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भारतीय फुटबॉल टीम के गोलकीपर सुब्रत पॉल डोप टेस्ट में फेल, कराएंगे बी सैंपल टेस्ट

सुब्रत पॉल ने कहा - मैं निर्दोष हूं, बी सैंपल की जांच कराऊंगा

FP Staff | Published On: Apr 25, 2017 02:50 PM IST | Updated On: Apr 25, 2017 06:38 PM IST

भारतीय फुटबॉल टीम के गोलकीपर सुब्रत पॉल डोप टेस्ट में फेल, कराएंगे बी सैंपल टेस्ट

भारतीय फुटबॉल के लिए एक बुरी खबर है. भारतीय फुटबॉल टीम के गोलकीपर सुब्रत पॉल डोप टेस्ट में फेल हो गए है. उन्हें कुछ प्रतिबंधित दवाएं लेने का दोषी पाया गया है. उन पर चार साल का बैन लग सकता है. हालांकि सुब्रत पॉल ने खुद को निर्दोष बताया और कहा कि वो बी सैंपल की जांच कराएंगे. ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन ने कहा कि पॉल को नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) की ओर से डोप पॉजिटिव पाया गया है.

नाडा के प्रमुख नवीन अग्रवाल ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इससे पहले मार्च महीने में भी इस भारतीय फुटबॉलर पर डोपिंग की आंच आ चुकी है. लेकिन अग्रवाल ने इससे ज्यादा कुछ भी बताने से इन्कार कर दिया.

एआईएफएफ सचिव कुशल दास का कहना है, ‘ये पूरा मामला अब सुब्रत और नाडा के बीच है और एआईएफएफ का इसमें कुछ खास किरदार नहीं बचा है. फिर भी जाहिर सी बात है कि सुब्रत को जब भी मदद की जरूरत होगी, तो एआईएफएफ मौजूद रहेगा.’ मार्च में भी सुब्रत को डोप संदिग्ध पाया गया था. इस टेस्ट के फौरन बाद भारत का कंबोडिया से मैच था. इस मैच में सुब्रत मैदान पर नहीं उतरे थे. उनकी जगह गुरप्रीत सिंह संधू ने गोलपोस्ट संभाला था,

वाडा के नए नियमों के अनुसार पहली बार डोपिंग में पकड़े जाने वाले खिलाड़ी को अधिकतर चार साल का प्रतिबंध लगाया जाएगा. तीस वर्षीय पॉल ने कहा कि वह ‘बी’ नमूने का परीक्षण करवाएंगे और दावा किया कि वह निर्दोष हैं. पॉल ने कहा, ‘इस खबर से मैं आहत हूं कि मैं डोप परीक्षण में नाकाम रहा. मुझे नाडा या एआईएफएफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है. मुझे मीडिया से इसकी जानकारी मिली. मैं साबित करूंगा कि मैं निर्दोष हूं क्योंकि मैंने दस साल से भी अधिक के अपने करियर में पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता से खेल खेला है.’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं ‘बी’ नमूने के परीक्षण का आग्रह करूंगा क्योंकि मुझे लगता है कि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे कि मैं डोप टेस्ट में फेल हो जाऊं. मुंबई राष्ट्रीय शिविर में सभी खिलाड़ियों का परीक्षण हुआ था और मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरा नमूना पाजीटिव पाया जाएगा.’

पॉल ने भारत की तरफ से 2007 में पदार्पण किया था और वह 2015 तक 64 मैचों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. इस गोलकीपर ने कहा कि अपने करियर में उन्होंने जो लक्ष्य तय किये थे उनमें से अधिकतर वह हासिल कर चुके है और इसलिए बेईमानी करने और अपनी छवि खराब करने का कोई कारण नहीं है. पश्चिम बंगाल के पॉल भारत के बेहतरीन गोलकीपरों में से एक रहे हैं. जब इंग्लैंड के बॉब हॉटन कोच और बाइचुंग भूटिया कप्तान थे तब वह देश के नंबर एक गोलकीपर थे. उन्होंने 2007 और 2009 में भारत की नेहरू कप में खिताबी जीत में अहम भूमिका निभाई थी.

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