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क्या कहता है श्रीकांत का एक हफ्ते में दो बार वर्ल्ड नंबर वन को हराना

इंडोनेशिया ओपन जीता, उसके बाद ऑस्ट्रेलिया ओपन में भी शानदार प्रदर्शन

Manoj Chaturvedi | Published On: Jun 23, 2017 06:13 PM IST | Updated On: Jun 23, 2017 06:48 PM IST

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क्या कहता है श्रीकांत का एक हफ्ते में दो बार वर्ल्ड नंबर वन को हराना

किदाम्बी श्रीकांत की शटल आजकल आसमान में ऊंची उड़ रही है. उन्होंने पिछले दिनों में शानदार प्रदर्शन से अपने करियर को ट्रैक पर ला दिया है. श्रीकांत ने पिछले दिनों इंडोनेशियन ओपन के रूप में दूसरा सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब जीता.  यही नहीं पिछले हफ्ते में  विश्व के नंबर एक कोरियाई खिलाड़ी सोन वान हो को दो बार  फतह करके जता दिया है कि उनकी उड़ान किस मुकाम पर पहुंचने के लिए है.

श्रीकांत और सफलताओं का साथ कोई नया नहीं है. वह 2014 में चीन के दिग्गज शटलर लिन दान को हराकर चाइना ओपन सुपर सीरीज प्रीमियर खिताब जीत चुके हैं. लेकिन फॉर्म की गिरावट और चोटों की समस्याओं के कारण वह रैंकिंग में बहुत नीचे फिसल गए थे. लेकिन इस साल पहले सिंगापुर ओपन में फाइनल तक चुनौती पेश करने के बाद काजूमासा सकाई को हराकर इंडोनेशियाई ओपन का खिताब जीतकर रैंकिंग में 11 स्थान की उछाल के साथ 11वीं रैंकिंग पर आ गए हैं.

टॉप फाइव में हो सकते हैं शामिल

श्रीकांत जिस तरह से ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज में खेल रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि यह भारतीय शटलर जल्द ही टॉप पांच में शामिल हो सकता है. इस तरह वह जून 2015 में हासिल की तीसरी रैंकिंग की तरफ बढ़ रहे हैं. वह ऑस्ट्रेलियन ओपन में सहज अंदाज में सेमीफाइनल में पहुंच गए हैं. उन्होंने साथी खिलाड़ी बी साई प्रणीत को 25-23, 21-17 से हराया. वह लगातार दूसरे खिताब से मात्र दो जीत दूर रह गए हैं.

पुरुष बैडमिंटन में हाल के सालों में इस तरह के प्रदर्शन दिखाई नहीं  दिए हैं. श्रीकांत के खिताब जीतने से पहले बी साई प्रणीत ने सिंगापुर ओपन सुपर सीरीज का खिताब जीता था. महत्वपूर्ण यह नहीं है कि सिंगापुर में प्रणीत ने श्रीकांत और श्रीकांत ने ऑस्ट्रेलियन ओपन में साई प्रणीत को हराया है. महत्वपूर्ण यह है कि अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारतीय खिलाड़ी खिताब जीत रहे हैं.

किदाम्बी श्रीकांत के खेल में यह सुधार एकाएक नहीं आ गया है बल्कि इसके लिए उन्होंने जमकर मेहनत की है. भारतीय पुरुष खिलाड़ियों के प्रदर्शन में आए सुधार के पीछे एक कोच का हाथ है और वह हैं इंडोनेशिया के मुल्यो हांडोयो. इस इंडोनेशियाई कोच को गोपीचंद का बोझ कम करने के लिए लाया गया है. मुल्यो ने इस साल मार्च में  एकल खिलाड़ियों के साथ जुड़ने की इच्छा जाहिर की थी. असल में यह जुड़ाव ही भारतीय पुरुष बैडमिंटन को हाल में मिली सफलताओं का राज है.

मुल्यो ओलिंपिक के स्वर्ण पदक विजेता इंडोनेशियाई खिलाड़ी तौफीक हिदायत के कोच रह चुके हैं. उन्होंने जुड़ते ही दो बातों पर ध्यान दिया. पहली खिलाड़ियों की फिटनेस सुधारना और दूसरी कोर्ट में आक्रामकता को लाना है. भारतीय राष्ट्रीय कोच गोपीचंद भी मानते हैं कि मुल्यो का कोचिंग देने का अपना तरीका है और उन्हें उस पर ही चलने की छूट भी दी गई. इसका परिणाम सभी के सामने है.

पहले डबल्स के खिलाड़ी थे श्रीकांत

कभी-कभी कोई सलाह बहुत कारगर साबित होती है और श्रीकांत को दी गई सलाह भी कारगर साबित हुई. गुंटूर के इस शटलर को उसके पिता केवीएस कृष्णा 2008 में गोपीचंद अकादमी में भर्ती कराने आए. यहां श्रीकांत के बड़े भाई नंदगोपाल भी इसी अकादमी में खेला करते थे. गोपीचंद ने उन्हें युगल और मिश्रित युगल में खिलाना शुरू कर दिया. कुछ सालों बाद वह एकल में तो खेलने लगे पर इसी पर फोकस नहीं था.

2013 की इंडियन बैडमिंटन लीग में श्रीकांत और तत्कालीन नंबर एक खिलाड़ी ली चोंग वेई एक ही टीम में थे. इन दोनों को साथ अभ्यास करते देख ली चोंग वेई के कोच तेई जो बोक को लगा कि यह तो ली की तरह ही खेलता है. उन्होंने श्रीकांत को एकल को ही आजमाने की सलाह दी. कोच गोपीचंद की भी सोच यही थी. इसके बाद श्रीकांत ने पूरा फोकस एकल पर लगा दिया और इस सलाह का परिणाम हम सभी के सामने है.

देश  की महिला शटलर सायना नेहवाल और पीवी सिंधु पहले ही देश की महिला बैडमिंटन को एक ऊंचे मुकाम पर पहुंचा चुकी हैं. लेकिन पुरुष बैडमिंटन को महिलाओं जैसी सफलताएं नहीं मिल पा रहीं थीं. लेकिन अब श्रीकांत, बी साई प्रणीत और एचएस प्रणय जैसे उम्दा खिलाड़ी एक साथ सामने आए हैं. इसके अलावा परुपल्ली कश्यप भी खोई रंगत को पाने के प्रयासों में जुटे हैं. ऐसा नहीं है कि भारत में अच्छे पुरुष खिलाड़ी पहले नहीं निकले  हैं.

प्रकाश पादुकोण, सैयद मोदी और खुद गोपीचंद ने अपने खेलने के दिनों में खूब सुर्खियां बटोरी हैं. लेकिन अच्छे खिलाड़ियों का समूह पहली बार बना है. इस तरह के मौहल में अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिलता है. गोपीचंद को अभी भी लगता है कि श्रीकांत के खेल में सुधार अभी भी संभव है. अगर उनके खेल में और सुधार आता है तो उन्हें हम सभी साल अंत तक पहले पायदान पर देख सकते हैं

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