S M L

भूले से भी नहीं भुलाया जाएगा ये स्पोर्ट्स वीक

फैंस के लिए ये हफ्ता काफी महत्पूर्ण रहा, न सिर्फ खेल की दृष्टि से बल्कि रिकार्ड्स के नजर से भी

Neeraj Jha Updated On: Sep 02, 2017 05:02 PM IST

0
भूले से भी नहीं भुलाया जाएगा ये स्पोर्ट्स वीक

इस हफ्ते की सबसे बड़ी बात ये रही कि लोगों को मेजर ध्यानचंद को याद करने का इस साल भी मौका मिला. मौका इसलिए कहूंगा क्यूंकि अगर मीडिया और कुछ सरकारी कार्यक्रम ना हो तो शायद लोगों को ध्यानचंद का ध्यान भी ना आए. खैर जो भाई बंधू अभी भी ये सोच रहे होंगे कि ये किसकी बात हो रही है तो उनके लिए बताना चाहूंगा कि हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की जयंती 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है.

इस दिन हम कहीं न कहीं, किसी न किसी तरीके से उन्हें याद कर ही लेते हैं. भले ही उन्हें भारत रत्न नहीं मिला हो लेकिन हॉकी में उनके योगदान को कौन भूल सकता है. उन्होंने 1928, 1932 और 1936 ओलिंपिक के दौरान भारत के लिए तीन स्वर्ण पदक अर्जित किए.

हालांकि राष्ट्रीय खेल हॉकी की शुरुआती कहानी जो ध्यानचंद ने लिखी थी, उसकी स्क्रिप्ट कहीं न कहीं क्रिकेट ने चुरा ली. हॉकी का वजूद कम होता गया, क्रिकेट बढ़ता गया. ऐसा बढ़ा कि कई और खेलों की बलि चढ़ गई. लेकिन लिएंडर पेस, सानिया मिर्जा, सायना नेहवाल, पंकज आडवाणी, दीपिका पल्लीकल सरीखे कई और खिलाडियों ने दूसरे खेलो में भी अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर भारत की शान बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इसका फायदा ये हुआ है कि आम लोग अब दूसरे खेलों में भी अपनी रूचि दिखा रहे हैं.

पी.वी सिंधु ने जीता भारत का दिल

बीते हफ्ते की ही बात करें तो हमें पता चल जाएगा कि पूरा भारत कैसे पी.वी. सिंधु के विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2017 के फाइनल मैच के लिए टीवी के सामने डटा हुए था. सायना नेहवाल के बाहर हो जाने के बाद आखिरी आस पी.वी सिंधु पर टिकी थी. सिंधु हार जरूर गई लेकिन उन्होंने अपनी खेल से सारे देश का दिल जीत लिया.

सोशल मीडिया पर तो पी.वी. सिंधु को बधाई देने के लिए लोगों की लाइन लग गई. फाइनल में जापान की नोजोमी ओकहारा के खिलाफ मिली हार के बाद सिंधु ने कहा कि अंतिम समय में की गई गलती ने पूरा गेम बदल दिया. एक घंटे 49 मिनट तक चले मैच के बारे में हैदराबाद की इस खिलाड़ी ने कहा कि यह मानसिक और शारीरिक तौर पर काफी कठिन मैच था. यह मुकाबला इस टूर्नामेंट का सबसे लंबे समय तक चलने वाला मैच था.

एम एस धोनी - 300 नॉट आउट

कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ चौथा वनडे पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने करियर का 300 वां मैच खेला. ऐसे तो कई दिग्गजों ने ये कारनामा किया है लेकिन माही के लिए ये मैच इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इतनी उपलब्धियों के बाद भी उनके कुछ मैचों के फॉर्म को लेकर ना सिर्फ मीडिया ट्रायल होती है बल्कि सेलेक्टर्स और पूर्व खिलाडियों को भी धोनी के बारे में कुछ उल्टा पुल्टा बोलने का मौका मिल जाता है. 300 वें मैच तक पहुंचने से दो मैच पहले भी उन्होंने शानदार पारी खेली थी. 6 नंबर पर बैटिंग करना आसान नहीं होता है फिर भी अगर जीते हुए मैचों में उनके औसत को देखे तो वो सबसे आगे हैं- कोहली से भी आगे.

भले ही वो इस बड़े मैच में अर्धशतक सिर्फ एक रन से चूक गए हों, इसके बाबजूद उनका नाम 300वें मैच में ज्यादा रन बनाने वाले खिलाडियों में शुमार हो गया. इसके साथ ही करियर में सबसे अधिक बार नाबाद रहने का रिकॉर्ड भी उन्होंने अपने नाम कर लिया।

मौका खास था और विराट कोहली ऐसे मौकों को हाथ से जाने नहीं देते. पूरी टीम के साथ धोनी को स्मृति चिह्न भेंट किया गया और भावुक होकर फिर से एक बार कह डाला की माही आप हमेशा मेरे कप्तान रहेंगे.

