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वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप: क्या इस बार भारत की झोली में आएगा कोई मेडल?

नीरज चोपड़ा से है मेडल की उम्मीद, अभी तक बस साल 2003 में ही मिला है वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल

Sumit Kumar Dubey Sumit Kumar Dubey Updated On: Aug 04, 2017 10:58 AM IST

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वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप: क्या इस बार भारत की झोली में आएगा कोई मेडल?

लंदन में आज से एथलेटिक्स की सबसे बड़ी प्रतियोगिता यानी वर्ल्ड चैंपियनशिप शरू हो रही है. दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ट इस चैंपियनशिप में आखिरी बार फर्राटा भरेंगे. रिटयरमेंट से पहले बोल्ट की इस किरी रेस के चलते यह चैंपियनशिप दुनिया भर में चर्चा में है.

इस चैंपियनशिप में भारत के एथलीट्स भी भागीदारी कर रहे हैं. लेकिन भारतीय दल में  बस एक एथलीट ही ऐसे हैं जिनसे पदक की उम्मीद की जा रही है. जूनिय़र वर्ल्ड  रिकॉर्डधारी जेवलिंग थ्रोअर नीरज चोपड़ा के पास पदक जीतने का मौका हो सकता है.

नीरज चोपड़ा कर सकते हैं कमाल

पोलैंड में अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में 86.48 मीटर की थ्रो के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया था. हरियाणा के इस एथलीट का इस साल अच्छा प्रदर्शन रहा है और पेरिस डायमंड लीग में वे पांचवें स्थान पर रहे थे. इसके अलावा उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और मोनाको डायमंड लीग में सातवां स्थान हासिल किया. उनका सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 85.23 मीटर है जो सीजन की सर्वश्रेष्ठ 15 थ्रो में शामिल है.नीरज 10 अगस्त को क्वालीफिकेशन और उसके बाद 12 अगस्त को फाइनल राउंड में उतरेंगे.

2003 में मिला था इकलौता पदक

हालांकि पिछले दिनों  भुवनेश्वर में  हुई एशियाई चैम्पियनशिप में भारतीय एथलीटों ने शानदार प्रदर्शन किया. लेकिन इस प्रतियोगिता में मिली सफलता का इस वैश्विक टूर्नामेंट में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. एशियाई चैम्पियनशिप में प्रतिस्पर्धा काफी कम थी क्योंकि चीन, जापान, कतर और बहरीन के कई शीर्ष एथलीटों ने इसमें भाग नहीं लेने का फैसला किया था.

भारत ने  साल 1983 में पहली चैम्पियनिशप के बाद से ही भारत इस प्रतियोगिता में भाग लेता रहा है. लेकिन भारत की झोली में अब तक सिर्फ एक पदक ही आ पाया है. भारत ने इकलौता  पदक साल 2003 में जीता था भारत को ये पदक दिलाया था लॉन्ग जंप की एथलीट अंजू बाबी जॉर्ज ने जीता था. उन्होंने साल 2003 में ब्रॉन्ज मेडल जीता था.

विवाद के बाद पहुंचा है भारतीय दल

भारत ने पहले 24 सदस्यीय टीम चुनी थी जिसमें 14 पुरुष और 10 महिला खिलाड़ी शामिल हैं. इसके बाद इस टीम में 100 मीटर की धाविका दूती चंद भी जुड़ गई हैं जिससे टीम की संख्या 25 पहुंच गई है. 1500 मीटर की धाविका चित्रा एमयू को टीम से बाहर करने पर विवाद भी हुआ था.

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इस बार इस बार महिलाओं की 20 किमी पैदल चाल एथलीट खुशबीर कौर , रिले धावक एम आर पूवम्मा, जिश्ना मैथ्यू और अनु राघवन  को छोड़कर ज्यादातर नये एथलीट हैं. वर्ल्ड चैंपियनशिप में अब तक भारत के इतिहास में एकमात्र पदक को देखते हुए किसी के फाइनल दौर में पहुंचने को भी एक उपलब्धि ही माना जायेगा.

एशियन चैंपियनशिप के दौरान एक बार फिर से जेंडर विवाद में आने वाली 100 मीटर की धाविका दूती चंद को आईएएएफ ने आखिरी समय में कोटा देकर विश्व चैंपियनशिप में बुलाया है. ओडिशा की 21 वर्षीय दुती 11.26 सेकंड का क्वालिफाइंग मार्क हासिल नहीं कर पाई थीं और एशियाई चैंपियनशिप में भी उन्हें कांस्य पदक मिला था.

एशियाई चैंपियनशिप में 5000 और 10000 मीटर का गोल्डन डबल पूरा करने वाले तमिलनाडु के गोविंदन लक्ष्मणन विश्व चैंपियनशिप में सिर्फ 5000 मीटर में दौड़ेंगे. पुरुषों में 400 मीटर के धावक मोहम्मद अनस ने रियो ओलिंपिक में 400 मीटर में दौड़ में हिस्सा लिया था और इस वर्ष मई में इस स्पर्धा में इंडियन ग्रांप्री में राष्ट्रीय रिकार्ड भी तोड़ा था.

अनस से फाइनल में पहुंचने की उम्मीद रहेगी. भारत की चार गुणा 400 मीटर की पुरुष और महिला रिले टीमें फाइनल में पहुंचने की उम्मीद जगाती हैं. पैदलचाल और मैराथन में भारतीय अपने प्रदर्शन में सुधार कर पाएं उनके लिये यही काफी होगा.

 

 

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