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खेल मंत्रालय के दबाव में हुआ हॉकी कोच का फैसला, मारिन बने कोच

महिला टीम के कोच शोर्ड मारिन को पुरुष टीम की कमान, महिला टीम के चीफ कोच होंगे हरेंद्र सिंह

Shailesh Chaturvedi Updated On: Sep 08, 2017 03:28 PM IST

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खेल मंत्रालय के दबाव में हुआ हॉकी कोच का फैसला, मारिन बने कोच

भारतीय हॉकी आपको चौंकाने का मौका कभी नहीं छोड़ती. बेहद दिलचस्प हालात में देश के खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने ट्विटर के जरिए बताया कि भारतीय पुरुष सीनियर हॉकी टीम के कोच शोर्ड मारिन होंगे. इसी के साथ हरेंद्र सिंह को महिला टीम का चीफ कोच बनाने का फैसला किया है.

अब जानिए कि इसमें दिलचस्प क्या है. सबसे पहले यह कि कोच पद के लिए अप्लाई करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर थी. यानी अप्लाई करने का वक्त ही नहीं दिया गया. हॉकी इंडिया के एक अधिकारी के मुताबिक सात सितंबर को मीटिंग के बाद तय किया गया कि फैसला अभी कर दिया जाए.

दूसरी दिलचस्प बात है कि घोषणा हॉकी इंडिया की जगह खेल मंत्री ने की. उसके बाद खेल मंत्रालय से आधिकारिक तौर पर मेल के जरिए जानकारी दी गई. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि कोच की आधिकारिक घोषणा मंत्रालय या मंत्री की तरफ से आए.

 

तीसरी दिलचस्प बात है कि पुरुष टीम की जिम्मेदारी शोर्ड मारिन को दी गई है, जिन्होंने कभी सीनियर पुरुष टीम की कोचिंग नहीं की है. बजाय इसके कि वो नेदरलैंड्स की अंडर-21 पुरुष टीम के कोच रहे हैं. जूनियर वर्ल्ड कप दिलाने वाले हरेंद्र सिंह को महिला टीम को जिम्मेदारी दी गई है, जिन्होंने कभी महिला टीम की जिम्मेदारी नहीं संभाली है.

अप्लाई करने की आखिरी तारीख से पहले चयन

हॉकी इंडिया की चयन समिति के सदस्य और पूर्व खिलाड़ी आरपी सिंह के मुताबिक फैसला जल्दी लेने की जरूरत इसलिए भी थी, क्योंकि कई बड़े टूर्नामेंट सिर पर हैं. हालांकि यह तो उस वक्त भी पता होगा, जब  हॉकी इंडिया ने नए कोच के लिए विज्ञापन दिया, जिसमें आखिरी तारीख 15 सितंबर रखी गई.

इन दिलचस्प खबरों के बीच जानकारी यही है कि फैसला खेल मंत्रालय के दबाव में हुआ है. सिलसिलेवार तरीके से घटनाओं का जानते हैं. सबसे पहले रोलंट ओल्टमंस को हटाने का फैसला हुआ. खेल मंत्रालय इससे खुश नहीं था. यहां तक कि उनका इस्तीफा स्वीकार न करने का फैसला किया गया. वजह यही थी कि मंत्रालय को लगा कि ओल्टमंस को हटाने का फैसला गलत समय पर हुआ है. इतने अहम साल में नए कोच के लिए आकर जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं होगा.

खेल मंत्रालय के साथ समझौते की तरह है यह फैसला

इसके बाद हॉकी इंडिया में खलबली मची. वे मंत्रालय के साथ रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहते थे. न ही वे हरेंद्र सिंह को सीधे पुरुष टीम का कोच बनाना चाहते थे. इसीलिए रास्ता यही निकाला गया कि मारिन को महिला टीम से निकालकर पुरुष टीम का कोच बना दिया जाए. खेल मंत्रालय को समझाया गया कि वो भारतीय माहौल को जानते हैं. ऐसे में सीधे जिम्मेदारी संभाल सकते हैं.

इसके अलावा, खेल मंत्रालय को यह भी बताया गया कि ऐसा करने से कितनी बड़ी रकम बचेगी. ओल्टमंस की तनख्वाह मारिन से दोगुनी है. ऐसे में अब पुरुष टीम का कोच आधे पैसों में आ गया. महिला टीम के कोच को अभी तय करना होगा कि वो एयर इंडिया से पैसे लें या साई से, क्योंकि हरेंद्र एयर इंडिया में काम करते हैं. ऐसे में अगर वो एयर इंडिया से पैसे लेते हैं, तो उनको तनख्वाह देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सिर्फ टीए, डीए या कंसल्टिंग फीस से काम चल जाएगा. हालांकि अब तक यह जानकारी नहीं है कि हरेंद्र के साथ पैसों को लेकर क्या तय हुआ है.

तो सारी दिलचस्प घटनाएं उस फैसले की वजह से हैं, जिसमें ओल्टमंस को हटाया गया था. ओल्टमंस को हटाने की गड़बड़ियों को ढकने के लिए इस तरह के फैसले हुए हैं. इससे भारतीय हॉकी का कोई भला होगा, इसे लेकर संदेह ही संदेह हैं.

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