आजकल के जमाने में जहां टी20 ही क्रिकेट का सबसे बड़ा फॉर्मेट है, 300 के आंकड़े के आस पास आना भी बहुत बड़ी उपलब्धि है. पूरी दुनिया में सिर्फ 19  खिलाडियों ने ही इस आंकड़े को छुआ है, भारत में तो गिनती के पांच नाम हैं. सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, मोहम्मद अजहरुद्दीन और युवराज सिंह. और अगर सिर्फ विकेटकीपर्स की बात करें तो कुमार संगकारा के बाद वो दूसरे ऐसे खिलाडी हैं. और शायद यही वजह है कि धोनी को टीम में लाने वाले सिलेक्टर किरण मोरे चाहते हैं की उन्हें 2019 वर्ल्ड कप के स्कवाड में जगह मिलनी चाहिए.

बांग्लादेश और वेस्टइंडीज की विजय यात्रा की शुरुआत

ये हफ्ता ना सिर्फ भारतीय खेलों के नजरिए से महत्वपूर्ण रहा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई उलट फेर देखने को मिले. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीमों को काफी गंभीरता से लिया जाता है. लेकिन जब बांग्लादेश जैसी टीम वो भी टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया की हालत पतली कर दे तो समझिए टीम और खिलाडियों में दम है. तभी तो आईसीसी रैंकिंग में कुल 10 टीमों में 9वें स्थान पर खड़ी बांग्लादेश की टीम ने चौथे पायदान वाली टीम ऑस्ट्रेलिया को मीरपुर में धराशायी कर दिया.

मैच में हुआ भी कुछ ऐसा की पूरी दुनिया के लिए अजूबा था. मेजबान टीम ने ऑस्ट्रेलिया के सामने 265 रनों का टारगेट रखा, उन्होंने चौथे दिन की शुरुआत अच्छी की और एक समय 109  पर 2 विकेट थे, फिर एक साझेदारी टूटी और स्कोर 158 रन पर तीन विकेट था और इस मुकाम पर भी ऑस्ट्रेलिया का ही पलड़ा भारी दिख रहा था. लेकिन शाकिब अल हसन की शानदार गेंदबाजी की बदौलत टाइगर्स ने आखिरी 7 विकेट सिर्फ 73 रनों पर ही निपटा दिया और ऑस्ट्रेलिया के ऊपर टेस्ट में अपनी पहली जीत दर्ज की. इससे पहले वो ऑस्ट्रेलिया की टीम से पांच में पांच बार हार चुकी है.

हालांकि बांग्लादेश ने तो कई बार बड़ी - बड़ी टीमों को ऐसे झटके दिए कि इन्हें इतिहास के पन्नों में जगह मिल गई. यही नहीं 2015 के बाद से लगातार ये टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है. बांग्लादेश धीरे - धीरे श्रीलंका की जगह ले रही है.

इस हफ्ते क्रिकेट जो दूसरा बड़ा कारनामा देखने को मिला वो है वेस्टइंडीज की इंग्लैंड पर जीत. लीड्स के मैदान पर सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच को वेस्टइंडीज ने 5 विकेट से जीत लिया. आखिरी बार 2000 में इंग्लैंड के घरेलू मैदान पर जिम्मी एडम्स की कप्तानी में वेस्टइंडीज इंग्लैंड के मैदान पर इंग्लैंड को हराने में सफल रहा था.

इस हार के बाद इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन ने टेस्ट क्रिकेट में हाल के इतिहास का सबसे बड़ा उलटफेर करार दिया है. उन्होंने कहा, यह वर्तमान समय के शानदार टेस्ट मैचों में से एक था. किसी ने भी मैच से पहले और आखिरी दिन से पूर्व वेस्टइंडीज की जीत के बारे में सोचा नहीं था.

टी20 ने ऐसे ही क्रिकेट के बाकी फॉर्मेट को पीछे छोड़ दिया है. लेकिन इस तरह की रोमांचक क्रिकेट और कमजोर टीमों के आगे आकर जीत हासिल करने से कहीं ना कहीं टेस्ट क्रिकेट को ही फायदा होगा. और हम ये उम्मीद कर सकते है कि आनेवाले दिनों में भी ये दोनों टीमें अपने इस प्रदर्शन को बरकरार रखने का प्रयास करती रहेगा.

(लेखक करीब 2 दशक से खेल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और फिलहाल टेन स्पोर्ट्स से जुड़े हुए हैं. इस आलेख में प्रकाशित विचार उनके अपने हैं. आलेख के विचारों में फर्स्टपोस्ट की सहमति होना जरूरी नहीं है.)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi