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कंगारू बॉक्सर को 'पीटने' वाले अखिल ने कहा- मैं हारने वालों में से नहीं

ओलंपियन अखिल कुमार मिश्रा ने ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज टाइ गिलक्रिस्ट को प्रोफेशनल बॉक्सिंग करियर का जोरदार आगाज किया है

FP Staff Updated On: Aug 06, 2017 03:28 PM IST

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कंगारू बॉक्सर को 'पीटने' वाले अखिल ने कहा- मैं हारने वालों में से नहीं

ओलंपियन अखिल कुमार मिश्रा ने ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज टाइ गिलक्रिस्ट को जूनियर वेल्‍टरवेट (63 किग्रा) वेट कटेगरी में सिर्फ तीन राउंड में ही पीटकर प्रोफेशनल बॉक्सिंग करियर का जोरदार आगाज किया है. उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनमें अभी भी दम है. उनका रास्ता चोट नहीं रोक सकती.

यह जीत इसलिए भी मायने रखती है, क्योंकि उनका सामना 13 प्रोफेशनल बॉक्सिंग लड़ चुके बॉक्सर से था. मेलबर्न कॉमनवेल्थ गेम्स-2006 के गोल्ड मेडलिस्ट अखिल को दूसरे राउंड में बायीं आंख के नीचे चोट भी लग गई थी, इसके बावजूद उन्होंने जोरदार वापसी की और तीसरे राउंड में ही विपक्षी को ढेर कर दिया.

 अखिल कुमार ने करियर से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए...

सवाल- चोट के बाद वापसी कितनी कठिन रही? आपको लगता था कि प्रोफेशनल रिंग में इतना शानदार डेब्यू कर पाएंगे?

जवाब- अब तो चोट में खेलने की आदत हो चुकी है. लेकिन, जब आपको बाउट के दौरान चोट लग जाती है तो थोड़ा मुश्किल हो जाता है. फाइट के दौरान आंख के पास कट लग गए थे, उसके बाद भी जीता. हां, अगर मैं नहीं जीत पाता तो मुझे और मेरे फैंस को थोड़ी निराशा होती.

सवाल- विजेंदर के बाद आप और जितेंदर ने प्रोफेशनल फाइट में कदम रखा है. आने वाले समय में कुछ और बड़े बॉक्सर दिख सकते हैं?

जवाब- मैं समझता हूं ये देश के बॉक्सर्स को खुद ही फैसला लेना है. अब सब समझदार हैं. मैं सिर्फ यही कहूंगा कि धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय! माली सींचे सौ घड़ा , ऋतू आवे फल होय! यह समय ही है. देखिए ना विजेंदर, मैंने और जितेंद्र ने देश में बड़े लेवल पर बॉक्सिंग शुरू की थी. आज फिर हम एक ही रिंग में प्रोफेशनल बॉक्सिंग करते नजर आए. उम्मीद है देश के यंग बॉक्सर्स को भी आप रिंग में देखेंगे.

सवाल- प्रोफेशनल बॉक्सिंग इतनी लुभाती क्यों है?

जवाब- देखिए, सिर्फ पैसे के लिए प्रोफेशनल बॉक्सिंग चुना. ये कहना गलत होगा. प्रोफेशनल बॉक्सिंग की फाइट आपको परफॉर्म करने के लिए एक प्लेटफॉर्म देती है. सबसे बड़ी बात ये है कि इसे एंटरटनमेंट की तरह देखा जाता है. सैटरडे नाइट. शायद यही वजह है कि ऐसे इवेंट से सेलेब भी जुड़ते हैं. बड़े लेवल की मीडिया कवरेज भी ऐसे इवेंट के लिए प्लस पॉइंट है.

सवाल- करियर का टर्निंग पॉइंट क्या रहा? ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स या एशियन चैंपियनशिप?

सवाल- प्रोफेशनल करियर के लिए किस बॉक्सर को रोल मॉडल मानते हैं, जो आपके लिए प्रेरणा स्रोत है?

जवाब- दोस्त और मेरी फैमिली. वाइफ पूनम का सबसे ज्यादा रहा. शादी के बाद अगर उनका सपोर्ट नहीं मिलता तो यहां तक पहुंचना मेरे लिए आसान नहीं होता. वो हमेशा मुझे प्रमोट करती हैं.

सवाल- मीडिया में आपकी उम्र को लेकर काफी चर्चा रहती है. लोगों को लगता है इस उम्र में फाइट नहीं करना चाहिए?

जवाब- देखिए, लोग उम्र के बारे में क्या बात करते हैं? मुझे पता नहीं. अब किसी के कहने से तो मैं बॉक्सिंग छोड़ नहीं सकता. मैं कर रहा हूं और सबसे बेहतर कर रहा हूं. उम्र हावी होती तो कल जीतता कैसे? शायद सभी को जवाब मिल गया होगा.

सवाल- अपनी रणनीति के बारे में क्या कहेंगे. जब आप रिंग में होते हैं तो कुछ ज्यादा ही अग्रेसिव हो जाते हैं?

जवाब- मेरी रणनीति होती है कि पहले दो राउंड तक अपोनेंट को समझूं. उसका वीक पॉइंट देखने के बाद हर राउंड के बाद मैं अग्रेसिव होता चला जाता हूं. सच कहूं तो ऑफेंस इज ग्रेटेस्ट डिफेंस (आक्रमण ही सबसे अच्छा बचाव) है मेरे लिए. कल की ही फाइट को ले लीजिए. कट लगने के बाद मैं थोड़ी दूरी जरूर बना रहा था, लेकिन मौका मिलते ही पंज लगा देता था.

सवाल- आगे क्या सोचा है. आपका टारगेट क्या है?

जवाब- अभी तो बस शुरुआत है. आगे सफर इतना आसान नहीं है. जब रास्ता कठीन हो मुझे मजा आता है. यही वो वक्त होता है, जब आपको प्रूव करना होता है खुद को. मैं भी हारने वालों में से नहीं हूं. जब तक लड़ूंगा जीत के लिए. हालांकि, स्पोर्ट्स में हार और जीत तो लगी रहती है.

साभार न्यूज 18( नित्यानंद पाठक)

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