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पीबीएल 2017: क्या भारत को तीसरी सिंगल्स खिलाड़ी मिल गई?

कैरोलिना मरीन के खिलाफ मैच में अश्विनी पोनप्पा ने किया कमाल का प्रदर्शन

Shirish Nadkarni Updated On: Jan 09, 2017 01:57 PM IST

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पीबीएल 2017: क्या भारत को तीसरी सिंगल्स खिलाड़ी मिल गई?

शनिवार को पीबीएल में बेंगलुरु ब्लास्टर्स और हैदराबाद हंटर्स के बीच मुकाबला हुआ था. दर्शक इस मुकाबले में टीम लिस्ट देखकर हैरत में थे. इसमें कोई हैरत की बात नहीं थी कि वर्ल्ड, ओलिंपिक और यूरोपियन चैंपियन कैरोलिना मरीन टाइ में पांचवां मुकाबला खेलने वाली थीं. उनकी प्रतिद्वंद्वी का नाम चकित करने वाला था. छह साल से भी ज्यादा वक्त बाद अश्विनी पोनप्पा सिंगल्स खेलने वाली थीं.

हम सब जानते हैं कि अश्विनी डबल्स स्पेशलिस्ट हैं. उन्होंने इंटरनेशनल, नेशनल, स्टेट यहां तक कि क्लब टूर्नामेंट में भी सिंगल्स के तौर पर पिछले कुछ सालों में हिस्सा नहीं लिया है. मरीन के मैच से पहले हैदराबाद चार मैचों के बाद 2-3 से पिछड़ा हुआ था. मरीन ने अश्वनी के खिलाफ आखिरी मैच जीता. ट्रंप मैच होने की वजह से हैदराबाद ने टाई 4-3 से जीत ली.

मरीन ने मैच 9-11, 11-5, 11-8 से जीता. ऐसा लग रहा था, जैसे अश्विनी कुछ साबित करने के लिए खेल रही हैं. ज्वाला गुट्टा के साथ अब उनकी डबल्स जोड़ी टूट चुकी है. मैच में ऐसा लग रहा था कि दर्शकों से ज्यादा मरीन हैरत में हैं कि बेंगलुरु 27 साल की इस कुर्गी लड़की को उतारने का फैसला किया है. मरीन को लग रहा होगा कि उन्हें हॉन्गकॉन्ग की च्यूंग एनगन यी या रुत्विका शिवानी गड्डे से खेलना होगा.

मानसिक तौर पर मरीन ने इसके लिए ही तैयारी की होगी. लेकिन उनके सामने ऐसी खिलाड़ी आई, जिसके बारे में उन्हें कुछ नहीं पता था. सिंगल्स में उनका मूवमेंट, स्ट्रोक्स और स्टाइल.. किसी के बारे में पता नहीं था. अगर सामने सायना नेहवाल या पीवी सिंधु होतीं, तो मरीन के दिमागी कंप्यूटर में उनका खेल छपा होता.

मरीन के सामने स्पेशलिस्ट डबल्स खिलाड़ी थीं. इसमें भी मरीन को मुश्किल शटल की वजह से भी आई. शटल की रफ्तार काफी ज्यादा है. यहां तक कि मरीन को इसे नियंत्रित करने में मुश्किल आई. उनके रुटीन शॉट उन्हें धोखा दे रहे थे. वह एक तरह से बेंगलुरु की खिलाड़ी के मुताबिक खेलने लगीं.

