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आईपीएल ऑक्शन: किसी भी 'कीमत' पर स्टार स्पोर्ट्स को चाहिए थे ग्लोबल राइट्स

स्टार स्पोर्ट्स ने 16 हजार करोड़ रुपए में खरीदा है आईपीएल ग्लोबल राइट्स, लगाई थी अब तक की सबसे बड़ी बोली

Neeraj Jha Updated On: Sep 05, 2017 08:38 AM IST

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आईपीएल ऑक्शन: किसी भी 'कीमत' पर स्टार स्पोर्ट्स को चाहिए थे ग्लोबल राइट्स

आखिरकार जिसका कई महीनों से इंतज़ार था वो खत्म हुआ. लम्बे जद्दोजहद के बाद स्टार स्पोर्ट्स ने आईपीएल का प्रसारण अधिकार को पाने के लिए पूरा जोर लगा दिया था. ये स्टार स्पोर्ट्स के लिए वजूद की लड़ाई थी. अभी भी यकीन करना मुश्किल है की सिर्फ 5 सालों के लिए स्टार ने 16,347 करोड़ रुपये खर्च दिए.

कुल 24 कंपनियों ने बिड करने के लिए दस्तावेज खरीद थे लेकिन इनमें से सिर्फ 14 ने ही बिड किया. सोनी ने जो बोली लगाई थी वो करीब 11000 करोड़ के आसपास रही. स्टार ने प्लान बनाकर सारे राइट्स के लिए बिड किया. आखिर उनकी ये स्ट्रेटेजी फायदेमंद साबित हुई. स्टार को ये कॉन्ट्रैक्ट 2018 से 2022 तक के लिए मिला है. आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने मजाकिया तौर पर ट्विटर पर लिखा की ये रकम भूटान और मालदीव जैसे देशों के के जीडीपी से भी कहीं ज्यादा है. लेकिन इतनी ऊपर जानेवाली इस बोली पर भी ललित चुटकी लेने से नहीं बाज आए. उन्होंने लिखा की शायद मैं होता तो बीसीसीआई को इस से भी बड़ी रकम दिलवाता.

इस बार की बिड की खासियत ये रही की इसमें एमेजॉन और फेसबुक जैसी कंपनियां भी शामिल हुई. 2008 राइट्स और इस बार में फर्क इतना है की स्टार ने भारत के अलावा ग्लोबल और डिजिटल पर भी कब्जा कर लिया. सोनी को जब ब्रॉडकास्ट राइट्स मिले थे तो उसके कई सालों बाद स्टार ने आईपीएल के डिजिटल अधिकार ले लिया था.

अगर साल का हिसाब लगाए तो ये बैठता है करीब 3,300 करोड़. इतनी बड़ी राशि खर्च कर ब्रॉडकास्टर्स के लिए रेवेन्यू लाना इतना आसान नहीं होगा. सोनी ने 2008 में 10 वर्षों के लिए 8,200 करोड़ रुपए का भुगतान किया - सालाना 820 करोड़ रुपए, अभी के हिसाब से करीब चार गुना कम.

स्टार इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव उदय शंकर का मानना है की आईपीएल एक बहुत ही पावरफुल प्रॉपर्टी है और स्टार इसे टीवी और डिजिटल माध्यम में तरीके से प्रयोग करेगी. उनके मुताबिक 2008 और 2017 में काफी बदलाव आ गया है भारत, क्रिकेट और आईपीएल तीनों में कई तब्दीलियां आई हैं. रुपर्ट मरडॉक संचालित स्टार ग्रुप के पास बीसीसीआई का राइट्स और आईसीसी का ग्लोबल राइट्स पहले से ही है.

अगर हम अब आईपीएल को भी जोड़ दें तो उनके पास करीब 210 दिनों का अंतररार्ष्ट्रीय क्रिकेट भी मौजूद है. इतना क्रिकेट शायद ही किसी एक चैनल के पास होगा. अंतररार्ष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल के अलावा स्टार के पास फुटबॉल, कबड्डी, टेनिस और बैडमिंटन में प्रमुख प्रॉपर्टी हैं, जो यकीनन भारत में शीर्ष खेल हैं.

