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बस अपना सपना मनी-मनी बनकर रह गया है आईपीएल

बीसीसीआई ने आईपीएल को इतना नुकसान पहुंचाया कि इसकी विश्वसनीयता खत्म हो गई.

Aakar Patel | Published On: Apr 16, 2017 01:17 PM IST | Updated On: Apr 16, 2017 01:56 PM IST

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बस अपना सपना मनी-मनी बनकर रह गया है आईपीएल

आईपीएल का 10वां सीजन चल रहा है. इसे पहले की तुलना में ज्यादा दर्शक भी मिल रहे हैं. मेरे मन में आईपीएल के लिए हमेशा दो तरह के भाव रहे हैं. आईपीएल को बेहतर तरीके से संचालित किया गया था, लेकिन बीसीसीआई ने इसे इतना नुकसान पहुंचाया कि इसकी विश्वसनीयता ही खत्म हो गई.

बीसीसीआई में फैले भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के खात्मे के मकसद से अदालत ने इसके कामकाज में दखल दिया. आप कह सकते हैं कि भारत में अदालतें बहुत दखल देती हैं. यह सच भी है. लेकिन ऐसा लगता है कि अदालत के दखल के बाद आईपीएल की विश्वसनीयता बहाल हुई है. यह एक अच्छी खबर है, क्योंकि आईपीएल बहुत से नए खिलाड़ियों को पैसे कमाने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देता है. एक दशक पहले ऐसा संभव नहीं था क्योंकि तब आईपीएल नहीं होता था.

Bengaluru : Bollywood Singer Benni Dayal and Actress Kriti Sanon performs during the IPL opening ceremony before the start of the IPL 10 match between Royal Challengers Bangalore and Delhi Daredevils at Chinnaswamy stadium in Bengaluru on Saturday. PTI Photo by Shailendra Bhojak(PTI4_8_2017_000239B)

आईपीएल में आठ टीमें होती हैं और हर टीम के प्लेइंग 11 में सिर्फ चार विदेशी खिलाड़ी हो सकते हैं. लिहाजा कम से कम 56 भारतीय खिलाड़ियों को अपनी योग्यता प्रदर्शित करने का मौका मिलता है. पहले नए क्रिकेटरों को इस तरह के मौके नहीं मिलते थे.

हालांकि देश में स्थानीय टीमें मौजूद थीं, जो रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में हिस्सा लेती थीं. लेकिन इन टूर्नामेंट में खेलकर कोई मशहूर नहीं हो सकता. नाम कमाने के लिए जरूरी था कि आप टीम इंडिया का हिस्सा बनें और राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करें. बहरहाल, भारत के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के वित्तीय पॉवरहाउस बनने के साथ स्थानीय टूर्नामेंट में क्रिकेटरों को मिलने वाले पैसे में भी सुधार हुआ है.

अरसे तक इंगलैंड के काउंटी क्रिकेट में खेलने वाले खिलाड़ियों की तुलना में हमारे देश में रणजी खेलने वाले खिलाड़ियों को कम पैसे मिलते थे. हमारे देश में क्रिकेटरों की पिछली पीढ़ी इंगलैंड की काउंटी क्रिकेट की 18 टीमों में से किसी का हिस्सा बनना चाहती थी.

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राहुल द्रविड़ केंट, सौरव गांगुली ग्लैमॉर्गन और सचिन तेंदुलकर यॉर्कशायर के लिए खेलते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होता, क्योंकि भारत इतिहास को काफी पीछे छोड़ चुका है और अब अपने खिलाड़ियों को दुनिया की किसी टीम से बेहतर पैसे देता है. उदाहरण के लिए विराट कोहली ने कभी काउंटी नहीं खेला है और अगर उन्हे काउंटी खेलने का प्रस्ताव भी मिले तो शायद वे स्वीकार न करें, क्योंकि भारत में खेलकर उन्हें वहां के मुकाबले ज्यादा पैसे मिल जाएंगे.

अब तो बहुत से दूसरे देशों के खिलाड़ियों के लिए आईपीएल पैसा बनाने का जरिया बन गया है. मुझे सनत जयसूर्या के बारे में एक बात याद आ रही है. जयसूर्या ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओपनिंग पार्टनर रोमेश कालुवितरना के साथ मिलकर वनडे क्रिकेट के दो दशक पहले के तौर-तरीकों को बदल डाला था.

श्रीलंका की टीम ने एक विस्फोटक शैली विकसित की और 1996 का वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया. श्रीलंका की टीम विश्व कप टूर्नामेंट में जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, उनकी सरकार अपने खिलाड़ियों को और पैसे देने का वादा करती जा रही थी. फिर भी जयसूर्या ने एक दिन कहा कि उन्हें 1.75 लाख रुपए की और दरकार है ताकि वह अपने घर का निर्माण पूरा करा सकें.

NOTTINGHAM, ENGLAND - JULY 09: Former Indian cricketer Sunil Gavaskar speaks with Mahendra Singh Dhoni of India ahead of day one of 1st Investec Test match between England and India at Trent Bridge on July 9, 2014 in Nottingham, England. (Photo by Gareth Copley/Getty Images)

अपनी आत्मकथा में सुनील गावस्कर ने लिखा है कि वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में जब भी शतक लगाते थे, उनके पिता उन्हें दस रुपए देते थे. एक महीना ऐसा भी आया कि जब गावस्कर ने इतने शतक लगाए कि उनके घर का बजट ही खराब हो गया. आज के दौर से तुलना करें तो ये रकम कितनी मामूली प्रतीत होती है. आज के क्रिकेटर कुछ ही हफ्ते ही मेहनत करके करोड़ों कमा लेते हैं. कुछ भारतीय क्रिकेटर तो साल भर मे 100 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा लेते हैं.

मुझे उनकी ऐसी किस्मत से कोई रंज नहीं है, बल्कि मैं एक बात से खुश भी हूं. आईपीएल में खेलने वाले बहुत से खिलाड़ी बेहद गरीब परिवार से आते हैं. कोई ऑटो ड्राइवर का लड़का है तो किसी के परिवार की आमदनी गुजारा करने लायक भी नहीं है. ऐसे क्रिकेटर अपने परिवार के पहले सदस्य होंगे जिनका आईपीएल की वजह से सामाजिक स्तर बदला है.

Mumbai: Mumbai Indians' Harbhajan Singh and Rohit Sharma celebrate the wicket of David Warner during an IPL match against Sunrisers Hyderabad in Mumbai on Wednesday. PTI Photo by Mitesh Bhuvad(PTI4_12_2017_000219B)

मेरे विचार से यह बहुत ही अच्छी बात है कि इस तरह के बैकग्राउंड के युवा खिलाड़ी पैसा और प्रसिद्धि का स्वाद चख रहे हैं और देश और दुनिया के क्रिकेटिंग लीजेंड के साथ खेल रहे हैं. इससे उनके जैसे तमाम युवाओं में आत्मबल का संचार होगा और उनमें यह अहसास पैदा होगा कि गरीबी में पैदा होना कोई गुनाह नहीं है.

यह स्थिति तमाम सुविधाओं में पले-बढ़े संपन्न परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए भी अच्छी है. वे गरीब परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों के संपर्क में आएंगे. इससे दुनिया के बारे में उनके नजरिए में बदलाव आएगा. अपने देश में हम मध्यमवर्गीय लोग बेहद अलग-थलग जिंदगी जीते हैं. स्कूल जाने से लेकर हम सिर्फ अपने ही सामाजिक वर्ग के लोगों के संपर्क में रहते हैं.

Bengaluru : Mumbai Indians Skipper Rohit Sharma with teammates celebrates after taking the catch of Royal Challengers Bangalore's AB De Villiers during their IPL 2017 match at Chinnaswamy Stadium in Bengaluru on Friday. PTI Photo by Shailendra Bhojak (PTI4_14_2017_000160B)

इसीलिए मैं शिक्षा के अधिकार को एक बेहतर कानून मानता हूं क्योंकि यह प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटें गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए आरक्षित करने का प्रावधान करता है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस कदम को वापस खींचा जा रहा है.

इससे वंचित और संपन्न दोनों वर्गों के छात्रों को नुकसान होगा. इस प्रावधान के खत्म होने से गरीब बच्चे नए और अलग वातावरण के संपर्क में नहीं आएंगे और संपन्न घर के बच्चे देश की वास्तविकता के प्रति संवेदनशील होने से वंचित हो जाएंगे.

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