अश्विनी बहुत फिट दिखाई दे रही थीं. उन्होंने स्पैनिश खिलाड़ी को रैली कंट्रोल करने का कोई मौका नहीं दिया. अश्विनी ने मरीन के स्मैश और दोनों फ्लैंक से हाफ स्मैश को बहुत अच्छी तरह ब्लॉक किया. वो भी इस तरह कि शटल सिर्फ नेट के पार पहुंचे और सर्विस लाइन से बहुत पहले ही गिर जाए.

ashwini marin

इस तरह के रिटर्न की वजह से मरीन को नेट में पहुंचने में थोड़ी देर लगी. जैसे-जैसे मरीन से गलतियां हुईं, अश्विनी का भरोसा बढ़ा. पहला गेम स्थानीय खिलाड़ी ने जीता. तीसरे गेम के पहले हाफ में भी मरीन को दिक्कत हुई. लेकिन आखिरकार उन्होंने अपने अनुभव का पूरा फायदा उठाया और तीसरा गेम 11-8 से जीत लिया.

मरीन को इसका भी फायदा मिला कि बेस लाइन और मध्य कोर्ट से शानदार खेल रहीं अश्विनी ने नेट पर काफी गलतियां की. डबल्स में भी अश्विनी लगातार कोर्ट में पीछे रहती हैं.

इस पूरे मैच के बाद एक सवाल सामने आता है. क्या भारत को ऐसी खिलाड़ी मिल गई है, जो देश के लिए तीसरी सिंगल्स खिलाड़ी बन सकें? अगले यूबर कप में सायना और सिंधु के साथ वो सिंगल्स में जगह बना सकती हैं?

जिन लोगों ने मरीन-अश्विनी का मैच देखा, उन्हें लगा होगा कि मरीन बड़ी आसानी से पीसी तुलसी और तन्वी लाड की जगह ले सकती हैं. जो लोग इस मैच को देखकर बहुत उत्साहित हैं, उन्हें सावधानी रखनी चाहिए. मरीन का अश्विनी से दोबारा मैच होता है, तो शायद स्पैनिश खिलाड़ी बड़ी आसानी से जीत जाएं.

पहली बात, दोबारा मैच होता है तो सरप्राइज फैक्टर नहीं होगा. अश्विनी के स्टाइल का पूरा अध्ययन करके वो आएंगी. उनका गेमप्लान तैयार होगा. दूसरा, पीबीएल से अलग मैच 21 पॉइंट स्कोरिंग सिस्टम में होगा. उस सिस्टम में अश्विनी के पास मौका नहीं होगा. 11 पॉइंट का पीबीएल गिमिक खासतौर पर टीवी के लिए है. यहां पर अंडरडॉग के लिए जीत का मौका ज्यादा होता है. ऐसा हमने देखा है कि अजय जयराम और एचएस प्रणॉय जैसे खिलाड़ियों ने खुद से बेहतर लोगों को मात दी है.

तीसरा, हमें समझना चाहिए कि अश्विनी एक सिंगल्स खिलाड़ी नहीं हैं. छह साल का वक्त किसी के लिए सिंगल्स खिलाड़ी के तौर पर वापसी के लिए बहुत ज्यादा है. डबल्स के मुकाबले सिंगल्स में जिस तरह के स्किल की जरूरत है, वो बहुत अलग है.

वैसे भी यह मुकाबला एक ‘फन’ टूर्नामेंट का मैच था. इस मैच को हेड-टु-हेड में नहीं जोड़ा जाएगा. पीबीएल के नतीजे को खिलाड़ी उतनी अहमियत नहीं देंगे. इससे एक शक उभरता है कि मरीन और अश्विनी के बीच मैच कहीं पहले से तय तो नहीं था? क्रिकेट और टेनिस जैसे खेल में ऐसे तमाम वाकये हुए हैं, जिनकी जांच की गई. कई मैचों के नतीजे शक के नजरिए से देखे गए.

इन सब आशंकाओं के बीच अश्विनी के प्रदर्शन को कम नहीं आंकना चाहिए. उन्होंने दुनिया की बेहतरीन खिलाड़ी के सामने शानदार प्रदर्शन किया है. कम से कम उन्होंने इस बहस को खड़ा किया कि क्या वो सिंगल्स खेल सकती हैं? ये बहस लंबे समय तक नहीं हो सकती. लेकिन कम से कम एक दिन के लिए तो हो ही सकती है.

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