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गोपीचंद ने चीनियों को हराने का भरोसा जगाया

पुलेला गोपीचंद ने ही भारतीय खिलाड़ियों को यह भरोसा दिलाया कि चीन को हराया जा सकता है.

FP Staff Updated On: Nov 18, 2016 05:30 PM IST

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गोपीचंद ने चीनियों को हराने का भरोसा जगाया

करीब साल भर पहले पुलेला गोपीचंद ने पीवी सिंधू को एक कड़ा निर्देश दिया. उन्होंने सिंधू से कहा कि जब तक वे बीच कोर्ट में खड़ी होकर खिलाड़ियों और कोचों के सामने चिल्लाएंगी नहीं तब तक वे उन्हें रैकेट छूने भी नहीं देंगे.

सिंधू के पिता रमन इस वाकये के बारे में बताते हैं यह करना उसके लिए बहुत मुश्किल था क्योंकि वह बहुत ही सौम्य है. वे भी उस समय मौजूद थे. रमन 1986 के एशियन गेम्स में कांस्य पदक विजेता वॉलीबॉल विजेता टीम के सदस्य थे. वे समझ रहे थे कि गोपी ऐसा करने के लिए सिंधू पर दबाव क्यों डाल रहे हैं.

आक्रामक नहीं हैं भारतीय बच्चे 

रमन कहते हैं गोपी कहते हैं कि भारतीय बच्चे बहुत संरक्षित माहौल में पले-बढ़े होते हैं. इस वजह से वे खुद को अभिव्यक्त नहीं कर पाते. यहां तक कि खेल के क्षेत्र में भी. आक्रामक भाव-भंगिमा और चिल्लाकर अपने भावों को प्रदर्शित करना भी विपक्षी खिलाड़ी पर दबाव बनाने में मदद करता है. खेल में प्रभुत्व महत्व रखता है. उस लिहाज से गोपी का कहना सही था.

गोपी के आदेश को सुनने के बाद सिंधू की आंखों में आंसू आ गए. लेकिन आखिरी में उन्होंने यह किया. वे मैदान में अकेले खड़े होकर खूब चिल्लाईं.

लेकिन कोर्ट के बाहर गोपी शायद सबसे भद्र लोगों में से एक हैं. दिमागी तौर पर वे बेहद दृढ़प्रतिज्ञ हैं. दृढ़ता उनका मिडिल नेम हो सकती है.

कोच बनने के बारे में गोपीचंद खुद बताते हैं कि जब मैंने कोच के तौर पर शुरुआत की थी कईयों ने मुझे यह कह कर हतोत्साहित किया था कि सिस्टम तुम्हें सफल नहीं होने देगा. मैं इन धारणाओं को तोड़ना चाहता था.

नहीं चुना आसान रास्ता 

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एक पूर्व ऑल इंग्लैंड चैंपियन के तौर पर आराम करना गोपीचंद के लिए ज्यादा आसान रास्ता था लेकिन विश्व बैडमिंटन का हिस्सा रहने की इच्छा ने उन पर कोच की भूमिका अदा करने का दबाव बनाया. विश्व बैडमिंटन के बारे में वे कहते हैं कि यहां बने रहना रोमांचकारी है.

गोपीचंद एक स्वप्रशिक्षित गुरु हैं. उन्हें वर्तमान में बैडमिंटन की दुनिया में तकनीकी तौर पर सबसे तेज दिमागों में गिना जाता है. एक ऐसे गुरु जिन्होंने भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाया कि चीन को भी हराया जा सकता है.

रियो ओलंपिक में महिलाओं के क्वार्टर फाइनल में सिंधू की जीत यू कैन डू इट मंत्र का ही परिणाम है. उन्होंने दूसरी वरीयता प्राप्त चीन की वांग यिहान को हराया. वांग ने लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था. 21 वर्षीय सिंधू के अपने से बेहतर रैंक वाली खिलाड़ी को हराने पर जल्दी खुश न होने वाले गोपी भी खुश होंगे.

सिंधू की तारीफ की 

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क्वार्टर फाइनल में सिंधू की जीत के बाद गोपी ने कहा यह एक भावनात्मक प्रदर्शन था. दोनों खिलाड़ियों ने जबरदस्त लड़ाई लड़ी लेकिन सिंधू ने दबाव में भी ज्यादा धैर्य रखा. इन परिस्थितियों में उन्हें ऐसा प्रदर्शन करते देखना खुशी देने वाला है. उनका विश्वास है कि अगर सिंधू का प्रदर्शन ऐसा ही रहा तो वे सोना जीत सकती हैं.

सिंधू के पक्ष में यह भी है कि उन्हें सेमीफाइनल में चीन की ली ज़ुरेई और स्पेन की कैरोलिना मारीन से नहीं भिड़ना पड़ेगा. उनका मुकाबला जापान की नोज़ोमी ओकूहारा से होगा. विश्व में 6वीं रैंक वाली नोजोमी की जीत का सिंधू के साथ रिकॉर्ड 3-1 का है. सिंधू ने उन्हें 2012 में हराया था जबकि नोजोमी ने 2014,2015 और फरवरी 2016 में सिंधू को हराया.

गोपी और सिंधू सप्ताह में छह दिन सूरज को हराते हैं. दोनों सुबह चार बजे एकेडमी पहुंच जाते हैं. तीन घंटे का कठिन अभ्यास करते हैं. ये जुगलबंदी विरोधियों को चकित करने की रणनीति पर काम करते हैं. सिंधू की कमियों पर काम करते हैं. गोपी ने कोर्ट को चार हिस्सों में बांट दिया है. वे सिंधू की कलाइयों पर ध्यान देते हैं. वे सिंधू को सिखाते हैं कि कैसे बैकहैंड फ्लिप के जरिये शटल को एकदम बाएं छोर से विपक्षी के दाएं छोर पर कैसे पहुंचाया जाए.

कोच की महत्वपूर्ण भूमिका 

एक विश्व स्तरीय कोच द्वारा एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी को ट्रेनिंग देते हुए देखना किसी विज्ञान की कक्षा में पढ़ने से कम नहीं है. यह ऐसा है जैसे कोई तेज दिमाग एक मैच को सुलझा रहा हो और शटल, उसकी उड़ान, रफ्तार पर पूरा नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा हो. वह भी सिर्फ हाथों और रैकेट के जरिये.

अब रियो में इसी सीख की प्रैक्टिस देखने को मिल रही है. सिंधू को मैदान में खेलते देखकर नहीं लग रहा कि यह उनका पहला ओलंपिक है. उनकी जाइंट किलर की छवि बनी हुई है. उन्होंने यह दिखा दिया कि वांग यिहान पर पिछली दो जीत तुक्के में नहीं मिली थी. यह एक कठिन मैच था लेकिन सिंधू ने सही समय पर गियर बदला और जीत हासिल की. मैच के बाद सिंधू ने कहा अभी अंत नहीं है. अभी बहुत से काम बाकी है.

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