसे फिलहाल आईडीएफसी बैंक ने शुरू किया है. इस एप्लिकेशन को आंध्र प्रदेश में 24 दिसंबर को लॉन्च किया गया. राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसका उद्घाटन किया. उसके बाद आए वीकेंड पर बिहार और दिल्ली के 100 दुकानदारों ने इस ऐप को इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया. आईडीएफसी ने इस ऐप को “आईडीएफसी आधार पे” नाम दिया. यह एप्लीकेशन आईडीएफसी बैंक मर्चेंट सर्विसेज से अलग है.

प्ले स्टोर पर नहीं मिलेगा

यह ऐप नियमित ग्राहकों के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ दुकानदारों के लिए है. इसे प्ले स्टोर पर जारी नहीं किया गया. कोई दुकानदार इसे सिर्फ ई-केवाईसी प्रक्रिया के तहत ही आईडीएफसी बैंक से हासिल कर सकता है. एक घंटे के भीतर स्मार्टफोन पर एक लिंक आता है. फिलहाल इस लिंक के जरिए ही ऐप डाउनलोड किया जा सकता है. यह ऐप एक आधार बायोमेट्रिक रीडर से जुड़ा है जो स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वॉलिटी सर्टिफिकेशन (एसटीक्यूसी) की तरफ से सर्टिफाइड होता है. दुकानदारों को ऐप में अपने बैंक का नाम और आधार नंबर डालना होता है और लेनदेन फिंगरप्रिंट स्कैनर के जरिए ही होता है.

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ये है खूबी

यह ऐप इसलिए लाया गया है ताकि दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के लोग कैशलेश लेनदेन कर सकें. इसके लिए ग्राहकों का बैंक खाता आधार कार्ड से जुड़ा होना चाहिए. इसके लिए डेबिड कार्ड, क्रेडिट कार्ड और यहां तक कि स्मार्टफोन की भी जरूरत नहीं है.

आईडीएफसी बैंक के संस्थापक एमडी और सीईओ डॉ राजीव लाल कहते हैं, 'यह भुगतान का सबसे आसान तरीका है. इसमें ग्राहक को कोई डेबिड कार्ड स्वाइप करने, पासवर्ड याद करने या फिर ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए न तो दुकानदार से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज किया जाता और न ही ग्राहक से. आईडीएफसी आधार पे कैशलेस पेमेंट की रफ्तार को बढ़ाएगा और आर्थिक वृद्धि में सबको भागीदार बनाने के लिए सरकार की तरफ से हो रहे डिजिटलाइजेशन के प्रयासों को इससे पंख मिलेंगे.”

ये है खामी

दुकानदार को ऐप के साथ काम करने वाले बायोमेट्रिक स्कैनकर के लिए दो हजार रुपए देने होते हैं. प्रति महीना होने वाले लेन देन की कोई सीमा नहीं है. हालांकि फोर्ब्स पत्रिका में छपे एक लेख में इस ऐप की एक बड़ी खामी की तरफ इशारा किया गया है. दुनिया का कोई भी बायोमेट्रिक स्कैनिंग सिस्टम पूरी तरह सही नहीं होता और थोड़ी सी भी गड़बड़ी इतनी बड़ी आबादी वाले देश में बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है. दूसरी दिक्कत यह है कि दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोगों के पास बैंक खाते नहीं हैं और इसलिए वे भुगतान के लिए इस ऐप को इस्तेमाल नहीं कर सकते.

फर्जी ऐप्स से सावधान

इसके अलावा प्ले स्टोर पर ऐसे फर्जी ऐप्स की भी कमी नहीं हैं तो इंटरनेट के फैलते दायरे का फायदा उठाने चाहते हैं. इसलिए उन्हें इंस्टॉल न करने में ही भलाई है. जरूरी है कि आप ऐप के पब्लिशर का नाम चेक करे और उसकी तरफ से पहले जारी किए गए ऐप्स भी अच्छी तरह से देखें भालें. आधिकारिक एप्लिकेशन एमगवर्नेंस टीम की तरफ से जारी किए जाते हैं या फिर भविष्य में उन्हें दुकानदारों के लिए सर्विस देने वाली बैंकों की तरफ से जारी किया जाएगा. अगर आप “आधार पेमेंट ऐप ” या फिर “आधार पे” सर्च करेंगे तो अभी सबसे ऊपर एक ऐप दिखाई देता है जिसका नाम है “आधार आधार पे इंडिया गवर्नमेंट”. लेकिन इसके नाम पर मत जाइएगा. इस ऐप का उससे कोई लेना देना नहीं है और ऐप का नाम लगातार बदल रहा है. हमने इस ऐप को बनाने वालों से बात करने की कोशिश की है,

तो एक बार फिर, फर्जी ऐप्स से सावधान रहिए.

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