S M L

वर्ल्ड चैंपियनशिप : बोल्ट को देखने के चक्कर में मोहम्मद फराह को मत भूल जाना

34 साल के इस ब्रिटिश ने डिस्टेंस रनिंग हॉल ऑफ फेम में अपना अलग कोना बनाया है.

G. Rajaraman Updated On: Aug 02, 2017 10:07 PM IST

0
वर्ल्ड चैंपियनशिप : बोल्ट को देखने के चक्कर में मोहम्मद फराह को मत भूल जाना

लंदन में वर्ल्ड चैंपियनशिप शुरू होगी तो ज्यादा नजरें एक शख्स पर होंगी. उसैन लियो बोल्ट पर. जिस वक्त बोल्ट अपने अनगिनत प्रशंसकों को अपनी ऊर्जा, अपनी क्षमता, अपनी काबिलियत से चकाचौंध कर रहे होंगे, उस वक्त एक शख्स और नजर आएगा. सर मोहम्मद मुतार जमा फराह. या आसान शब्दों में मो फराह. उनकी ट्रेनिंग, धैर्य, दृढ़ता, मानसिक मजबूती और जुझारूपन ऐसी क्वालिटी हैं, जिसने उन्हें पूरी दुनिया के प्रशंसकों के बीच चैंपियन की तरह पेश किया है.

1980 का दशक ब्रिटिश एथलेटिक का स्वर्णिम समय था, जब उनके पास सेबेस्टियन को, डेली थॉम्पसन, स्टीव ओवेट, स्टीव क्रैम, स्टीव बैकली, टेसा सैंडरसन और कुछ हद तक लिनफर्ड क्रिस्टी थे. लेकिन दो ओलिंपिक में चार स्वर्ण जीतकर मो फराह सबसे ऊपर दिखाई देते हैं. इसके साथ दो और स्वर्ण पदक उनका इंतजार कर रहे हैं.

लंदन में दोनों फाइनल रोमांचक होंगे. कुछ युवा प्रतियोगी मो फराह को चुनौती देंगे. इथियोपिया के मुक्तार इदरीस और उनके युवा साथी सेलेमन बारेगा, युगांडा के जोशुआ किपरुइ चेप्तेगी ने लुसान में पांच हजार मीटर दौड़ का साल का सबसे तेज समय निकाला.

इसी तरह दस हजार मीटर. मो फराह को कुछ युवा यहां चुनौती देंगे. इथियोपिया के अबादी हादिस और जेमेल येमर ने इस साल दस हजार मीटर में थोड़ा बेहतर वक्त निकाला है. मो फराह ने साल का तीसरा सबसे तेज समय निकाला. इसके बावजूद, जो लोग भी पांच और दस हजार मीटर जैसी रेस को समझते हैं, वे बताएंगे कि मो फराह टैक्टिक्स के शहंशाह हैं.

मो फराह रेस को बाकी प्रतियोगियों को करामात से कंट्रोल करने जैसा काम करते हैं. वे भले ही मो फराह को हराने के लिए रणनीतियां बनाकर आते हों, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होता.

उनके विपक्षियों नें शुरुआती दौड़ के जरिए उनकी एनर्जी खत्म करने की कोशिश की. लेकिन ऐसा लगता है कि मो फराह के टैंक में हमेशा इतना पेट्रोल होता है कि वे आखिर में जोरदार स्प्रिंट लगाकर रेस खत्म कर सकें. ये कुछ इस तरह का है, जिसकी चाह हर किसी को होती है. ऐसी ऊर्जा, जो बाकियों के लिए रश्क का सबब होती है.

डिस्टेंस रनर के तौर पर मो फराह की विरासत ऐसी होगी, जहां पहुंचना आसान नहीं होगा. वे भले ही महानतम कहे जाने का दावा न करें. लेकिन जब आप पाएं कि फिनलैंड के लासे विरेन अकेले ऐसे एथलीट हैं, जिन्होंने मो फराह से पहले ओलिंपिक में डबल डबल किया है. मो फराह ने दो बार डबल 2012 और 2016 में किया था.

34 साल के ब्रिटिश ने डिस्टेंस रनिंग हॉल ऑफ फेम में अपना अलग कोना बनाया है. इसमें चेकोस्लोवाकिया या बाद में चेक रिपब्लिक के एमिल जातोपेक, इथियोपिया के मिरुत्स यिफ्टर और हैले गेब्रेसैलासी, मोरक्को सैद ओइता और हिकम अल गुरूज शामिल हैं.

उनके विपक्षियों पर एक नजर डालिए. उन्हें विश्व स्तरीय डिस्टेंस रेस मे पिछली बार हार 2011 में मिली थी. उसके बाद से उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप और ओलिंपिक में पांच गोल्ड जीते हैं. रशियन हैकर फैंसी बियर्स की वजह से कुछ काले बादल छाए थे. उनके अमेरिकी कोच अल्बर्टो सालाजार के खिलाफ जांच में यूएस एंटी डोपिंग एजेंसी के साथ एफबीआई भी आ गई थी. लेकिन सोमालिया में जन्मे इस एथलीट को कोई फिक्र हुई हो, ऐसा लगता नहीं.

पिछले महीने की शुरुआत मे डायमंड लीग के दौरान मो फराह ने कहा था, ‘मैं सिर्फ अपने पैरों पर नियंत्रण रख सकता हूं. इस पर नियंत्रण रख सकता हूं कि मैं क्या करूं. मैं कभी ड्रग टेस्ट में फेल नहीं होऊंगा. मैं ऐसा हूं. मुझे क्ली स्पोर्ट्स में  भरोसा है. मुझे जो करना है, मैं उसका आनंद लेने वाला हूं. मैं मुस्कुराते रहना चाहता हूं.’

अपने घर में प्रदर्शन करते हुए दबाव का सामना करना नया नहीं है. भले ही वो अब कई साल से लंदन से दूर हैं. उन्होंने लाइमलाइट में रहने को चैंपियन की तरह डील किया है. अगले कुछ दिनों में हम उन्हें फिर मुस्कुराते देख सकते हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi