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लगातार दो सुपर सीरीज जीतने वाले किदांबी श्रीकांत की कुछ खास बातें

पहले डबल्स के खिलाड़ी थे श्रीकांत

FP Staff | Published On: Jun 25, 2017 01:09 PM IST | Updated On: Jun 25, 2017 01:14 PM IST

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लगातार दो सुपर सीरीज जीतने वाले किदांबी श्रीकांत की कुछ खास बातें

भारत के शटलर  किदांबी श्रीकांत ने लगातार दो सुपर सीरीज जीतकर कमाल कर दिया है. बैडमिंटन के खेल में भारत को अब तक महिला वर्ग की ताकत की वजह से ही जाना जाता था. लेकिन श्रीकांत ने दिखाया है कि सायना नेहवाल और पीवी सिंधु के अलावा भारत के पुरुष खिलाड़ी भी कमाल कर सकते हैं.

श्रीकांत ने पहले इंडोनेशिया ओपन और फिर ऑस्ट्रेलिया ओपन में दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी सोन वान हो को एक हफ्ते के भीतर दो बार मात दी है.

श्रीकांत ने साल 2013 में उस वक्त के भारत के नंबर एक खिलाड़ी पी कश्यप को मात देकर सबको चकित कर दिया था. भारत की नेशनल सीनियर चैंपियनशिप में कश्यप पर श्रीकांत की इस जीत ने दोनों के बीच पुरुष सिंगल्स में एक स्वस्थ राइवलरी की शुरूआत की थी.

नेशनल चैंपियनशिप जीतने के बाद श्रीकांत ने इंटरनेशनल स्तर पर  इंटरनेशनल स्तर पर थाईलैंड ग्रांप्री में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया था. इस टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में उन्होंने पहली वरीयता वाले मेजबान देश के खिलाड़ी बोनसाक पोनसाना को 21-16, 21-12 से सीधे गेमों में मात दी थी.

श्रीकांत और सफलताओं का साथ कोई नया नहीं है. वह इससे पहले भी दिग्गज खिलाड़ियों को मात देकर खिताब जीत चुके हैं. श्रीकांत ने 2014 में चीन के दिग्गज शटलर लिन दान को हराकर चाइना ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब अपने नाम किया था.

श्रीकांत ने अपने करियर की शुरूआत डबल्स के खिलाड़ी के तौर पर की थी. लेकिन  गुंटूर के इस शटलर को उसके पिता केवीएस कृष्णा 2008 में गोपीचंद अकादमी में भर्ती कराने आए. यहां श्रीकांत के बड़े भाई नंदगोपाल भी इसी अकादमी में खेला करते थे. गोपीचंद ने उन्हें युगल और मिश्रित युगल में खिलाना शुरू कर दिया. कुछ सालों बाद वह एकल में तो खेलने लगे पर इसी पर फोकस नहीं था.

2013 की इंडियन बैडमिंटन लीग में श्रीकांत और तत्कालीन नंबर एक खिलाड़ी ली चोंग वेई एक ही टीम में थे. इन दोनों को साथ अभ्यास करते देख ली चोंग वेई के कोच तेई जो बोक को लगा कि यह तो ली की तरह ही खेलता है. उन्होंने श्रीकांत को सिंगल्स में ही आजमाने की सलाह दी. कोच गोपीचंद की भी सोच यही थी. इसके बाद श्रीकांत ने पूरा फोकस सिंगल्स पर लगा दिया और इस सलाह का परिणाम हम सभी के सामने है.

श्रीकांत जिस तरह से ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज में खेल दिखाया है  हैं, उससे तो यही लगता है कि यह भारतीय शटलर जल्द ही टॉप पांच में शामिल हो सकता है. इस तरह वह जून 2015 में हासिल की तीसरी रैंकिंग की तरफ बढ़ रहे हैं. अभी श्रीकांत 11 वीं रैंकिंग के खिलाड़ी है. लेकिन ऑस्ट्रेलियन ओपन में श्रीकांत की इस जीत के बाद उनकी रैंकिंग का बढ़ना तय है.

जिस सहज अंदाज में श्रीकांत ने ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज में  ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को हराया उससे साफ दिख रहा है कि वह रैंकिंग में जबरदस्त छलांग लगाने वाले हैं.

 

 

 

 

 

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