इतना रेवेन्यू आएगा कहाँ से

भारत का बाजार दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है. नोटबंदी का असर भले ही आम जिंदगी में देखने को मिला लेकिन इसका असर आईपीएल पर तनिक भी नहीं पड़ा. बड़े बड़े प्रोडक्ट लांच को आईपीएल के आसपास ही रखा जाता है, एडवरटाइज़िंग के स्लॉट्स पहले से ही बुक हो जाते है. ये साड़ी बातें मान भी ली जाए लेकिन सवाल वही का वही है की इतना पैसा वापस आएगा कैसे?

पूरी मीडिया और मनोरंजन उद्योग का 10 प्रतिशत विज्ञापन जो की करीब 55,000 करोड़ है, स्पोर्ट्स प्रोग्रामिंग पर खर्च होता है -जिसमें आईपीएल का एक बहुत बड़ा हिस्सा होता है. वर्तमान में, 60 मैचों के साथ, ब्रॉडकास्टर एक सीजन में अनुमानित 1,000 करोड़ रुपए कमाता है. लेकिन यहाँ तो मूलधन ही 3300 करोड़ है.

High-PL

अगर खेल की लोकप्रियता की बात करें तो आईपीएल के दसवें सीजन में 22.5% की वृद्धि देखी गई. 2016 में, टूर्नामेंट में पांच मैचों में सोनी मैक्स, सोनी सिक्स, सोनी सिक्स एचडी, सोनी ईएसपीएन और सोनी ईएसपीएन एचडी के 60 मैचों में 120 करोड़ का इंप्रेशन थे - इसका मतलब पुरे आईपीएल को करीब 120 करोड़ लोगों ने देखा (टीवी व्यूअरशिप मापन एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक). लेकिन लोकप्रियता अगर करीब 22 प्रतिशत बढ़ी है तो अगले साल रेवेन्यू को चौगुना बढ़ाना होगा.

स्टार का गेमप्लान

सोनी के मुकाबले स्टार एक बड़ा नेटवर्क है. डिस्ट्रीब्यूशन में भी इनकी पहुंच अच्छी है. लेकिन इतनी बड़ी रकम लगाने के बाद उदय शंकर का भी मानना है की रेवेन्यू लाने के लिए एक नई रणनीति बनानी पड़ेगी. स्टार को एक नए तरीके से सोचना होगा. शायद जो फार्मूला उन्होंने कबड्डी में लगाया है उसका ही अनुसरण करना होगा.

स्टार के पास सबसे बड़ा फायदा है की वो अलग अलग भाषाओँ को लेकर प्लान बनाते हैं और हर क्षेत्र में उनके चैनल भी मौजूद है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी इनकी पहुंच बहुत अच्छी है. कबड्डी सबसे बड़ा उदहारण है, स्टार ने ना सिर्फ इन्हें विभिन्न भाषाओँ में दिखा रही है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कबड्डी को 'फ्री टू एयर' भी कर दिया है. हालांकि इसके बाबजूद कठिनाइयां बहुत है. मद्रास हाई कोर्ट में ट्राई के नए टैरिफ रेजिम को लेकर स्टार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है. उधर डिश टीवी ने भी बीसीसीआई और सरकार को लिखकर चेतावनी दी है की अगर स्टार को राइट्स मिलेगा तो बाज़ार में उनका एकाधिकार हो जाएगा.

खैर अब प्रसारण के सारे अधिकार तो अगले 5 साल के लिए तो स्टार को मिल गए लेकिन पहले से ही हजारों करोड़ के घाटे में चल रही उनकी स्पोर्ट्स बिज़नेस के लिए पैसा लाना इतना आसान नहीं होगा.

बहरहाल बीसीसीआई की पाँचों उंगलियां घी में है. 90 वे के दशक में स्वर्गीय जगमोहन डालमिया मैच दूरदर्शन पर लाइव दिखाने के लिए मंडी हाउस के चक्कर काटा करते थे, यही नहीं ऊपर से हर मैच के लिए दूरदर्शन को 5 लाख रुपए भी देकर आते है. उनका बोया बीज आज बीसीसीआई को जमकर फल दे रहा है.

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