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एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप: शिव और सुमित फाइनल में, विकास को कांस्य

वजन कराने नहीं आए विकास ने दिया वॉकओवर

Bhasha Updated On: May 05, 2017 07:49 PM IST

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एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप: शिव और सुमित फाइनल में, विकास को कांस्य

चौथी वरीयता प्राप्त शिव थापा (60 किग्रा) और गैरवरीय सुमित सांगवान (91 किग्रा) ने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया. शिव ने सेमीफाइनल में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और शीर्ष वरीयता प्राप्त मंगोलियाई दोर्जनयामबुग ओटगोनडलाई को हराया. सुमित ने ताजिकिस्तान के दूसरे वरीय जाखोन कुबरेनोव को पराजित किया.

हालांकि ताशकंद में चल रहे इवेंट में मिडिलवेट (75 किग्रा) में शीर्ष वरीय विकास कृष्ण को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा. उन्होंने सेमीफाइनल में अपने चौथी वरीयता प्राप्त कोरियाई प्रतिद्वंद्वी ली डोंगयुन को वॉकओवर दे दिया था.

एशियाई मुक्केबाजी परिसंघ के एक अधिकारी ने कहा, ‘विकास कृष्ण सुबह वजन कराने के लिए नहीं आए. इसलिए उनके दक्षिण कोरियाई प्रतिद्वंद्वी को फाइनल के लिए वॉकओवर दे दिया गया.’

यह पता नहीं चला कि विकास ने मुकाबले में क्यों वॉकओवर दिया. आज का दिन हालांकि शिव और सुमित के नाम रहा, जिन्होंने अपने अधिक मशहूर प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जीत दर्ज की. विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता शिव एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मंगोलियाई के खिलाफ जजों के विभाजित फैसले में आगे बढ़ने में सफल रहे.

फाइनल में उनका मुकाबला उज्बेकिस्तान के एलनूर अब्दुरैमोव से होगा जिन्होंने सेमीफाइनल में चीन के जुन शान को हराया. दो बार के ओलंपियन शिव ने शुरू में रक्षात्मक रवैया अपनाया और अपने प्रतिद्वंद्वी को परखने में कुछ समय लगाया. असल में तीन मिनट के पहले राउंड में दोनों मुक्केबाज आक्रमण करने में हिचकिचाते रहे.

असम के इस 23 वर्षीय मुक्केबाज ने 2013 में इस प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था. तब वह बेंटमवेट वर्ग में खेलते थे. अब वह एशियाई चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीतने वाला पहला भारतीय बनने से केवल एक जीत दूर हैं.

शिव ने 2015 में बेंटमवेट में ही कांस्य पदक जीता था लेकिन अब वह लाइटवेट वर्ग में खेलते हैं. वह पिछले साल दिसंबर से इस वर्ग में खेल रहे हैं. उनके लिए किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में इस वर्ग में यह पहला पदक होगा. सुमित शाम के सत्र के आखिरी मुकाबले में उतरे.

पिछली बार इस प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतने वाले कुबरेनोव उन्हें खास चुनौती नहीं दे पाए. भारतीय मुक्केबाज ने चपलता दिखाई और उनके करारे मुक्कों और मजबूत रक्षण के सामने कुबरेनोव की एक नहीं चली.

भारत ने 2015 में पिछली एशियाई चैंपियनशिप में चार पदक जीते थे. विकास ने तब देश के लिए एकमात्र रजत पदक जीता था जबकि शिव, एल देवेंद्रो सिंह (52 किग्रा) और सतीश कुमार (91 किग्रा से अधिक) ने कांस्य पदक हासिल किए थे. एशियाई चैंपियनशिप में भारत की तरफ से आखिरी स्वर्ण पदक 2013 में शिव थापा ने जीता था. उनसे पहले 2009 में एम सुरंजय सिंह (52 किग्रा) सोने का तमगा जीतने में सफल रहे थे.

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